चार साल से चल रहे मानहानि प्रकरण में डॉ.बाजपेयी को नही मिला समंस

बिलासपुर। एक वक्त जिस मुद्दे पर शहर की राजनीति में भुचाल आया था और अपने ऊपर सार्वजनिक रूप से लग रहे आरोपो से व्यथित होकर नगर विधायक ने आपराधिक मानहानि का वाद न्यायालय में दर्ज कराया था। अब वो मुद्दा भदौरा भुमि कांड और नगर विधायक का मान दोनो को ही कोई नही जानता। यहां तक की जिन्होंने इस प्रकरण को न्यायालय में दर्ज कराया उन्हें भी मानहानि में कोई रूची नही लगती तभी तो चार वर्षों में मात्र 12 पेशी के बाद भी आज तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रदेश महासचिव डा. विवेक बाजपेयी जिनका आवास मध्यनगरी चौक पर है, के पास इस प्रकरण में उपस्थिति के लिए समंस भी नही पहुंचा। आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि इस प्रकरण में मानहानि का एक अन्य दोषी श्रीमति वाणी राव न्यायालय में उपस्थित होकर जमानत प्राप्त कर चुकी है।

भदौरा भुमि कांड जिले का एक ऐसा कांड था जिसे लेकर एक माह तक कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेताओं ने धरना प्रदर्शन और पत्रकार वार्ता की थी। नेहरू चौक पर एक नही दर्जनों नेताओं ने राज्य सरकार के एक केबिनेट मंत्री शहर विधायक पर गंभीर आरोप लगाए थे किन्तु शहर विधायक ने जब 22 अप्रेल 2013 को न्यायालय में अपनी मानहानि जो की करोड़ों में है का वाद प्रस्तुत किया तब इसका दोषी सिर्फ वाणी राव और डा. विवेक बाजपेयी को बताया। 6 फरवरी 2014 को यह प्रकरण न्यायालय ने पंजीबद्ध कर उसे 1118/2014 सीजेएम क्र. दे दिया। वर्ष 2017 में इस प्रकरण में मात्र तीन पेशी हुई जिनकी तारीख 18 अप्रेल, 13 जुलाई, 13 सितंबर है। अब यह प्रकरण 18 जनवरी 2018 के लिए रखा गया। वर्ष 2013 से लेकर आज तक इस प्रकरण में किसी भी साल चार पेशी से अधिक नही मिली। इस तरह एक हजार चार सौ दिनों में 12 बार मानहानि के इस प्रकरण की सुनवाई हुई। वर्ष 2018 चुनावी वर्ष रहेगा आज तक शहर के एक लाख 50 हजार मतदाताओं को यह पता नही चला कि उन्होंने जिसे अपना विधायक चुना, जिसे प्रदेश के मुखिया ने केबिनेट मंत्री बनाया, उसकी मानहानि का दोषी कौन है। यदि न्यायालय की कार्यवाही इसी रफ्तार से चलेगी तो कई चुनाव बीतने के बाद भी मानहानि का यह प्रकरण ऐसे ही चलता रहेगा।

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