मेला स्थल पर खो गई है, व्यापारियों की जमीन, यदि इस माह नही हुआ सीमांकन तो फिर संभावनाए नही 

बिलासपुर। जिला उद्योग संघ के व्यापार मेले के लिए त्रिवेणी भवन के नज़दीक की खुली भूमि पर मेला समिति ने काम चालू कर दिया है। जैसे-जैसे काम की गति बढ़ रही है इस क्षेत्र के 52 व्यपारियों को यह अंदेशा सता रहा है कि अब एक बार फिर से उनकी जमीन का सीमांकन खटाई में पड़ जाएगा। व्यापार विहार के पहले बिलासपुर जिले का थोक बाजार माल धक्का के नाम से रेल्वे क्षेत्र में संचालित था। जगह की कमी आवा गमन की समस्या को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने तब के बिलासपुर विकास प्राधीकरण को व्यापारियों के लिए विशेष क्षेत्र बनाने कहा। नगर नियोजन के लिए बने अर्ध सरकारी संस्थान को यह लाभप्रध था। व्यापारियों को भी सुविधायुक्त परिसर मिलेगा इस कारण उन्होंने रेल्वे की जमीन छोड़ना उचित समझा। बीडीए ने सरकार की मदद से सरकारी जमीन तथा कुछ निजी जमीन का अधिकरण करते हुए। व्यापार विहार नाम से इस क्षेत्र को बसाना शुरू किया। मात्र एक दशक की मेहनत का परिणाम था कि दो रुपये वर्ग फिट की जमीन आज 2500-3000 वर्ग फिट में बिक रही है। वर्ष 2001 में विकास प्राधिकरण समाप्त हो गया और यह पुरा क्षेत्र नगर पालिक निगम बिलासपुर को मिल गया। इसी वर्ष से यहां उद्योग संघ ने व्यापार मेला सजाना शुरू किया। नगर निगम के लिए यह क्षेत्र शहर भर की गंदगी डंप करने का स्थान था। तब जिला उद्योग संघ के मेले में लोंगों को खामी नही दिखी। किन्तु जैसे-जैसे क्षेत्र में व्यवसायिक गतिविधि बढ़ रही है और भूमि-स्वामियों को वह जमीन जो उन्होनें मेहनत की कमाई से खरीदी थी। मिल नही रही है, तब जिला उद्योग संघ के व्यपारिक मेले से व्यापारियों की नाराजगी बढ़ रही है। वे इस बात को अच्छे से जानते है कि अब यदि जमीन पर कब्जा नही मिला तो जमीन नही सिर्फ कागज रह जाएंगे। दूसरी तरफ बिलासपुर तहसीलदार और क्षेत्र का पटवारी नित नया बहाना बना कर सीमांकन करने से कतराते है।

जिला उद्योग संघ के व्यापार मेले को लगा है ग्रहण:- वर्ष 2016 नवंबर माह में नोट बंदी के बाद जो मेला हुआ था उसकी व्यवसाय अन्य वर्षों से कम था। इस बार मेले पर जीएसटी की मार दिखाई पड़ेगी। देश में जीएसटी लागू होने के बाद व्यापार की स्थिति पूर्व के समान नही है। खाने-पीने की वस्तुओं से लेकर होज्यरी तक सभी सामानों का जीएसटी ने असर डाला है। व्यापार मेला में मुख्यतः ट्रेडिंग का काम होता है। अतः जीएसटी का प्रभाव भी होगा। ऐसे में मेले का लगातार दो वर्ष से काली छाया दिखाई दे रही है। वैसे भी मेला स्थल पर महंगाई की मार स्टाॅल बुक करने वालों पर भी पड़ी है। स्टाॅल का रेट लगातार मंहगा होता गया है और बिक्री में कमी होती जा रही है। मेला स्थल के नाम पर जो विशेष छुट बोली जाती वह छुट तो शहर के दुकानदार सामान्य तौर पर देते रहते है। उद्योग मेला यदि ट्रेडिंग मेले में बदल रहा है तो यह अपने मुख्य उद्देश्य से दुर जा रहा है। बिलासपुर जिले मंे औद्योगिक संभावनाएं लगातार दम तोड़ रही है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण स्पंज आयरन उद्योग है। जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का अरबों रुपये डूब गया। वन्दना विद्युत जैसी बड़ी कंपनी नीलामी के लिए बैंक के पास गिरवी पड़ी है।

error: Content is protected !!