प्रतियोगी परीक्षाओ में सफलता के झंडे गाड़ने वाली अर्चना पांडे बनी पीएससी टॉपर

०० अर्चना पांडे के पिता और माता ने कहा उन्हें तीनों बेटियों पर गर्व है

रायपुर/राजनांदगांव| छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (पीएससी) में टॉप करने वाली राजनांदगांव की अर्चना पांडे के परिवार को इस तरह की सफलता की अब आदत हो गई है। और हो भी क्यों नहीं, परिवार में तीन बेटियां हैं और तीनों बेमिसाल हैं। टॉपर अर्चना इस वक्त रायपुर में हैं लेकिन घर में उनके पिता, मां और बहनें मौजूद हैं जो इस सफलता पर गदगद हैं। अर्चना के पिता सुरेश कुमार और माता ममता पांडे कहती हैं कि ऐसी बेटी पर उनको गर्व है।

राजनांदगांव की अर्चना ने पीएससी में थर्ड अटेंप्ट में टॉप -टेन में आने में कामयाब हुई। पिता सुरेश कुमार बताते हैं कि अर्चना शुरू से ही काफी मेधावी रही और पूरे परिवार को अर्चना की इस सफलता का यकीन था। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक शिक्षा डोंगरगढ़ के सरस्वती शिशु मंदिर में ग्रहण करने के बाद अर्चना ने राजनांदगांव में कॉलेज की पढ़ाई की। इसके बाद उसने बिलासपुर में पीएससी की कोचिंग वर्ष 2014 से शुरू की। अर्चना ने सबसे पहले व्यवसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) की परीक्षा दी जिसमें उसका चयन रेवेन्यू इंस्पेक्टर (आरआई) के लिए हुआ। इसके बाद उसने पीएससी की परीक्षा दी। पहली बार पीएससी में उसे सहायक लेखा अधिकारी का पद मिला। इससे भी संतुष्ट न होकर दूसरी बार पीएससी का सामना किया। यहां सहायक परियोजना अधिकारी का पद अर्चना को मिला। जिला पंचायत बालोद में इस पद पर काम करते हुए अर्चना ने फिर मेहनत की और उसने टॉप कर लिया। पिता सुरेश कुमार और माता ममता बताती हैं कि उनकी तीन बेटियां हैं और तीनों हुनरमंद हैं। बड़ी बेटी अर्चना ने अभी सफलता के झंडे गाड़े ही हैं, उससे छोटी लवली एम कॉम की पढ़ाई पूरी करने के बाद अभी चार्टेड एकाउंटेट (सीए) की तैयारी कर रही है। सबसे छोटी गोल्डी शासकीय मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। माता ममता पांडे कहती हैं कि उनकी बेटियों ने उनका सिर ऊंचा कर दिया है। राजनांदगांव वन मंडल के मनगटा वन चेतना केन्द्र में पदस्थ डिप्टी रेंजर सुरेश कुमार पांडे कहते हैं कि लोग बेटियों को कमतर आंकते हैं लेकिन जब उनकी एक के बाद एक तीन बेटियां हुईं तो उन्होंने अपनी बेटियों की परवरिश में कहीं कमी नहीं होने दी और उनकी उम्मीदों को पूरा आकाश देने का हर संभव काम किया। बेटियों ने भी ऐसा काम किया कि पूरे परिवार को उन पर गर्व है।

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