मस्तुरी विधानसभा बनी तीनों राजनैतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा की सीट

०० मस्तुरी वर्तमान विधायक ने जोगी की पार्टी की ओर न जाकर पक्की की अपनी टिकट

०० जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने मस्तुरी विधानसभा में अपने पार्टी संगठन को किया बेहद मजबूती से खड़ा

०० भाजपा पार्टी की है परम्परा जिस व्यक्ति का नाम मंडल से ऊपर जाएगा, उसे ही बनाया जाता है पार्टी का प्रत्याशी

बिलासपुर। जिले में मस्तुरी विधानसभा की सीट इस बार तीनों राजनैतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा की सीट बन गई है। मस्तुरी परम्परा गत रूप से भारतीय जनता पार्टी की सीट रही हैं। वर्ष 2000 में मदन लाल डहरिया ने दल बदल कर यह सीट कांग्रेस की झोली में डाली। जिसका खामियाजा 2003 के चुनाव में कांग्रेस को ही हुआ और यहां से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी डॉ. बांधी दो बार विजयी हुए। वर्ष 2013 में डॉ. बांधी चुनाव हारे और कांग्रेस ने इस सीट को अपने खाते में डाला कांग्रेस की इस जीत में अजीत जोगी का सबसे बड़ा हाथ था, इसी कारण अब यह सीट तीनों राजनैतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण है।

