छत्तीसगढ़ी साहित्यकारों का महाकुंभ, भाषा और साहित्य की दशा-दिशा पर गंभीर विचार मंथन

रायपुर| छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के तीन दिवसीय प्रांतीय सम्मेलन के आज दूसरे दिन भी राज्य के विभिन्न जिलों से आए साहित्यकारों ने छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य की दशा और दिशा पर गंभीर विचार-मंथन किया। प्रदेश के इस साहित्यिक महाकुंभ में साढ़े पांच सौ से ज्यादा लेखक और कवि हिस्सा ले रहे हैं।

जिला मुख्यालय बेमेतरा में हो रहे सम्मेलन के दूसरे दिन के प्रथम सत्र में आज डॉ. सत्यभामा आडिल की अध्यक्षता में ’छत्तीसगढ़ी साहित्य म महिला साहित्यकार मन के भूमिका’ विषय पर और डॉ. विनय कुमार पाठक की अध्यक्षता में ’लोक व्यवहार अउ प्रशासकीय काम-काज म राजभाषा छत्तीसगढ़ी’ विषय पर परिचर्चा हुई। शाम के सत्र में प्रदेश के वरिष्ठ कवि और लेखक स्वर्गीय डॉ. विमल कुमार पाठक के व्यक्तित्व और कृतित्व पर सर्वश्री नंदकिशोर तिवारी, राघवेन्द्र दुबे, निखिल पाठक, डॉ. विनय पाठक और डॉ. सुरेन्द्र दुबे ने अपने विचार व्यक्त किए। सम्मेलन के समापन दिवस पर कल 21 जनवरी को सवेरे 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक ’छत्तीसगढ़ी म अनुवाद परंपरा, प्रयोग अउ महत्व’ विषय पर डॉ. परदेशी राम वर्मा की अध्यक्षता में परिचर्चा होगी। दोपहर 12 बजे से दो बजे तक डॉ. जे.आर. सोनी की अध्यक्षता में खुला अधिवेशन आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन में मां भद्रकाली बेमेतरा धाम सहित वरिष्ठ साहित्यकार स्वर्गीय डॉ. विमल कुमार पाठक, स्वर्गीय श्री गर्जन सिंह दुबे, स्वर्गीय डॉ. शत्रुघन प्रसाद पाण्डेय और स्वर्गीय श्री लव सिंह दीक्षित के नाम पर स्वागत द्वार बनाए गए हैं।

 

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