‘वनौषधि-2018 छत्तीसगढ़’ पर राष्ट्रीय परिचर्चा, मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह करेंगे शुभारंभ

०० लगभग 400 पारम्परिक वैद्य, किसान और व्यापारी होंगे शामिल
०० किसानों और कम्पनियों के बीच होगा वनौषधि उपज खरीदी के लिए अनुबंध

रायपुर| छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कल 3 फरवरी से दो दिवसीय ‘वनौषधि 2018 छत्तीसगढ़’ विषय पर राष्ट्रीय परिचर्चा आयोजित की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह सवेरे 10.30 बजे साईंस कॉलेज परिसर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में परिचर्चा का शुभारंभ करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता केन्द्रीय इस्पात राज्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय करेंगे। परिचर्चा में औषधीय पौधों की खेती के जानकार वैज्ञानिक, शोधकर्ता, और औद्योगिक घरानों के साथ ही राज्य के विभिन्न जिलों से आए 200 पारम्परिक वैद्य, एक सौ औषधीय खेती करने वाले किसान और 50 व्यापारी भी परिचर्चा में हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम में किसानों के साथ कंपनियों का औषधीय पौधों की उपजों की खरीदी एवं विक्रय हेतु अनुबंध भी होंगे।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य औषधीय पादप बोर्ड द्वारा प्रदेश मंे औषधीय पौधों के संरक्षण, संवर्धन और विनाश विहीन विदेाहन के लिए निरंतर् कार्य किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य वन बहुल प्रदेश होने के साथ-साथ प्राकृतिक रूप से उच्च स्तरीय गुणवत्ता वाले औषधीय पौधों से भरा हुआ है। वन क्षेत्र में रहने वाले लोगों का इसके दोहन से आर्थिक मदद भी प्राप्त होती रही है। इस गतिविधि में सुधार, विकास एवं वन एवं ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लिए इसे रोजगारपरक एवं आमदनी के प्रमुख स्रोत के रूप में विकसित करने की दिशा पर कार्य करते हुए एक राष्ट्रीय परिचर्चा ‘‘वनौषधि-2018 छत्तीसगढ़’’ का आयोजन किया जा रहा है। पुरातन काल से इलाज में काम आ रही औषधीय पौधों एवं जड़ी-बूटियों के पारंपरिक ज्ञान का पुर्नजीवन एवं आधुनिकीकरण कर विकास की संभावनाएं इस परिचर्चा में तलाशी जाएंगी। इस परिचर्चा का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान का अभिलेखीकरण, औषधीय पौधों का आधुनिक, वैज्ञानिक एवं व्यवसायिक तरीके से संरक्षण, संवर्धन, कृषिकरण, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, बाजार आदि विषय पर आवश्यक चर्चा कर एक सार्थक एवं प्रभावशील हर्बल नीति बनाते हुए इसका कुशल क्रियान्वयन पर केन्द्रित होगा। परिचर्चा के माध्यम से देश के ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक, शोधकर्ता, पर्यावरण प्रेमी, प्रतिष्ठित औद्योगिक घरानों, नीति-निर्माता, शासकीय एवं अशासकीय संस्थाओं के साथ हर्बल उत्पाद कंपनी तथा कुटीर उद्योग से जुडे़ लोगों के साथ-साथ स्थानीय व्यापारियोें एवं पारंपरिक वैद्यों को एक मंच ‘‘वनौषधि-2018 छत्तीसगढ़’’ पर एकत्र कर विचार-विमर्श उपरांत भविष्य की रणनीति बनाने एवं लागू करने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम में केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, नई दिल्ली, बायोटेक्नोलॉजी विभाग नई दिल्ली, आई.जी.आई.बी. नई दिल्ली, राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड नई दिल्ली एवं औषधीय पौधों में अनुसंधान करने वाले संस्थानों के वैज्ञानिक-प्रतिनिधि सम्मिलित होगें। जिनमें प्रमुख सी.एस.आई.आर. नई दिल्ली, सी.डी.आर.आई. लखनऊ, राज्य औषधीय पादप बोर्ड राजस्थान, काशी हिन्दु विश्वविद्यालय बनारस, ए.आई.आई.एम.एस. नई दिल्ली, आई.आई.एम. कलकत्ता, वन अनुसंधान देहरादून, बिट्स, पिलानी राजस्थान शामिल हैं। औषधीय पौधों एवं पारंपरिक उपचार पद्धति कों प्रमाणीकरण करने वाले संस्थाओं जैसे क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया, नई दिल्ली, टी.क्यू.सर्ट हैदराबाद से भी विशेषज्ञ एवं प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे, जिसका फायदा राज्य के वैद्यों, वनौषधि संग्राहकों एवं किसानों को भी होगा, जिससे कि वे अपने उत्पाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी बेचने में सक्षम हो सकेंगे।कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से लगभग 200 पारंपरिक वैद्य, औषधीय पौधों की खेती करने वाले लगभग 100 किसान एवं औषधीय पौधों से जुड़े लगभग 50 व्यापारी सम्मिलित होंगे । साथ ही देश भर की ख्याति प्राप्त फार्माक्यूटिकल, दवा बनाने वाली, हर्बल उत्पाद निर्माण करने वाली कंपनियों के प्रतिनिधि सम्मिलित होंगे, जिनमें प्रमुख पतंजलि, हिमालया, डाबर, हिन्दुस्तान यूनिलिवर, इमामी, पिरामिल, लिव्यूपिन, फ्लेमिंगों, पनैसिया बायोटेक, आर्गेनिक वेलनेस, बैद्यनाथ, झण्डू, सन फार्मा, आई.टी.सी., सांई हेल्थ केयर, अर्जुना, टोरेन्ट फार्मा, केरला आयुर्वेदाएवं अन्य कार्यक्रम में सभी कंपनियों के प्रतिनिधि औषधीय पौधों की खेती करने वाले किसानों, संग्रहणकर्ताओं एवं वैद्यों से रूबरू होंगे । कार्यक्रम में किसानों के साथ कंपनियों का औषधीय पौधों की उपजों की खरीदी एवं विक्रय हेतु अनुबंध भी होंगे, जो कि छत्तीसगढ़ राज्य के हर्बल आर्थिक क्रांति के लिए मील का पत्थर साबित होंगे । वन मंत्री श्री महेश गागड़ा, औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री रामप्रताप सिंह, उपाध्यक्ष डॉ. जे.पी.शर्मा उपाध्यक्ष, बोर्ड के सीईओ एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री शिरीष चन्द्र अग्रवाल, उद्योगों, वैद्यों, किसानों, व्यापारियों, संग्राहको के बीच समन्वय स्थापित कर सेतू का कार्य करेंगे, जिसका उद्देश्य यह है कि हर्बल क्षेत्र में कार्य करने वाले सभी लोगों की आमदनी को दुगुना किया जा सके तथा यह भी प्रयास किये जायेंगे कि देश भर से आए हुए उद्योगों के प्रतिनिधियों को राज्य में हर्बल उद्योगों को स्थापित करने, अनुसंधान एवं विकास योजनाओ हेतु अनुबंध कराकर कार्य को धरातल पर क्रियान्वित किया जा सकेगा।

 

 

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