2005 का एमओयू 2018 में कैसे होगा लागू, वसून्धरा की विडंबना

०० कंपनी के मालिक अपने प्लांट की असफलता के लिए वास्तु दोष को मान रहे जिम्मेदार

०० कंपनी को आज तक जल संसाधन विभाग से पानी के लिए नही मिली जरूरी अनुमति

बिलासपुर। वसुंधरा के मालिकों ने वर्ष 2005 में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डाॅ. रमन के साथ एमओयू साईन किया था। आश्चर्य की बात है कि 2005 से आज तक छत्तीसगढ़ राज्य का मुख्यमंत्री बदला नही है। किन्तु मस्तुरी क्षेत्र के पाराघाट, बेलटुकरी, भनेशर में स्थापित होने वाला प्लांट में एक ईंट भी नही रखी जा सकी। कंपनी के मालिक अपने प्लांट की असफलता के लिए वास्तु दोष को जिम्मेदार बताते है। उन्होंने इस बार अपने उद्योग की सरकारी औपचारिकताओं को पुरा करने के पूर्व प्लांट स्थल पर वास्तुदोष समाधन पूजन कराया है।

वर्ष 2005 में कंपनी ने इस क्षेत्र में लगभग 130 एकड़ जमीन क्रय की यह पुरी निजी जमीन है। सरकारी जमीन का एक टुकड़ा भी कंपनी ने नही लिया। कंपनी की सोच थी की निजी जमीन लेने से सरकारी दखलअंदाजी कम होगी। हुआ इसका उल्टा वर्ष 2005 में ही तत्कालीन बिलासपुर कलेक्टर सोनमणी बोरा की उपस्थिति में यहां की जनसुनवाई हुई थी। कंपनी को आज तारिख तक जल संसाधन विभाग से पानी के लिए जरूरी अनुमति नही मिली है। उल्टे कंपनी ने विभाग के पास जो सुरक्षा धन जमा किया था। वह राजसात हो गया है। इसी तरह कंपनी ने जिन लोह अयस्क की खदानों को मांगा था वह भी तकनिकी अरचनों में फसा है। एसईसीएल से कोयला आपूर्ति संबंधी जरूरी निर्णय फाईलों में उल्झे हुए है। छत्तीसगढ़ राज्य जहां 14 वर्षों से एक ही राजनैतिक दल की सरकार है। लगातार एक ही मुख्यमंत्री है और मुख्यमंत्री स्वयं देश विदेश में घूम-घूम कर विश्वसनीय छत्तीसगढ़ की अलख जगा रहा है। यह कैसे संभव है कि कोई उद्योग पति 2005 में एमओयू करे और 2018 तक प्लांट में एक ईंट न रखी जाए। औद्योगिक निती पूनरवास निती के मुताबिक खेती की जमीन क्रय करने के बाद जब उसका लेंड यूज़ बदल दिया जाता है तब एक समय सीमा के भीतर वह उद्योग चालू हो जाना चाहिए। नही तो किसानों को मुल्य का अंतर मिलना चाहिए। मस्तुरी में उद्योग के लिए जमीन वर्ष 2006 में ली गई और आज वर्ष 2018 में इस पर प्लांट डालने की कोशिश की जा रही है। वर्ष 2005 में मेमोरेंडम आॅफ अंडरस्टेंडिंग को वर्ष 2018 में कैसे अमली जामा पहनाया जा सकता है। यह बात साधारण नागरिकों के गले नही उतरती। कंपनी ने भी अपनी गतिविधियों की कोई भी सुचना स्थानीय प्रशासन को नही दी। यह बात संदेह पैदा करती है।

जमीन पर चल रहा पूजा पाठ किसानों ने दर्ज कराई शिकायत :- पाराघाट के किसानों ने आज मस्तुरी थाने में शिकायत की और बताया की उनकी जमीनों पर एक औद्योगिक कंपनी पूजा पाठ कर रही है। जो लोग पूजा कर रहे है वे स्वयं को कंपनी का भृत्य और संदेशवाहक बताते है। किसानों ने उनसे कंपनी के कागजात मांगे किन्तु जो लोग सिर्फ पूजा पाठ करने आए है उनके पास कंपनी के न तो कोई कागज है न ही किसानों के प्रश्नों के उत्तर। इसी कारण ग्रामीणों ने संबंधित थानों में शिकायत करके निवेदन किया की। पुलिस जांच करे की किसानों की जमीन पर अवैध रूप से पूजा पाठ का काम कौन करा रहा है। शिकायत कर्ताओं में किसान नेता नागेन्द्र राय, देवचन्द्राकर एवं मस्तुरी क्षेत्र के अभयनारायण राय सहित भारी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

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