2018 मे भिड़ेंगें दो मुख्यमंत्री एक ही विधानसभा सीट कवर्धा या राजनांदगांव – आखिर फायदा किसको और कहां

 

(रवि ग्वाल) कवर्धा – छत्तीसगढ़ में चौथी बार सत्ता में काबिज होने के लिए भारतीय जनता पार्टी मिशन 65 के लक्ष्य में कसरत करना शुरू कर दी है। जिससे मंत्री, विधायक, संसदीय सचिव व मुख्यमंत्री जीत का फार्मुला खोजना शुरू कर दिया है, एक तीर से पांच निशाने लगाने के उठापटक के बीच मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह के नांदगांव की सीट छोड कवर्धा से चुनाव लडने की चर्चाएं शुरू हो गई है। वही दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने एक बार फिर मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह को उनके खिलाफ चुनाव लडने की चुनौती दी है। इन सबके बीच कवर्धा से मुख्यमंत्री के चुनाव लडने की चर्चाएं अब कार्यकर्ताओ में भी होने लगी है जिससे जनता काफी उत्साहित है।
प्रदेश में कवर्धा विधानसभा का परिणाम हमेशा से सुर्खियो में रहा है। मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह के गृह जिला होने के साथ ही सबसे बडे विधानसभा होने के कारण ही यह काफी सुर्खियो में रहता है। छत्तीसगढ राज्य बनने के बाद लगातार तीन चुनाव में प्रदेश को भगवामय करने के बाद अब चौथी बार सत्ता में काबिज होने के लिए भाजपा ने मिशन 65 का फार्मुला प्रदेश में लागू किया है। जिससे विधायक एवं मंत्रीयो की नींद उड गई है, खराब और कमजोर प्रदशर्नी करने वाले विधायक और मंत्रीयो की चर्चाएं अब आम हो गई है। वही मिशन 65 का लक्ष्य सबके लिए गंभीर चुनौती है ऐसे में राजनीतिक हल्को में चल रही चर्चाओ का आधार मजबुत होता नजर आ रहा है। जिसके तहत् मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह राजनांदगांव की सीट छोडकर कवर्धा से चुनाव लड सकते है जिसका सीधा लाभ कवर्धा को तो मिलेगा ही साथ ही पण्डरिया, लोरमी, नवागढ तथा साजा में भाजपा प्रत्याशी को मिलेगा, क्योकिं इन सभी विधानसभा की ग्रामीण सीमाएं एक साथ जुडी हुई है और दूसरा पक्ष यह है कि विकास की किरणें एक दूसरे को प्रकाशमय करती है। ऐसे में मुख्यमंत्री के एक तीर से पांच सीटों पे जीत का निशाना बनता है। वैसे भी प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह की छवि साफ सूथरी और गंभीर राजनेता के रूप में है।
जिले के पण्डरिया व कवर्धा विधानसभा के निर्वाचित विधायकों के परफॉर्मेंस रिपोर्ट में कवर्धा को जनता कमजोर आंकलन करती है। ऐसे में मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह का चुनाव लडना जनता को खुश करने और पार्टी के मिशन 65 को सफल बनाने के दृष्टिकोण से यह अहम राजनीतिक कदम हो सकता है।

तो जनता इतिहास रचेगी

भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष रामकुमार भट्ट ने मुख्यमंत्री के कवर्धा से चुनाव लडने के संभावनाओ पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री तो छत्तीसगढ में कही से भी चुनाव लड सकते है इसमें कोई संदेह नही है। लेकिन कवर्धा से चुनाव लडेंगें तो भाजपा के लिए वॉक आउट की स्थिति है। वही कवर्धा विधानसभा की जनता पूरे प्रदेश में सर्वाधिक मतो से मुख्यमंत्री को विजय बनाकर एक नया इतिहास रचेगी।

फिर जोगी की रमन को चुनौती

प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह को एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने उनके खिलाफ विधानसभा चुनाव लडने की चुनौती दी है। ऐसा लगता है की इस बार का यह राजनीतिक चुनौती जोगी जी को राजनीतिक सीगुफा से हटकर रण तक ला सकता है। क्योकि इससे पहले जब वे चुनौती दिये थे तो वे कांग्रेस पार्टी में थे, और आलाकमान की अनुमति नही मिलने का हवाला देकर बच निकले थे इस बार परिस्थितियां अलग है। उनकी स्वयं की अपनी पार्टी जनता कांग्रेस जोगी है और मुख्यमंत्री के खिलाफ चुनाव लडने की इच्छा भी स्वयं की है। ऐसे में इस रोचक मुकाबले में कोई राजनीतिक मजबुरीयां सामने नही आयेंगी।

डॉ.रमन का गांव से शहर तक घर घर है रिश्ता

कवर्धा विधानसभा क्षेत्र के फायदे और नुकसान दोनो ही राजनीतिक दल के समीक्षा का विषय बना हुआ है। प्रदेश में सबसे बडे विधानसभा क्षेत्रफल कवर्धा होने के कारण प्रचार अभियान में काफी लंबा समय खर्च होने का मामला है तो फायदे ये है कि पार्षद से लेकर सांसद और मुख्यमंत्री के रूप में चौदह बरस के कार्यकाल में शहर से लेकर गांव तक लगभग हर घरो में डॉ.रमन सिंह सरकार की योजना के नाम से घूस गए है जिसके चलते उनके रिष्तें अलग ही पहचाने जाते है।

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