कोरी वाहवाही लूटने के लिये लगाई भाजपा की महिला संसद : किरणमयी

०० ये कैसी महिला संसद जहां केवल अकेला सत्ता पक्ष और मंच पर सारे पुरूष

रायपुर। कोरी वाहवाही लूटने के लिये भाजपा की महिला संसद लगाने का आरोप लगाते हुये प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संचार विभाग के सदस्य किरणमयी नायक ने कहा है कि संसद भारतीय संविधान की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है जहां पक्ष एवं विपक्ष अपने-अपने तरीके से देश की जनता के हितों के मुद्दे लाकर जन हितों के रक्षण का कार्य अपनी नैतिक जिम्मेदारी के तहत पूर्ण करते है। लेकिन भाजपा की रमन सरकार पूरी तरह महिला हित विरोधी और महिलाओं के प्रति दुराग्रही एवं कुंठित मानसिकता रखने वाली सरकार है। रमन सरकार के द्वारा महिला संसद का आयोजन में महिलाओं की आवाज मात्र ‘‘नक्कार खाने में तूती’’ बनकर रह गयी क्योंकि यह आयोजन महज भाजपा की महिला कार्यकर्ताओं के द्वारा किया गया कार्यक्रम बन कर रह गया। यह चुनावी दृष्टिकोण से किया गया है। उस पर भी दुर्भाग्यजनक बात यह है कि जिस मंत्री पर महिलाओं के विरूद्ध अपमानजनक कृत्य करने के मामले दर्ज है वे ऐसी महिला संसद में मंच पर मौजूद थे। इधर छत्तीसगढ़ में 27 हजार महिलायें लापता है, इस पर आज तक रमन सिंह मौन है और इन महिलाओं का आज तक कुछ पता नहीं।

छत्तीसगढ़ में लिंग अनुपात 1000 : 991 है लेकिन शिशिओं में यह 991 से घटकर 965 हो गया है। महिला भ्रूण हत्या की घटनायें बढ़ रही है, जिसके कारण यह लिंग अनुपात का अंतर बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ में महिलायें भ्रूणावस्था से लेकर किसी भी आयु तक पूर्णतः असुरक्षित है। बेटी बचाओं-बेटी पढ़ाओं मात्र जुमला बनकर रह गया है। बेटी बचाओं-बेटी पढ़ाओं के कर्ता-धर्ता सोशल मीडिया में अश्लीलता परोसते रहते है। ऐसे लोगों पर कोई कार्यवाही भाजपा सरकार ने कभी नहीं की। मीना खल्खों, झलियामारी, पेद्दागेलूर, सारकेगुड़ा की घटनायें भी भाजपा के महिला विरोधी चाल चरित्र और चेहरे का जीताजागता सबूत है। भाजपा की सरकार संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के मुद्दों पर चर्चा से भागती है। इन सबके बावजूद पार्टी की महिला नेताओं और महिला कार्यकर्ताओं की बैठक को महिला संसद का नाम मात्र देने से महिलायें सशक्त नहीं होगी। विपक्ष और पक्ष की महिलाओं को मंच पर जगह देकर केवल महिला वक्ता होती जो नीति निर्धारण में भूमिका पर वक्तव्य देवे और नेतागण दर्शक दीर्घा में बैठक कर सुने, तो ही महिला संसद का सही स्वरूप होता, केवल भाजपा के महिला कार्यकर्ता सम्मेलन को महिला संसद का नाम देने से महिला सांसद आयोजित करने का उद्देश्य कभी भी पूर्ण नहीं हो सकता।

 

 

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