जोगी के कार्यकाल में किए गए  विकास कार्य को आज भी नही भूली बिलासपुर की जनता

०० जनता याद करती है उनके द्वारा कराए गए कामों को

०० जनता फिर कर रही पुकार बिलासपुर की अस्मिता बचाने फिर आओ एक बार

बिलासपुर। राष्ट्रीय राजनीति में किसी भी राज्य के विधानसभा चुनाव बिना लहर के नही होते। फिर चाहे मुद्दा अपने आप मिले या पैदा करना पड़े।  यह काम दोनो तरफ से होता है। सत्ता पक्ष को मतदाताओं के सामने कोई ऐसा वादा करना पड़ता है जो मतदाताओं को सत्ता विरोधी मानसिकता से बाहर निकाले और दूसरी तरफ विपक्ष को कोई ऐसी लहर की तलाश रहती है जिस पर सवार होकर वह सत्ता के शिखर पर पहुंचे। छत्तीसगढ़ राज्य में वर्ष 2018 के अंत में विधानसभा के चुनाव संभावित है। जिनमें अजीत जोगी का जाति प्रकरण एक बड़ा मुद्दा होगा। इस बात की पुरी संभावना है कि पिता पुत्र की जोड़ी को सामान्य सीट से चुनाव लड़ना पड़े और वह सामान्य सीट बिलासपुर जिले से ही होगी। बिलासपुर की जनता अजीत जोगी के मुख्यमंत्री रहते हुए उनके द्वारा तेजी से कराए गए विकास कार्यों को आज तक याद करती है। जनता के द्वारा उस वक्त के विकास कार्यों को याद करना और भी समसामायिक हो जाता जब वह सिवरेज के दंश को पिछले चार साल से झेल रही है। और दिल से चाहती है कि  भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर मंत्री अमर अग्रवाल के विरूद्ध कोई ऐसा लोकप्रिय प्रत्याशी मैदान में उतरें जिसके सिर पर जीत का ताज रख कर खरसिया निवासी नेता से जनता को मुक्ति मिले।

छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के सुप्रिमों अजीत जोगी और उनके परिवार की राजनीति का केन्द्र बिन्दु बिलासपुर जिला रहा है। हाल ही में उनकी पार्टी ने लोरमी विधानसभा सींट से धरमजीत सिंह का नाम घोषित किया। कुछ राजनैतिक विशेषज्ञों को उम्मीद थी कि यहां से अमित जोगी चुनाव में उतर सकते है किन्तु अब यह संभावना समाप्त है। अब बिलासपुर जिले में बिलासपुर और बेलतरा दो सीट बचती है। इनमें से बिलासपुर सीट का कद जोगी के कद के लिए माकूल है। वर्ष 1996 में उनके समर्थक ने यहां से निर्दलिय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और कांग्रेस को तीसरे नंबर पर ढकेल दिया। जब उन्हें कांग्रेस से टिकट मिला तब भले ही वे दो बार हारे पर उनकी हार सम्मानजनक रही। बिलासपुर जिला न तो जोगी के लिए अन्जाना है न ही जिले के लिए वे अन्जाने है। यहां का प्रत्येक मतदाता उन्हें और उनके द्वारा कम  समय में कराए गए कार्यो को आज भी याद करता है। आज बिना किसी ठोस योजना के व्यापारियों को उनकी दुकानों से बेदखल कर दिया जाता है। जब दुकानदारों को जोगी का समय याद आता हैै। जब जिस दुकानदार को हटाने के पूर्व उसे नई जगह स्थापति किया जाता तभी उसकी पुरानी तोड़ी थी। इसी तरह बेजाकब्जा कर बनाए गए आवासों पर तभी डोजर चला  जब उन्हें नए आवास में पहुचा दिया गया । इमलीपारा की बस्ती इसी बात का उदाहरण।  आज जब बिलासपुर नगर निगम के सभी वार्डों में रोड नाली पानी बिजली व्यवस्था दम तोड़ रही है पुरा शहर धुल के गुबार में ढका हुआ है। नागरिक अपना स्वास्थ्य के सांथ खिलवाड़ करते देखे जा रहे है, व्यापारियों का व्यापार चैपट है। तब यहा का मतदाता अपने विधायक के रूप ऐसे चेहरे को चाहता जिसके मुख्यमंत्री बनने की पुरी संभावना हो तब उसे इन सब गुणों  से युक्त एक ही चेहरा नजर आता है और वह है अजीत प्रमोद जोगी का चेहरा। छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस को राज्य भर में जीत के लिए एक बड़े विजय अभियान की जरूरत है और ऐसा तभी होगा जब पार्टी का प्रमुख भारतीय जनता पार्टी के एक ऐसे नेता को परास्त करेगा जो जीत तो कई बार से रहा हो किन्तु जनता की नजरों में उतर चुका हो। और यह खुबी बिलासपुर विधानसभा सीट में है। यदि छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के अजीत जोगी बिलासपुर से चुनाव में उतर जाए तो उनके उपर लगे वे आक्षेप स्वयं ही समाप्त हो जाते है जिसके तहत यह कहा जाता है कि वे अमर अग्रवाल के विरूद्ध कमजोर प्रत्याशी देते है।

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