छत्तीसगढ़ के बारहवें बजट ने शिक्षित युवाओं को किया निराशः बिस्सा

०० नौकरी नही तो बेरोजगारी भत्ते का रखना था बजटीय प्रावधान

रायपुर| छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता राजेश बिस्सा ने छ॰ग॰ सरकार द्वारा प्रस्तुत बारहवें बजट ने प्रदेश के युवाओं व बेरोजगारों को एक बार फिर निराश किया है। प्रदेश में बाईस लाख से अधिक पंजीकृत बेरोजगार हैं। चार लाख से अधिक शासकीय नौकरियां के पद रिक्त पड़े हैं। उन्हे भरने व बेरोजगारों को किसी भी प्रकार की राहत ना देना शिक्षित युवाओं के साथ धोखा है। शासन रोजगार देने में अक्षम है तो उसे शिक्षित युवाओं के लिये बेरोजगारी भत्ते का प्रावधान करना था। बढ़ता कर्ज, बढ़ती गरीबी से मुक्ति के प्रावधान प्रस्तावित बजट में कहीं भी नजर नहीं आते।

बिस्सा ने कहा की प्रस्तुत बजट निवेशकों को किसी भी तरह से प्रदेश में निवेश के लिये प्रोत्साहित नहीं कर सकेगा। पूर्व में बने औद्योगिक पार्कों में आज तक किसी ने ठोस निवेश नहीं किया ऐसे में नये औद्योगिक पार्कों को बनाये जाने की घोषना महज धोखा है। छ॰ग॰ के ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा की स्थिति भयावह व चिंताजनक है। राज्य के 40 प्रतिशत परिवारों ने स्कूलों का मुंह तक नहीं देखा है। 33 प्रतिशत परिवार प्राईमरी उससे भी कम तक ही पढ़े हैं। राज्य में महिलायें सबसे ज्यादा अशिक्षित हैं विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों की। प्रदेश में औद्योगिकरण के नाम पर सिर्फ हमारी संपदा का अनियोजित दोहन व पर्यावरण का नाश हुआ है। छः लाख एकड़ कृषि भूमी छिन गई। भूमीहीन परिवार दर दर की ठोकरें खा रहे हैं। हमारे यहां रोजगार की स्थिति का अवलोकन करें तो पब्लिक सेक्टर में 0.31 प्रतिशत व निजि सेक्टर 0.67 लोग ही रोजगार में हैं। ऐसे में बजटीय प्रावधानों में इस दिशा में ठोस प्रावधान ना रखना प्रदेश की बहुसंख्यक जनता के हितों के साथ कुठाराघात है। बिस्सा ने कहा कि छत्तीसगढ़ के अधिकांश हिस्से के पानी में फ्लोराईड व खतरनाक आर्सेनिक जैसे तत्व भारी पैमाने पर हैं। प्लोराईड व आर्सेनिक की अधिकाता के शिकार विशेष रुप से बस्तर, बिलासपुर, दांतेवाडा, जांजगीर – चाम्पा, जशपुर, कांकेर, कोरबा, कोरिया, महासमुंद, रायपुर, राजनंदगांव, सुरगुजा इत्यादि जिलों में निवासरत व्यक्ति जहरीला पानी पीने को बेबस हैं विशेषकर ग्रामवासी। बजट में इसके लिये भी व्यापक प्रावधान किये जाने थे लेकिन नहीं किये गये। शासन की इस दिशा में असंवेदनशीलता के कारण विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के रहवासियों को हड्डियों व अन्य प्रकार की घातक बिमारियों का शिकार बनते रहना होगा। बिस्सा ने कहा की प्रदेश के चार हजार से ज्यादा स्कूलों में मात्र एक एक ही शिक्षक पढ़ा रहे है। लगभग हजार स्कूलों में कोई पढ़ाने वाला ही नहीं है। रायपुर राजधानी का हाल देखें तो जिले के कई स्कूलों में या तो शिक्षक नहीं है या फिर एक मात्र शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। इस दिशा में बजटीय प्रवधान ना होना अविवेकपूर्ण बजट का परिचायक है। अच्छा शासन व स्वच्छ प्रशासन ही किसी प्रदेश की तस्वीर बदल सकते हैं। दूदरर्शिता पूर्ण बजट हमारे विकास की राह, गति व भविश्य की दिशा सुनिश्चित करते हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ में अक्षम व अदूरदर्शी शासन के कारण इन बिंदुओं का आभाव बजट में स्पष्ट झलकता है।

 

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