महिला अस्मिता शर्मसार और रमन सिंह पा रहे पुरस्कार: कांग्रेस

०० 20 हज़ार महिलाएं लापता, हर दिन छह बलात्कार, लिंगानुपात घट रहा है

०० महिला नेत्रियों की मांग पुरस्कार वापस कर राज्य की महिलाओं से माफी मांगें भाजपा सरकार

रायपुर| महिला दिवस के अवसर पर और छत्तीसगढ़ को महिला उत्थान और नारी सशक्तिकरण पर तीन-तीन पुरस्कार मिलने पर कांग्रेस ने कहा है कि चुनाव नजदीक आते ही रमन सरकार को पुरस्कार मिलने लगे है। हकीकत तो यह है कि छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार महिलाओं और बालिकाओं की सबसे बड़ी शोषक है और केंद्र की भाजपा सरकार सारे तथ्यों और आंकड़ों को दरकिनार करके उसे महिला उत्थान और स्त्री सशक्तिकरण का पुरस्कार दे रही है, उन्होंने कहा है कि यह छत्तीसगढ़ का दुर्भाग्य है कि महिलाओं के सबसे बड़े शोषक को भाजपा महिमामंडित कर रही है उन्होंने मांग है कि इसे वापस लेकर राज्य की महिलाओं से भाजपा सरकारों को माफी मांगनी चाहिए। यहां जारी एक संयु्क्त बयान में महिला कांग्रेस की पूर्व सांसद श्रीमती करुणा शुक्ला, प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती फूलो देवी नेताम, कांग्रेस संचार विभाग की प्रवक्ता श्रीमती किरणमयी नायक ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से ठीक एक दिन पहले यह खबर विचलित करने वाली है उन्होंने कहा है कि आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार दरअसल महिलाओं की सबड़े बड़ी शोषक है और उनके राज्य में महिलाएं सबसे अधिक असुरक्षित हैं।

बयान में कहा गया है कि महिला उत्थान का पुरस्कार एक ऐसे राज्य को दिया जा रहा है। जहां पिछले पांच वर्षों में 19670 महिलाएं लापता हो गईं और रमन सरकार उन्हें तलाश भी नहीं कर पा रही है। विधानसभा में दिए गए आंकड़ों के अनुसार राज्य में बलात्कार की घटनाएं 12 प्रतिशत की दर से बढ़ रही हैं और हर दिन औसतन छह महिलाएं बलात्कार की शिकार हो रही है। राष्ट्रीय अपराध के आंकड़ों के अनुसार बच्चियों के खिलाफ यौन शोषण के मामलों में पॉक्सो कानून के तहत दर्ज अपराध के मामले में छत्तीसगढ़ देश में दूसरे नंबर पर है।मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट कहती है कि बीजापुर के चिन्नागेलूर, गुंडम और पेड्डागेल्लूर आदि स्थानों पर सुरक्षाकर्मियों ने कम से कम 16 आदिवासी महिलाओं के साथ अनाचार किया और राज्य सरकार के अधिकारी उन लोगों को डराते धमकाते रहे। जिन्होंने यह मामला दर्ज करवाने की कोशिश की. बीजापुर की ही 12 महिलाओं ने हाईकोर्ट में पुलिसकर्मियों के खिलाफ बलात्कार का मामला दायर किया है. कांकेर में छात्रावास में बच्चियों का यौनशोषण भी इसी भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुआ. इसी छत्तीसगढ़ में मीना खल्को को नक्सली बताकर मार दिया गया. आयोग की रिपोर्ट के बरसों बाद भी सरकार दोषी लोगों को पकड़ नहीं पाई है। मड़कम हिड़मे को भी नक्सली बताकर फर्जी एनकाउंटर में मार दिया गया। दो आदिवासी बच्चियों ने हाईकोर्ट में हलफनामा देकर कहा है कि बस्तर में पुलिस आती है तो महिलाएं अपने बच्चों को लेकर जंगलों में भाग जाती हैं. कांग्रेस की महिला नेत्रियों ने कहा है कि ऐसे छत्तीसगढ़ राज्य को महिला उत्थान का पुरस्कार दरअसल पुरस्कारों की हकीकत को दर्शाता है।

संयुक्त बयान में कहा गया है कि नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट बताती है कि छत्तीसगढ़ में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या लगातार घट रही है। मुख्यमंत्री रमन सिंह के अपने कवर्धा जिले में 11000 बच्चियों ने स्कूल की पढ़ाई छोड़ दी। राज्य में टोनही के नाम पर 2005 से 2017 तक 1400 महिलाओं को प्रताड़ित किया गया। सच यह है कि राज्य में अभी भी 37.7 प्रतिशत महिलाएं कुपोषण की शिकार हैं और रमन सिंह महिला उत्थान और नारी सशक्तिकरण का पुरस्कार ले रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में गर्भाशय काण्ड, आंख फोंडवा कांड में महिलाओं पर अत्याचार के अब तक दोषियों पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी। झलियामारी कांड में नाबालिंग आदिवासी छात्राओं का यौनशोषण की घटनाओं में अब तक न्याय नहीं मिल सका है। आईजी पवन देव के खिलाफ महिला आरक्षक की शिकायत पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं। महाधिवक्ता जुगल किशोर गिल्डा के खिलाफ महिला अधिवक्ता की शिकायत पर कोई न्याय अब तक नहीं। मंत्री अजय चंद्राकर के खिलाफ महिला उत्पीड़न के मामले में अब तक कोई कार्यवाही नहीं।कांग्रेस नेत्रियों ने कहा है कि यह पुरस्कार राज्य की महिलाओं का और उनकी अस्मिता का अपमान है।

महिला दिवस के दिन ही रमन सरकार का महिला विरोधी चरित्र बेनकाब – किरणमयी नायक

 

आंगनबाड़ी की सहायिकाओं के आंदोलन के दमन की कड़े शब्दों में निंदा करते हुये प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के सदस्य एवं पूर्व महापौर किरणमयी नायक ने कहा है कि अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन बड़े-बड़े सरकारी विज्ञापन भाजपा सरकार के द्वारा महिला हित की बड़ी-बड़ी बातें, मुख्यमंत्री रमन सिंह के बड़े-बड़े अल्फाज, महिला हित के बड़े-बड़े दावे के बीच हकीकत यह है कि लाखों महिलायें आंगनबाड़ी सहायिकायें अपना घर छोड़कर, अपनी गृहस्थी छोड़कर, बाल-बच्चों को छोड़कर, परिवारों को छोड़कर, अपना काम छोड़कर राजधानी में आकर आंदोलन करने में मजबूर है। यही है सरकार का महिला के प्रति रवैय्या। दरअसल सरकार आंगनबाड़ी साहिकाओं सहित महिलाओं की समस्याओं के प्रति संवेदनहीन बनी हुयी है। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सरकार बनेगी और कांग्रेस की सरकार आंगनबाड़ी सहायिकाओं और समाज की सभी वर्गो के समस्याओं के प्रति संवेदनशील रवैय्या अपना कर उनको हल करेंगी।

 

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