महिला बाल विकास का भ्रष्ट सिस्टम है सखी वन स्टॉप सेन्टर

० सामाजिक कार्यकर्त्ता कुणाल शुक्ला व ममता शर्मा ने लगाए आरोप कहा मंत्री  राष्ट्रपति से मिले अवॉर्ड की हकदार नही

०० जिस महिला को रेस्क्यु किया गया उसे फिर उसी नरक में छोड़ आए और जानकारी लेने पर किया जाता राह गुमराह

रायपुर| एक असक्त महिला फुटपाथ मे बिना छत के कष्टदायी अवस्था मे जीवन जीने मजबूर थी जिसे देखकर सामाजिक कार्यकर्त्ता ममता शर्मा व कुणाल शुक्ला ने महिला बाल विकास विभाग द्वारा संचालित सखी सेंटर मे शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद रेस्क्यू करने के लिए महिला हेल्पलाइन से 2 घण्टे बाद टीम पहुचती है फिर उस महिला को जो भिखारी है,नहला कर साफ कपड़े पहनाकर  3 घण्टे बाद उसी स्थान पर छोड़ दिया गया हैं। इसकी जानकारी होने पर सामाजिक कार्यकर्त्ता द्वारा सवाल करने पर सखी सेंटर के जिम्मेदार पदाधिकारियों ने गोलमोल जानकारी देते हुए मामले से इतिश्री कर लिया|

सामाजिक कार्यकर्त्ता ममता शर्मा व कुणाल शुक्ला ने बताया कि एक असक्त महिला फुटपाथ मे बिना छत के कष्टदायी अवस्था मे जीवन जीने मजबूर थी जिसे देखकर हमारे द्वारा सखी सेंटर मे शिकायत दर्ज कराई गयी थी| इस मामले को लेकर आज हम सखी सेंटर पहुँचे जहाँ हमारे  जानकारी माँगने पर सिर्फ फर्जी दस्तावेजों को आधार बनाकर पूरी तरह से पेपरों मे ही कार्य करना दिखाया जबकि वृद्धाश्रम मे महिला को सुपुर्द करने हेतु सखी सेंटर ने एक पत्राचार किया पर वहाँ की अधीक्षिका ने भर्ती लेने से मना कर दिया।सखी सेंटर की कार्यकर्ता ने अधीक्षिका से सुपूर्दनामे मे लीना यादव के हस्ताक्षर ले लिया और केस  फाईल कर दिया की महिला को वृद्धाश्रम मे भर्ती करा दिया गया है।ऐसे ही झूठी वाहवाही कर.. जिसके  बेहतर कार्य के लिए  मंत्री रमशिला साहू जी झूठ का पुलिंदा दिखाकर फर्जी अवॉर्ड लेतीं हैं। कल ही विभाग द्वारा संचालित सखी सेंटर मे शिकायत दर्ज कराई गई थी,कि एक असक्त महिला फुटपाथ मे बिना छत के कष्ट दाई अवस्था मे है।इसके रेस्क्यू करने के लिए महिला हेल्पलाइन से 2 घण्टे बाद टीम पहुचती है।फिर उस महिला को जो भिखारी है,नहला कर साफ कपड़े पहनाकर  3 घण्टे बाद उसी स्थान पर छोड़ दिया गया हैं।पूछने पे बहुत सारी गोल मोल बातें की गई कि हमारे सेन्टर मेही रखा है,कल उनका हेल्थ चेकअप होगा फिर कॉउंसलिंग कराया जाएगा आदि।फिर जब मैंने बोला कि उस महिला को तो आपलोगों ने उसी स्थान मे छोड़ दिया है, तब ओ इधर उधर की बात कर पता करके फोन करने की बात कह फोन रख दिया।बताया कि सरकारी वृद्धाश्रम मे उसे रखने से मना कर दिया है।जब आश्रम की लीला यादव जी से मेरी बात हुई तो उनका कहना है…समाज कल्याण उन्हे बहुत कम ग्रान्ट देता है,उनके पास स्वीपर की व्यवस्था के भी पैसे नही हो पातें हैं और भी व्यवस्था उन्हें अपने ही संसाधनों से जुगाड़ने पड़तें हैं।आखिर विभाग इतना गैर जिम्मेदाराना कार्य कर रहा है, और उस बिभाग को उसी कार्य के लिये अवॉर्ड दिया जाना कैसे संभव है।विभाग की जिम्मेदार मंत्री छत्तीसगढ़ की 22 हजार बेटियों के लापता होने पर भी खामोश हैं फिर तो खाली सेटिंग से ही अवार्ड लिया गया प्रतीत होता है।इस पूरे प्रकरण मे सिर्फ दिखावटी खानापूर्ति सुर फर्जी दस्तावेजों (जो एक अपराध है)को आधार बना पूरे सिस्टम का दुरुपयोग किया जारहा है।

 

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