छत्तीसगढ़ में विकास करिया हो गया है: भूपेश बघेल

०० प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल की पत्रकारों से चर्चा 

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा कि मुख्यमंत्री रमन सिंह के आस्ट्रेलिया महाद्वीप के दौरे से आज लौटेंगे और आस्ट्रेलिया महाद्वीप का दौरा करने के बाद मुख्यमंत्री का विश्वभ्रमण पूरा हो चुका है, अब आस्ट्रेलिया महाद्वीप का दौरा हो चुका है। पहले अमेरिका महाद्वीप, यूरोप महाद्वीप, एशिया महाद्वीप दौरा कर चुके है। कोई इंवेस्टर आया ही नहीं।अभी आस्ट्रेलिया गये है उम्मीद करता हूं कि यहां के लाखों बेरोजगारों है कुछ लोगों को रोजगार मिलेगा। मुख्यमंत्री ने मुख्य रूप माईनिंग और स्टील पर कांस्ट्रेट किया है। अभी तक समाचार माध्यमों से जो बाते आयी है, यही है कि माईनिंग और स्टील पर ही ज्यादा चर्चा की है। एमओयु कितना हुआ है कि नहीं हुआ, मुख्यमंत्री जी के आने के बाद ही पता चलेगा। लेकिन आपकी जानकारी में दें दूं कि स्टील, माईनिंग, सीमेंट और पावर उद्योगों को इन हतोत्साहित करने का सरकार ने लिया है। सबसे बड़ी बात तो स्टील और माईनिंग तो सीधे-सीधे आदिवासी क्षेत्रों में ही करेंगे। जो पिछले दिनों विधानसभा में भू-राजस्व संहिता संशोधन बिल लाया था ये इसीलिये लाया गया था। स्टील और माईनिंग में करेंगे तो कम से कम 1000 एकड़ जमीन तो लगती ही है। विधानसभा में संशोधन पारित किया, उसे राज्यपाल के पास भेजा जाता है राज्यपाल से अनुमति मिलने के बाद कानून रूप लेता है। लेकिन मंत्रीमंडल ने बैठक लेकर वापस लेने का निर्णय लिया है। यह प्रक्रिया का सीधा-सीधा उल्लंघन है। मंत्रिमंडल में बैठक करके प्रस्तुत कर सकते है, आपने तो मंत्रिमंडल में प्रस्तुत करके वापस ले लिया। वापस तो राज्यपाल ही करेंगे। यदि राज्यपाल वापस करेंगे तो विधानसभा में प्रस्तुत करना ही होगा। लेकिन यहां तो प्रक्रिया उल्टी अपनायी है। भाजपा के नेता रामविचार नेताम ने कहा कि इसे लागू करेंगे ही। ये जो भू-राजस्व संहिता में संशोधन लाया गया और मुख्यमंत्री जी का आस्टेलिया दौरा हुआ दोनों आपस में जुड़े है। भोले भाले आदिवासियो की जमीन लूटने के लिये यह काम किया है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने चर्चा में बताया कि 5 दिन रायगढ़ जिले में पदयात्रा की। यह पदयात्रा जिसमें घरघोड़ा, लैलूंगा, रायगढ़ और खरसिया विधानसभा क्षेत्रों से गुजरी, 3 दिन की यात्रा में सरकार ने जमीन ली वो लोग इस पदयात्रा में मिले। सरकार ने जो जमीन ली उससे प्रभावित लोग है, पीड़ित लोग है उनसे मिलने और जमीनी हालात की जानकारी लेने के लिये यह यात्रा की गयी। रमन सिंह सरकार ने जो जमीन अधिग्रहित की, आधे किसानों को जमीन की किमत का दुगुना मुआवजा और आधे किसानों को चार गुना मुआवजा दिया गया। उनके खेतों में पेड़ पौधे लगे है उनके कोई गिनती नहीं की गई। चाहे केलो बांध के लिये हो, चाहे रेल लाईन के लिये हो, चाहे निजी उद्योग है, उनकी बात करें तो आज भयावह स्थिति है। किसानों की जमीन ले ली गई लेकिन उन्हें मुआवजा भी नहीं मिला, औने-पौने दाम में खरीद लिया गया, डरा, धमका कर, बहला-फुसलाकर 1 एकड़ का सौदा किया और 4 एकड़ और 10 एकड़ की रजिस्ट्री करा ली। ऐसे भी किसानों ने कहा कि हमने अंगूठा भी नहीं लगाये है, जमीन भी चली गयी, मुआवजा भी नहीं मिला। उससे बड़ी स्थिति यह है कि किसी गांव से 1000 एकड़ जमीन निकल गयी किसी उद्योग के लिये, किसानों को कुछ पैसा मिल भी गया लेकिन जो भूमिहीन किसान है, कृषि पर आधारित मजदूर है जिनका जीवन खेतिहर मजदूर के रूप में व्यतीत होता है और जंगल का क्षेत्र है खेत भी है, वहां चार-चिरौंजी और साल के वृक्ष लगे हैं, उनके बीज इकट्ठा करके अतिरिक्त आमदनी या तेंदूपत्ता तोड़कर अतिरिक्त आमदनी प्राप्त करते थे, ऐसे मजदूरों के सामने भयंकर स्थिति बनी हुई है। क्योंकि किसानों की जमीन को उद्योगों ने हासिल कर लिया। किसी को मुआवजा मिला, किसी को नहीं मिला लेकिन गांव  तो वहीं के वहीं है, लोग वहीं के वही है। खेतिहर मजदूर के पास कोई जमीन नहीं थी, उसी जमीन पर आश्रित थे, खेती नहीं होने के कारण मजदूरी नहीं मिल रही है। न प्लांट में मिल रहा और खेती तो रही नहीं और जो चार-चिरौंजी, महुआ पर आश्रिम थ, वनोपज संग्रहण का काम करते थे, उनकी स्थिति खराब है। कोयला खदान और प्लांटों से ग्रामीण इलाकों में स्थिति बद से बदतर हो गयी है।

रायगढ़ में सड़के काली हो गयी है, पत्ते काले हो चुके है। तालाब का पानी काला हो चुका है।  उद्योगों की पानी की जरूरत के लिये 1000-1000 फीट के बोर खनन कर चुके है, गांव वालो को खेती के लिए, पीने के लिये पानी नहीं मिल रहा है। पेयजल की समस्या भीषण है। रायगढ़ में विकास ‘करिया’ गया है के प्रश्न के जवाब में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा कि रायगढ़ जिले में उद्योग के नाम पर आदिवासियों को लूट लिया गया और सैकड़ों आदिवसियों को आज तक जमीन का मुआवजा नहीं मिला। उन्होंने कहा कि रायगढ़ में रहने वाले लोगों का जीवन काला हो गया है, जिले में विकास ‘करिया’ गया है। उन्होंने कहा कि केलो में डेम निर्माण, रेल कॉरिडोर के लिए, पॉवर प्लांट के लिए किसानों की जमीनें अधिग्रहित की गईं, कोयला खदान के नाम पर भी जंगल और गांवों को उजाड़ा गया।

 

error: Content is protected !!