रेत व लकड़ी तस्करों के सरगना हैं गृहमंत्री,कोर्ट में कर सकता हूं साबित : अमित जोगी

रायपुर/अंबिकापुर| अधिकार रैली समापन कार्यक्रम में अंबिकापुर आए मरवाही विधायक ने पत्रकार वार्ता में गृहमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने गृहमंत्री को रेत व लकड़ी माफिया तक की संज्ञा दे डाली। पत्रकारों से चर्चा करते हुए अमित जोगी ने कहा कि सूरजपुर जिले के प्रतापपुर व सूरजपुर क्षेत्र में गृहमंत्री रामसेवक पैकरा की सह पर उनके सहयोगी महान नदी,पांगन नदी सहित अन्य नदियों में अवैध रूप से रेत का उत्खनन कर रहे हैं। इसके साथ ही जंगलों की लकड़ी काटकर अन्य प्रदेशों में तस्करी की जा रही है। इसके सरगना खुद गृहमंत्री हैं। उन्होंने कहा कि अगर मैं गलत कह रहा हूं तो गृहमंत्री मेरे खिलाफ मानहानि का दावा कर सकते हैं, मै न्यायालय में सारे तथ्य के साथ उपस्थित रहूंगा।

अमित जोगी ने कहा कि उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा 21 हजार करोड़ की लागत से अमवार में डेम का निर्माण किया जा रहा है। उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा जो पर्यावरण रिपोर्ट दी गई है उसके अनुसार मात्र 54 परिवार प्रभावित हो रहे हैं, यह रिपोर्ट पूरी तरह से फर्जी है। बांध बनना चाहिए, हम इसका विरोध नहीं करते हैं। लेकिन नियमों के अनुरूप होना चाहिए। हम विकास का विरोध नहीं करते हैं। अमवार डेम बनने से सनावल सहित लगभग 20 गांव पूरी तरह से डूबान क्षेत्र में आ जाएंगे और लगभग 40 गांव के लोग बारिश के दौरान पूरी तरह से प्रभावित हो जाएंगे। तात्कालीन जल संसाधन मंत्री रामविचार नेताम ने उस समय अमवार डेम बनने के लिए प्रदेश सरकार की तरफ से हस्ताक्षर किया था। इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा। उन्होंने कहा कि वर्तमान विधायक ने उनके साथ ही सनावल में जाकर कसम ली थी कि अगर डेम बनता है तो सबसे पहले वे दोनो जलसमाधि लेंगे, लेकिन उन्होंने पिछले चार वर्ष के दौरान एक बार भी अमवार डेम का विरोध नहीं किया है। भाजपा व कांग्रेस के लोगों ने सनवाल के लोगों की डेथ वारंट पर हस्ताक्षर कर दिया है। सूरजपुर में एनएच चौड़ीकरण व अंबिकापुर रिंग रोड पर अतिक्रमण हटाने के दौरान प्रशासन ने लोगों के साथ प्रशासनिक युद्ध लड़ा है। इसके खिलाफ जनता कांग्रेस विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के गाइड-लाइन के अनुसार जब एनएच शहर के बीचों-बीच से गुजरती है और वहां रिंग रोड व बाईपास है तो उसे चौड़ा करना चाहिए। लेकिन स्थानीय विधायक की अकर्मण्यता व दो मंत्रियों की लड़ाई की वजह से 500 लोगों प्रभावित हुए हैं। इसी तरह अंबिकापुर में रात के अंधेरे में प्रशासन ने पुलिस बल के साथ जनता के साथ प्रशासनिक युद्ध किया है।

 

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