आगामी वर्ष 2018 का चुनाव होगा त्रिकोणीय

०० 2018 का छत्तीसगढ़ का राजनीतिक विशलेषण

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय,राजनीतिक विश्लेषक

रायपुर| भारत के मध्य में स्थित छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना 1 नवम्बर सन् 2000 में हुई थी। जैसे मनुष्य के जीवन में 18वां साल बहुत ही निर्णायक भूमिका निभाता है मतलब वह वयस्क हो जाता है उसी तर्ज पर आने वाला वर्ष, छत्तीसगढ़ राज्य के लिए भी बहुत ही निर्णायक साबित होने वाला है क्योंकि छत्तीसगढ़ राज्य, अपनी स्थापना के 18वें वर्ष में प्रवेश करने वाला है। वर्ष 2018 में छत्तीसगढ़ राज्य 18 वर्ष का हो जाएगा और 2018 में ही छत्तीसगढ़ राज्य में विधानसभा चुनाव भी हैं, मतलब निर्णायक वर्ष। यूँ तो छत्तीसगढ़ राज्य में वर्ष 2017 और उसके पूर्व 2016 में बहुत से राजनीतिक फेर बदल हुए, परंतु आने वाले चुनावी वर्ष में बहुत से निर्णायक फैसले राजनीतिक रूप से होने वाले हैं। वैसे तो पिछले विधानसभा चुनाव तक छत्तीसगढ़ राज्य में प्रमुख रूप से दो ही राजनीतिक दल थे, कांग्रेस और भाजपा परंतु सन् 2016 में, छत्तीसगढ़ राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत प्रमोद जोगी के कांग्रेस छोड़ कर नई पार्टी (जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे) के पश्चात अब आगामी वर्ष 2018 का चुनाव त्रिकोणीय होगा। तीनों राजनीतिक दल, भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस पार्टी और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़(जे) ने 2017 से ही चुनाव की तैयारी शुरू कर दिया है।

मीडिया में भी तीनों ही पार्टी पूरी तरह से सक्रिय हैं। तीनों ही राजनीतिक दलों के प्रवक्ता बखूबी अपनी अपनी पार्टी का पक्ष मीडिया के सामने रखते हैं। इस क्रम में छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने नई सर्जरी भी की है जिसमें जातिगत समीकरण को ध्यान में रखते हुए नियुक्ति की गई है। कांग्रेस के मीडिया विभाग में भी शैलेश नितिन त्रिवेदी की और भी कई वरिष्ठ नेताओं के साथ वापसी हुई है। उप नेताप्रतिपक्ष रेणु जोगी की भी उनके पद से छुट्टी कर दी गई है। दो कार्यकारी अध्यक्ष भी नियुक्त किए गए हैं। कांग्रेस की नई टीम में सभी नेताओं को खुश करने का प्रयास किया गया है जो कि बेहद जरूरी और मुश्किल भी है। वहीं जनता काँग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) भी विधानसभा चुनाव के एक वर्ष पूर्व ही प्रत्याशियों की दो सूची जारी कर अपने तेवर साफ कर दिए हैं। उधर भाजपा भी आगामी चुनाव के मद्देनजर अपने संगठन को मजबूत करने के लिए प्रदेश व्यापी दौरे कर रही है जिसकी कमान सौदान सिंह ने संभाली हुई है। तीनों दलों के प्रवक्ताओं की बात करें तो, भाजपा की ओर से मुख्य रूप से संजय श्रीवास्तव, केदारनाथ गुप्ता, सुनील सोनी और गौरीशंकर श्रीवास ने कमान संभाल रखी है। कांग्रेस की ओर से मुख्य रूप से विकास तिवारी, घनश्याम राजू तिवारी, राजेन्द्र तिवारी और ज्ञानेश शर्मा ने मोर्चा खोल रखा है। अगर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) की बात करें तो लगता है कि यहाँ प्रवक्ताओं की बहुत कमी है क्योंकि पूरा मीडिया विभाग इकबाल अहमद रिजवी और नितिन भंसाली द्वारा ही मुख्य रूप से संभाला जा रहा है कभी कभार भगवानू नायक और सुब्रत डे का नाम आता है। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार JCCJ का शहरी क्षेत्रों में दखल बहुत कम है परन्तु ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छा माहौल है। कांग्रेस भी पदयात्रा के जरिए लोगों से संवाद स्थापित करने की कोशिश कर रही है और इस चुनाव में परिवर्तन ला सकती है। वहीं भाजपा का सर्वे चौंकानेवाला है क्योंकि एक सर्वे में 80% मंत्री और विधायक हार रहे हैं जिसको लेकर भाजपा बहुत गंभीर है। कुछ दिनों सूबे के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने एक बयान में जोगी कांग्रेस को प्रदेश की तीसरी राजनीतिक शक्ति के रूप में संबोधित किया था जिसके बाद राजनीति गर्मा गई है। छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत प्रमोद जोगी के लिए भी यह चुनाव निर्णायक रहने वाला है। इधर भाजपा का 15 साल का कार्यकाल और अन्दरूनी कलह उसकी हार का कारण बन सकती है, हालाँकि राजनीतिक चाणक्य कहे जाने वाले भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित भाई शाह की मानें तो छत्तीसगढ़ में भाजपा चौथी बार सरकार बनाने जा रही है। अब यह तो छत्तीसगढ़ की जनता ही निर्णय लेगी कि सरकार किसकी बनेगी!

 

 

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