कांग्रेस के वर्तमान विधायक ने जोगी की ओर न जाकर अपनी टिकट पक्की कर ली है। वे पहले के मुकाबले अब क्षेत्र में ज्यादा सक्रिय नजर आने लगे हैं,और अपने सामाजिक संबंधों को भी उन्होंने बेहतर तरीके से बनाया  है,पूरी कांग्रेस की टीम राहुल गांघी को बधाई देने एवं ताजपोशी कार्यक्रम में  दिल्ली गई हुई हैं ,पर इस बार लहरिया ने सूझबूझ अपनाते हुए ,बाबा गुरुघासीदास की जयंती के अवसर पर दिल्ली न जाकर छेत्रवासीयो के सांथ जयंती मनाना सबसे उचित समझा,जिसकी छेत्रवासियो ने काफी सराहा।  छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस ने मस्तुरी विधानसभा में अपने पार्टी संगठन को बेहद मजबूती से खड़ा किया है फिर चाहे कार्यकर्ता बनाने का मामला हो ,अथवा अधिकार यात्रा निकालने का हो। पार्टी सुत्रों की माने तो इस वक्त उन्होंने इस क्षेत्र में लगभग 40 हजार कार्यकर्ता बनाए हैं। राजनैतिक सुत्रों का कहना है कि इस बार मस्तुरी से जोगी परिवार का कोई सदस्य चुनाव लड़ सकता है इसलिए इतनी मजबूती से संगठन को खड़ा किया गया है। जबकि पार्टी के कार्यकर्ता इसे मात्र अफवाह बताते है। उनका कहना है कि क्षेत्र में अजीत जोगी को जिस तरह से क्षेत्रिय विधायक ने धोखा दिया उसी का परिणाम है कि पार्टी का संगठन अपने नेता के पक्ष में खड़ा हुआ है। 42 दिनों की अधिकार यात्रा से पार्टी ने अपने सभी कार्यकर्ताओं को पुरे क्षेत्र में मतदाताओं से मिलने का अवसर दिया। पुरी यात्रा के दौरान मनोज खरे, लक्ष्मी भार्गव, चन्द्र प्रकाश कुर्रे, राजेश्वर भार्गव, महेन्द्र रात्रे एक टीम के रूप में उभरे है। अधिकार यात्रा के द्वारा एक तरह से पार्टी ने क्षेत्र में अपनी पकड़ को काफी मजबूत किया है। मनोज खरे की राजनैतिक सक्रियता सीपत क्षेत्र से है। केवल एनटीपीसी प्रभावित ही नही बल्कि सीपत के 45 ग्राम पंचायत में ओ काफी लोकप्रिय हैं, साथ ही ये पुरी ग्राम पंचायत मस्तुरी विधानसभा की है। एनटीपीसी विस्थापति  तथा प्रभावित गांव में मनोज खरे दो दशको से सक्रिय है। उनके पास सामाजिक राजनैतिक सक्रिता के कारण अपना वोट बैंक है। पिछले चुनाव में भी उन्होंने अजीत जोगी के प्रभाव में कांग्रेस के लिए वोट जुटाने में अहम भूमिका निभाई। जिसका परिणाम था कि कांग्रेस ने क्षेत्र से जीत हासिल की। भारतीय जनता पार्टी के लिए मस्तुरी विधानसभा अब विशेष महत्व रखती है। इस विधानसभा में लगभग एक लाख 75 हजार मतदाता है। 275 मतदान केन्द्र है, जो 180 गांव को मतदान की व्यवस्था देते है। मतदाता की दृष्टि से यह क्षेत्र बिल्हा से बड़ा है। भाजपा ने इस सीट को विशेष महत्व दिया है इसलिए कोरबा के सांसद बंसीलाल महतो को यहां का प्रभारी बनाया गया है। पार्टी की परम्परा है कि जिस व्यक्ति का नाम मंडल से ऊपर जाता हैं,उसे ही पार्टी का प्रत्याशी बनाया जाता है। प्रत्येक मंडल से तीन अथवा पांच नाम जाते है। क्षेत्र में जिन नामों की चर्चा है उनमें रामनारायण भारद्वाज, चन्द्र प्रकाश सुर्या के साथ डा. कृष्ण मुर्ति बांधी और चांदनी भारद्वाज,शत्रुहन लास्कर ,हेमचंद जांगड़े के नाम चल रहे है। इनमें से रामनारायण भारद्वाज वर्तमान में जिला भाजपा के उपाध्यक्ष है, एवं जयरामनगर कृषि उपज मंडी के पूर्व अध्यक्ष रहे है। इस मंडी की यह विशेषता है कि यह आधे मस्तुरी को कवर करती है। वही हेमचंद जांगड़े ने क्षेत्र में अपनी सक्रियता लगातार बढ़ाई है। वे राज्य अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य है इस नाते मस्तुरी में उनकी लगातार उपस्थिति बनी हुई है,उनके पिता भारतीय जनता पार्टी से लंबे वक्त तक सासंद रहे। अपने पिता के राजनैतिक संबंधों का लाभ हेमचंद जांगड़े को संगठन स्थल पर मिलता है। वही चांदनी भारद्वाज जनपद की अध्यक्ष है उनकी मां जांजगीर से सांसद है। पिछले विधानसभा चुनाव में भी चांदनी भारद्वाज ने टिकट के लिए काफी प्रयास किया था, पर उस वक्त कम अनुभव के कारण उनके नाम पर विचार नही हुआ। इस बार उनकी राजनैतिक संबंध तथा सक्रियता पहले से ज्यादा है,लगातार छेत्रवासीयो जनसंपर्क में लगी हुई हैं,सांथ ही एक महिला होने के बावजूद आमजनता की समस्या का लगातार समाधान कर ही शांत होती हैं,जिसके चलते छेत्र में लगातार उन्हें सम्मान मिल रहा हैं। पिछली चुनाव हारे हुए डा. बांधी ने पार्टी में अपनी सक्रियता लगातार बना कर रखी है। संगठन स्तर पर उन्होंने अपने समर्थकों को जगह भी दिलाई। हालांकि जाति समीकरण के चलते प्रभारी समीक्षा बैठक में उनके पार्टी के ही कार्यकर्ताओं ने डा. बांधी के खिलाफ इशारों -इशारों में नही  खुलेआम मंच के ऊपर एलानिया नाराजगी व्यक्त किए? मस्तुरी विधानसभा भले ही आरक्षित सीट हो किन्तु यहां सवर्ण वर्ग का मत प्रतिशत हार जीत को तय करता है। इस लिए कोई भी राजनैतिक दल इस वर्ग की उपेक्षा नही करता है।

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