संवैधानिक मूल्यों की हत्या कर रहे हैं राज्यपाल : कांग्रेस

०० संसदीय सचिव मामले की भारत निर्वाचन आयोग से की गई है शिकायत : अकबर

०० राज्यपाल ठीक से काम नहीं करेंगे तो राष्ट्रपति से होगी शिकायत : किरणमयी

रायपुर|लाभ पद के मामले में दिल्ली में आम आदमी पार्टी के विधायकों की सदस्यता खत्म होने के बाद छत्तीसगढ़ में राजनीति तेज हो गई है। कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के संसदीय सचिव के मुद्दे को लेकर राज्यपाल बीएल दास टंडन पर संवैधानिक व्यवस्था की अनदेखी का आरोप लगाया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोहम्मद अकबर ने सोमवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि राज्यपाल बीएल दास टंडन पर संवैधानिक व्यवस्था की अनदेखी कर रहे हैं। उन्होंने कहा,याचिकाओं को निर्वाचन आयोग भेजना था जो राज्यपाल ने नहीं भेजा।

मीडिया से बातचीत में कांग्रेसी नेता रमेश वर्लयानी ने कहा कि राज्यपाल संवैधानिक मुखिया हैं वे ऐसी याचिका रोक कर रखेंगे तो जनता में यह संदेश जाएगा कि राज्यपाल संवैधानिक मूल्यों की हत्या कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने कानूनी अधिकार नहीं होते हुए भी गैर कानूनी तरीके से अपने पद का दुरुपयोग करके संसदीय सचिव की नियुक्ति की, उन्हें शपथ दिलाई और कार्य आवंटित किया। मोहम्मद अकबर ने बताया कि इस संबंध में भारत निर्वाचन आयोग से शिकायत की गई है यदि आयोग उसी फॉर्मूले को छत्तीसगढ़ विधानसभा में लागू करता है तो भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार अल्पमत में आ जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी संसदीय सचिव मंत्री के समान वेतन भत्ता और लाभ प्राप्त कर रहे हैं जिसकी इजाजत संविधान नहीं देता है। उन्होंने बताया कि संसदीय सचिवों को विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित करने की मांग यदि हाईकोर्ट मान लेता है तो छत्तीसगढ़ की रमन सरकार के पास बहुमत नहीं रहेगा। दरअसल प्रदेश की 90 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 49 विधायक हैं। अगर संसदीय सचिव बनाए गए 11 नेताओं की सदस्यता जाती है तो सदन में भाजपा के केवल 38 विधायक बचेंगे। यह संख्या विपक्षी कांग्रेस की सदस्य संख्या 39 से एक कम होगी। गौरतलब है कि इस मामले को लेकर मोहम्मद अकबर की ओर से भी याचिका याचिका लगाई गई, जिसमें 11 संसदीय सचिवों की नियुक्ति की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए इसे रद्द किए जाने की मांग की गई है। छत्तीसगढ़ में रमन सरकार में संसदीय सचिवों की नियुक्ति कर परंपरा 2004 से चल रही है, लेकिन यह पहली बार हुआ है कि संसदीय सचिवों की नियुक्ति को अवैध बताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। चुनाव आयोग के निर्णय के बाद जिन संसदीय सचिवों पर तलवार लटक रही है, उनमें प्रदेश के 11 संसदीय सचिव शामिल हैं। इनमें अंबेश जांगड़े, लालचंद बाफना, लखन देवांगन, मोतीराम चंद्रवंशी, रूपकुमारी चौधरी, शिवशंकर पैकरा, सुनीति सत्यानंद राठिया, तोखन साहू, राजू सिंह क्षत्री, चंपादेवी पावले और गोवर्धन मांझी शामिल हैं।

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