प्रदेश के मुखिया की नजर में दोयम दर्जे का हुआ बिलासपुर

बिलासपुर। जोन एवं जिला दोनो के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के तबादले हुए और बिलासपुर को आईजी के रूप में दीपांशु काबरा तथा एसपी के रूप में आरिफ शेख मिले। पूर्व एसपी मयंक श्रीवास्तव को कोरबा जिला भेजा गया। प्रदेश के मुखिया की नजर में बिलासपुर क्षेत्र के राजनैतिक हैसियत लगातार गिरते क्रम में बन रही है। नए एसपी 2005 बेच के है, और उन्हें बिलासपुर जैसा संवेदनशील जिला मिला है। जबकि जिले को इससे अधिक अनुभवी अधिकारी की जरूरत है। सुत्र बताते है कि आरिफ शेख को बिलासपुर जिला मिलने का एक मात्र कारण उनकी धर्मपत्नी इस वक्त रायगढ़ जिले की कलेक्टर होना है। क्या बिलासपुर जिले की छवि बनना बिगड़ना इन्ही कारणों पर निर्भर करेगा ??

जिले की कानून व्यवस्था लगातार बिगड़ रही है। राजनैतिक संवेदनशीलता में भी पूर्व की अपेक्षा उलझाव ज्यादा है। किन्तु हाल ही में पुलिस विभाग में बहुत से टीआई डीएसपी प्रमोट हुए। लिहाजा जिले के थाना क्षेत्रों में भी व्यापक बदलाव होगा। ऐसे में एक सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ पुलिसिंग चुनौती पूर्ण है। बिलासपुर में वैसे भी आईजी, एसपी के टकराव का अपना कलंकित इतिहास है। जब कभी आईजी बेहद सक्रिय रहा तब तब जिले को एसपी  ‘‘यस सर‘‘ वाला मिला। यदि ऐसा नही हुआ तो पुलिस बल का आत्मविश्वास टुटा है। मयंक श्रीवास्तव को बिलासपुर जिले से ज्यादा दूर तब तक नही किया जा सकता जब तक झीरम जांच आयोग अपनी कार्यवाही पुरी नही कर लेता। दूसरी तरफ जिले में प्रशासनिक क्षेत्र में राज्य सरकार ने जिले की इतनी उपेक्षा कभी नही की जितनी इस समय हो रही है। एक वक्त था जब जिले में कमिश्नर, कलेक्टर, सीईओ जिला पंचायत, नगर निगम आयुक्त के अतिरिक्त कम से कम दो आईएएस होते थे। किन्तु इस वक्त जब 2018 के अंत में चुनाव होने वाले है तब सिर्फ कलेक्टर ही आईएएस है। इसे बिलासपुर की चिंतनीय दशा ही कहा जाएगा। जिला पंचायत में सक्षम सीईओ न होने से राज्य एवं केन्द्र की तमाम महत्वाकांक्षी योजनाएं दम तोड़ रही है। सिर्फ उन योजनाओ में बजट निकल रहा है जिनमें भ्रष्ट अधिकारी,एवं ठेकेदार बेशरमी से कमिशन खाया जा रहा है। फोटो से काम को पुरा बताकर प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन को पलिता लगा दिया गया है। इसी तरह प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्यान्वयन में त्रुटी है। हितग्राही चयन से लेकर मकान निर्माण तक जम कर धांधली हो रही है। इस योजना में जिसे अधिकारी नोडल अधिकारी बनाया गया है ।उस पर वर्ष 2016 में एन्टी करप्शन ने छापा मारा था और चालान जमा न होने के कारण फिलहाल वे जेल के बाहर है। जिल पंचायत में इन दिनो चैक काटते ही कमिशन मिल जाता इस कारण सिर्फ खनिज न्यास के फंड किए जाने वाले काम के लिए सीईओ स्वयं खनिज अधिकारी को फंड रिलिज़ के लिए दबाव बनाते है। अधिक्तर जनपद पंचायतों में सीईओ वे लोग है प्रतिनियुक्ति पर आए। नगर पालिक निगम बिलासपुर को सक्षम आयुक्त न मिलने का परिणाम यह है की प्रदेश का उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीपति ने भी हाल ही में निगम को कर्तव्य पुर्ती न करने के कारण भंग करने योग्य बताया।

error: Content is protected !!