मणिशंकर पाण्डेय की याचिका पर हाईकोर्ट ने पुलिस अधीक्षक व सरकंडा टीआई को भेजा नोटिस

०० हाईकोर्ट द्वारा कार्रवाई पर रोक लगाने के बाद भी पाण्डेय को पुलिस ने चार घंटे बैठाया था थाने में

०० पुलिस की कार्यवाही को लेकर जोगी कांग्रेस नेता मणिशंकर ने लगायी थी अवमानना याचिका

बिलासपुर। हाइकोर्ट ने जोगी कांग्रेस नेता मणिशंकर की अवमानना याचिका को स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने को कहा है। हाईकोर्ट द्वारा जोगी कांग्रेस नेता मणिशंकर पाण्डेय पर कार्रवाई पर रोक लगाने के बाद भी चार घंटे थाने में बैठाने के खिलाफ पेश अवमानना याचिका पर कोर्ट ने बिलासपुर पुलिस अधीक्षक व सरकंडा टीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

डीएलएस कॉलेज के चेयरमैन बसंत शर्मा ने मणिशंकर पांडेय के खिलाफ सरकंडा थाने में भयादोहन कर अवैध वसूली करने की रिपोर्ट लिखाई है। रिपोर्ट पर पुलिस ने अपराध पंजीबद्घ किया। इसके खिलाफ मणिशंकर पांडेय ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने कार्रवाई पर रोक लगाते हुए अग्रिम जमानत प्रदान किया है। इसके बावजूद सरकंडा पुलिस ने 10 नवंबर 2017 को पकड़ कर थाने ले गई। वहां चार घंटे तक उसे बैठाकर रखा गया था। इस मामले को लेकर मणिशंकर पांडेय ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट के सभी दस्तावेज दिखाने पर भी पुलिस ने नहीं छोड़ा। उनके अधिवक्ताओं द्वारा दस्तावेज प्रस्तुत करने पर छोड़ा गया। पुलिस की इस कार्रवाई को कोर्ट का अवमानना बताया गया। हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए एसपी व सरकंडा टीआई सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। गौरतलब है कि जनता कांग्रेस जे के संभागीय प्रवक्ता मनीशंकर पान्डेय के जमानत आवेदन पर आपत्ति करते हुऐ डीएलएस के संचालक कांग्रेस नेता बंसत शर्मा के द्वारा माननीय न्यायालय मे झूठा कथन करते हुए आवेदन किया था जिस पर कहा गया था की मनीशंकर पान्डेय को एसीबी प्रमुख रायपुर के द्वारा पांच लाख रुपए लेते रंगे हाथों पकड़ा था एवं जो स्टींग आपरेशन किया गया था वह भी एसीबी रायपुर के निगरानी मे हुआ था पुरे मामले की जानकारी एसीबी रायपुर को शुरू से थी जबकि माननीय सत्र् न्यायालय बिलासपुर के द्वारा जांच प्रतिवेदन मंगाने पर थाना प्रभारी सरंकडा द्वारा कहा गया हैं की मनीशंकर को एसीबी ने रंगेहाथ नहीं पकडा हैं और ना ही एसीबी ने ऐसा कोई कार्यवाही किया है उक्त सभी को लेकर मनीशंकर पान्डेय ने एक रीट पिटिशन 482माननीय उच्च न्यायालय मे धारा 181,191,193,195,195,के तहत लगाया था जिस पर आज माननीय न्यायालय ने सुनवाई करते हुऐ नोटीस जारी कर पूछा हैं क्यों न आपके खिलाफ आपराध पंजीबद्ध कराया जावे  जवाब दे।

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