कोटा लोक निर्माण विभाग का कारनामा,इंजीनियर से लेकर  एसडीओ तक कर रहे है मुआवजा पीड़ितो को गुमराह

०० कोटा बेलगहना मार्ग के निर्माण कार्य शुरू करने से पहले किसानों आदिवासीयो के जमीनों का मुआवजा देना नही समझा जरूरी

०० एक साल से मुआवजे के लिए चक्कर काट रहे हैं राजस्व विभाग

संजय बंजारे

करगी रोड कोटा| कोटा बेलगहना मार्ग में पी डब्ल्यू विभाग द्वारा सड़क निर्माण कराया जा रहा है कोटा नाका चौक से बेलगहना रोड पर 1 किमी से 5 किमी तक उन्नयन व चौड़ीकरण का मेसर्स लैंडमार्क बिलासपुर ठेकेदार द्वारा कार्य किया जा रहा हैं जिसका अनुबंध क्रमांक 30 डी.एल.वर्ष 2016/17 निविदा की राशि 741.73 लाख दर 33% एस. ओ. आर. से कम अनुबंध की अवधि लगभग 15 माह अनुबंध की लागत निविदा दर सहित 496.96 लाख जिसकी देखरेख विभाग के इंजीनियरो द्वारा की जा रही है।
निर्माण कार्य प्रगति पर है पर अब तक जो किसान लोग व अन्य जो आदिवासी लोग हैं जिन्हें शासन द्वारा या विभाग के अधिकारियों द्वारा ना अब तक उन लोगों को बुलाकर उनसे कोई संवाद किया गया न ही मुआवज़े की बात की गई,पीड़ित लोगो द्वारा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कोटा को आवेदन दिया गया उसके बाद ही विभाग द्वारा आनन फानन में संज्ञान लेकर नक्शा खसरा बी वन के लिए तहसील कोटा में आवेदन लगाया गया पिछले पी डब्ल्यू डी विभाग के अधिकारी व इंजिनियर द्वारा कभी राजस्व विभाग की इस मामले में उदासीनता को दरसाया जाता है तो इस बात की पूरी जानकारी नही होने की बात कहकर मामले को लटकाया जाता हैं वही पर राजस्व विभाग के तहसीलदार पटवारी कोटवार का कहना है कि इस बारे में विभाग द्वारा हमारे पास इस मामले की कोई जानकारी नही है।

मीडिया के द्वारा संज्ञान दिलाय जाने पर कोटा तहसीलदार श्रीमती हेमलता डहरिया का कहना था कि अभी 2 माह ही हुये है,विभाग के द्वारा आवेदन दिए उस रोड के निर्माण कार्य में आ रहे है जमीनों के नक्शा- खसरा-बी-वन के विषय में। कुल मिलाकर इस मामले में पी डब्ल्यू डी विभाग के अधिकारी इंजीनयरो कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध नजर आती है निर्माण कार्य शुरू होने के बाद भी जिन लोगों की जमीन उस रोड के निर्माण कार्य मे आ रही है  उन लोगो को मुआवज़े देने में इतना लेट लतीफी क्यो की जा रही हैं जबकि रोड का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। जब विभाग को पता था इस रोड में निर्माण कार्य होना है तो विभाग के अधिकारियों को पता होना था कि निर्माण कार्य कराने या टेंडर बुलाने से पहले ये  तस्दीक कर ली जाती की इस रोड की जद में आने वाले किसान आदिवासी व्यवसायी की जमीनों के नक्शे खसरे राजस्व विभाग से निकलवा लेती, तो अभी उनको ये परेशानी या मुश्किलें नही आती। आज मामला मीडिया में आने के बाद प्रभावित किसान आदिवासी व्यवसायी के जमीनों के नक्शे खसरे के लिये विभाग द्वारा आवेदन किया गया इससे इस बात का पता चलता है,की विभाग वा विभाग के अधिकारियों द्वारा ऐसा किसके इशारे पर किया जा रहा था ऐसा करने से किसको लाभ मिलने वाला था क्या इस मामले को जानबूझकर लटकाया जा रहा था,क्या इस मामले मे शासन या विभाग के बड़े लोगो की भी कोई भूमिका है। मामला 1साल पहले का है,क्या प्रभावित लोगों की जमीनों को हड़पने की साज़िश थी कि रोड निर्माण पहले करवा दी जाये उसके बाद आगे आने वाले विभागीय अधिकारी समझेंगे हमने तो शासन का काम बिना मुआवज़े के ही निपटा दिया शासन व शासन के मातहत भी खुश और सरदार खुश होगा तो शाबासी देगा प्रमोशन भी देगा प्रभावित किसानों आदिवासीयो का क्या वो तो आजादी से पहले भी प्रभावित थे इसमें नई बात क्या है।

इसके बारे में मुझे कोई जानकारी नही है,पुराने जो इंजीनयर है उनसे आपको पूछ के जानकारी देता हूँ

एसडीओ रॉय, पीडब्ल्यूडी कोटा

दो माह पहले ही नक्शा खसरा के लिये आवेदन किया गया हैं विभाग द्वारा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व द्वारा मुआवज़े मामले में विभाग को त्वरित कार्यवाही करने को पत्र प्रेषित किया गया।

हेमलता डहरिया, तहसीलदार, कोटा

 

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