पचपेड़ी पुलिस ने फिर दिखाई तानाशाही, मनमर्जी तरीके से किया संवाददाता को गिरफ्तार

०० केवटाडीह टांगर सरपंच के भ्रष्टाचार के खिलाफ समाचार प्रकाशन करने पर की गयी थी शिकायत

०० पुलिस ने एकतरफा कार्यवाही करते हुए पत्रकार को किया गिरफ्तार

०० पत्रकार ने भी सरपंच के खिलाफ दर्ज करायी थी शिकायत, सरपंच के खिलाफ नहीं की गयी कार्यवाही  

बिलासपुर। पचपेड़ी थाना अंतर्गत ग्राम केंवटाडीह में सरपंच पति की एक झुटी शिकायत पर नया इंडिया के ग्रामीण संवाददाता चन्द्रकांत कुपेन्द्र को पुलिस ने अवकाश के दिन गिरफ्तार किया। उनके ऊपर सरपंच पति ने समाचार न छापने के लिए पैसे की मांग की रिपोर्ट दर्ज कराई। यह शिकायत गांव के सरपंच के पति ने 27 अक्टूबर को दर्ज कराई थी। 25 दिसंबर की दरमियानी रात पुलिस ने संवाददाता को उसके घर से गिरफ्तार किया। अभी हाल ही में छत्तीसगढ़ विधानसभा शीत कालिन सत्र में गृह मंत्री ने नेता प्रतिपक्ष के एक लिखित प्रश्न के उत्तर में जानकारी देकर बताया था कि राज्य में अब तक वर्ष 2017 में 14 पत्रकारो को विभिन्न मामलों में पुलिस ने हिरासत में लिया है। इस तरह अब यह आकंड़ा दो दिन बाद ही 15 में तबदील हो गया है। पुरा मामला संवाददाता द्वारा क्षेत्रिय सरपंच के भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले समाचारों को लेकर है।

अक्टूबर-नवंबर के माह में केवटाडीह की महिला सरंपच के खिलाफ अखबार में लगातार समाचारों का प्रकाशन हो रहा था। इसी कारण सरपंच के विरूद्ध अविश्वास प्रस्ताव भी हुआ था। वोंटो के आधार पर सरंपच के खिलाफ जनादेश था किन्तु सरपंच को तकनीकी कारणों से स्टे प्राप्त हुआ। मामला अभी न्यायालय में लंबित है। सरपंच पति द्वारा अखबार के संवाददाता को लगातार डराया, धमकाया जा रहा था। जिसकी एक लिखित शिकायत 25 अक्टूबर 2017 को संवाददाता ने दर्ज भी कराई थी। जिसकी पावती सुरक्षित है। सरंपच पति ने 27 अक्टूबर को पचपेड़ी थाने में भयादोहन का मामला दर्ज कराया। अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति ने पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कानून की मांग को लेकर 5 दिसंबर को बिलासपुर नेहरू चौक पर जो धरना दिया था, उस वक्त कलेक्टर के माध्यम से जो ज्ञापन महामहिम राज्यपाल को प्रेषित किया गया उसमें भी इस एफआईआर का उल्लेख है।

पत्रकारों के खिलाफ सरकारी दमन को बर्दाश्त नही किया जाएगा-गोविंद शर्मा 

अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद शर्मा ने इस गिरफ्तारी के विरोध में तीव्र प्रतिक्रिया जाहिर की। उन्होंने कहा की पत्रकार चाहे वह राजधानी में बैठा हो अथवा एक साधारण से गांव में सरकार उससे इतना भय खाती है कि एक अभिव्यक्ति से डर कर उसे गिरफ्तार कर लेती है। इतनी ही तेजी से पुलिस की कार्यवाही आपाराधिक्तत्वों के खिलाफ नही होती। जाने क्यों हाथ में पेन लेकर लिखने वालों पत्रकारों से प्रशासन क्यांे डरता है। पत्रकार सुरक्षा समिति अपने साथी की इस तरह की गई गिरफ्तारी की घोर निंदा करती है तथा प्रशासन में बैठे उच्च अधिकारियो को यह निवेदन करती है कि पत्रकार अपनी अभिव्यक्ति की आजादी के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगा।

पचपेड़ी पुलिस प्रताड़ता से तंग युवक ने की थी आत्महत्या, दोषी के खिलाफ नही हुई कार्यवाही

पचपेड़ी थाना में कुछ माह पूर्व हेमलाल सुर्यवंशी को गिरफ्तार किया गया था। थाने में पदस्थ बलदेव सिंह बंधे की प्रताड़ना से तंग आकर किशोर ने कीटनाशक पी लिया था। मृतक के भाई ने तब थाना क्षेत्र के कर्मचारियों पर आरोप लगाया था कि पहले उन्होंने मामले को रफा-दफा करने का 30 हजार रुपये लिया और मामले को दबा दिया। बाद में इसी मामले में पुलिस उसके भाई को गिरफ्तार करने घर पहुंच गई। वहां भी पुलिस ने पैसा लेकर थाना पहुंचने कहा। तब पुलिस द्वारा 7 हजार रुपये की मांग की गई थी। हेमलाल के भाई ने किसी तरह से 5 हजार रुपये दिया और अपने भाई को मुचलके पर छुड़ाया। हेमलाल इस घटना से दुखी था और उसने खेत में जाकर कीटनाशक पी लिया जिससे उसकी मौत हो गई।  पुरा मामला तब सुर्खियों में छपा था। पुलिस ने मामला उजागर होने पर अपनी प्रताड़ना को छुपाने के लिए उल्टे मिडिया पर दोषारोपण किया था। पचपेड़ी थाना अपनी तानाशाही, अवैध वसूली, अपराधियों से मित्रवत व्यवहार तथा निर्दोषो को फसाने के लिए जाना जाता है।

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