एक ऐसा स्कूल जहा पढ़ने के लिए बच्चो को करना पड़ता है शिक्षक-शिक्षिकाओं का घंटो इन्तजार

०० ग्राम पंचायत लिटिया के मोहन्दी ग्राम शासकीय प्रा.शाला में शिक्षक-शिक्षिकाओं का है मनमाना रवैया

०० स्कूल खुलने का टाइम 9:00 से 9:30 मगर शाला खुलती है 10:00 से 11:00 बजे

संजय बंजारे
करगीरोड कोटा| कोटा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत लिटिया के मोहन्दी ग्राम में शासकीय प्राथमिक शाला के पढ़ने वाले बच्चे शिक्षकों की इंतजार करते स्कूल में नजर आये उस स्कूल में छोटे-छोटे बच्चे पढ़ने आते हैं उसके बाद भी शिक्षक सही टाइम पर स्कूल को नहीं खोलते हैं क्योंकि साला खुलने का टाइम 9:00 से 9:30 तक होता है किंतु प्राथमिक शाला मोहन्दी में 10:00 से 11:00 बजे स्कूल खुलता है उस स्कूल में दर्ज संख्या 90 होने के बाद भी 5 शिक्षक शिक्षिकाएं पदस्थ है और सभी लोकल स्थानीय हैं उसके बाद भी बच्चों को सही टाइम में स्कूल को खोला नहीं जाता साथ ही बच्चों को नैतिक शिक्षा भी नहीं दी जा रही है| उन शिक्षकों का यही रवैया है कि कोई 10:00 से 12:00 के बीच आता है तो कोई 2:00 बजे आता है जब शिक्षक ही सही टाइम पर स्कूल नहीं आएंगे तो बच्चे को क्या पढ़ाएंगे कई शिक्षक ऐसे भी हैं जो स्कूल में महज एक दो घंटे रुककर अपने घर चले जाते है|

शिक्षक-शिक्षिकाओ के इस मनमाने रवैये को लेकर बच्चों ने बताया है कि शिक्षकों की रोज की तरह यही रवैया होता है स्कूल की शिक्षिका श्रीमती संध्या पात्रे  जो खुद ग्राम मोहंदी में ही निवास करती है उसके बाद भी स्कूल को सही समय पर नहीं खोला जाता है वहां पर पढ़ने वाले बच्चे शिक्षकों की इंतजार करते है और कई बच्चे तो स्कूल छोड़कर अपने घर भी चले जाते हैं क्योंकि सही समय पर स्कूल खुलता ही नहीं है इस कारण से बच्चे सुबह से आए हुए शिक्षकों के इंतजार में लगे रहते हैं ग्राम मोहंदी के प्राथमिक शाला में 90 दर्ज संख्या बच्चों की और शिक्षक 5 है सभी शिक्षक लगभग चार से पांच लोगों की दूरी पर ही उन लोगों की निवास स्थान है उसके बाद भी उन लोगों को स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों कि जरा सा भी ख्याल नहीं है कि हम लोग सही टाइम पर स्कूल जाकर बच्चों को अच्छे से पढ़ाई लिखा है अगर इन्हीं शिक्षकों की माने तो खुद उन शिक्षक लोग अपने बच्चों को शासकीय स्कूलों में नहीं पढ़ाते हैं सभी के बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं आखिर क्यों ? क्योंकि गांव के बच्चे व उनके माता-पिता के पास इतनी धनराशि नहीं होती है  की व प्राइवेट स्कूल में पढ़ा सके गरीब व किसान के बच्चे  शासकीय स्कूलों में  पढ़ते हैं इस कारण से अपने बच्चों को हाई प्रोफाइल स्कूल में नहीं पढ़ा सकते हैं शायद इसी का नाजायज फायदा ले रहे है शिक्षक शासकीय प्राथमिक शाला मोहंदी के 5 शिक्षक उठाते हैं सहायक शिक्षक सुनील कुमार अनंत, संतोष कुमार बंजारे, श्रीमती संध्या पात्रे, श्रीमती दीपिका गुप्ता, तीरथ राम लहरे जो कि प्राथमिक शाला मोहंदी का हेड मास्टर है उनका भी यही रवैया होता है जब मीडिया को यह जानकारी हुई तो मीडिया ने उस मास्टर से पूछा कि स्कूल कितना टाइम खुलता है तो उन्होंने बताया कि 9:00 से 10:00 बजे खुलता है| स्कूल यह अपना पल्ला झाड़ रहा था लेकिन वहां की स्थिति तो कुछ दूसरा ही था 10:00 बज गए थे लेकिन स्कूल खुला नहीं था हेड मास्टर तीरथ राम लहरे से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि सभी के सभी शिक्षक टाइम पर नहीं आते हैं इनकी शिकायत विकास खंडशिक्षा अधिकारी को भी किया जा चुका है लेकिन उनके द्वारा भी कोई एक्शन नहीं लिया गया प्राथमिक शाला मोहन्दी में 5 शिक्षक तो पदस्थ कर दिया गया है लेकिन उन शिक्षकों की बच्चों के प्रति किसी प्रकार की जागरूकता नजर नहीं आई एक छोटा सा स्कूल में यह हाल है तो बड़े-बड़े स्कूल में क्या हाल होगा
एक नजर डाले तो कोई भी सरकारी कर्मचारी शासकीय स्कूलों में अपने बच्चों को नहीं पढ़ाते हैं कारण यही है कि सरकारी स्कूलों में सही तरीके से पढ़ाई नहीं होती है आखिर छत्तीसगढ़ का सरकारी स्कूल का स्तर इतना नीचे क्यों हो रहा है जबकि शासन गरीब परिवार के बच्चों को पुस्तक काफी व ड्रेस भी उपलब्ध करा रही है और खाना भी स्कूलों में दिए जा रहे हैं उसके बाद भी शिक्षक लोग उन बच्चों के प्रति शिक्षा का ज्ञान नहीं दे रहे हैं शासकीय प्राथमिक शाला मोहन्दी के शिक्षक सिर्फ वह सिर्फ शासन से तनख्वाह ले रहे हैं स्कूल तो टाइम पास हो गया है उन शिक्षकों के लिए जो सही समय पर स्कूल नहीं आते हैं इस कारण से छत्तीसगढ़ की जितनी भी शासकीय स्कूल है ज्ञान के क्षेत्र में स्तर नीचे गिरते जा रहे हैं

विकासखंडशिक्षा अधिकारी कोटा बीईओ प्रतिभा मंडलोई बीईओ से सीधी बात उनके द्वारा शासकीय प्राथमिक साला मोहंदी का कई बार निरीक्षण किया जा चुका है उसके बाद भी वहां की स्थिति नहीं सुधरी है उनके द्वारा यह कहा गया है कि शिक्षकों को नोटिस देकर कार्यवाही की जाएगी जो सही टाइम पर स्कूल नहीं आते हैं उन शिक्षकों के प्रति और उनका वेतन भी रोका जाएगा|

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