कांग्रेस में बढ़ी टिकट के दावेदारों की संख्या, सवर्ण वर्ग से एक दर्जन से ज्यादा प्रत्याशी  

०० बीजेपी से बढ़ी जनता की नाराजगी, कांग्रेस की जीत की उम्मीद बढ़ी

०० विकास की दौर में पिछड़ापन इस बार होगा चुनाव का मुद्दा

बिलासपुर। 14 साल में जनता की नाराजगी स्थानीय विधायक अमर अग्रवाल के प्रति बढ़ती गई और अब बिलासपुर में टिकट के लिए कांग्रेस में जमकर प्रतिस्पर्धा चल रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में जहां एक या दो सवर्ण प्रत्याशी बिलासपुर से टिकट का दावां करते थे। इस बार संख्या दर्जन से ज्यादा हो गई है। कांग्रेस में चुनाव से ज्यादा प्रतिस्पर्धा टिकट के लिए होती है। टिकट पा जाना ही आधा चुनाव जीतने के सामान है। सत्ता विरोधी स्थिति को देखते हुए कांग्रेस में प्रत्येक वह नेता चुनाव टिकट की दौड़ में है जो या तो चुनाव लड़ा चुका है, जीता है अथवा संगठन में महत्वपूर्ण पद पर रहा, इसी कारण इस बार सवर्ण वर्ग से विजय पांडे, शैलेष पांडे, राजेश पांडे, शिवा मिश्रा,  तरू तिवारी, एसपी चतुर्वेदी जैसे नाम है वहीं वर्तमान शहर अध्यक्ष नरेन्द्र बोलर, मेकलाउड, रामशरण यादव, अटल श्रीवास्तव जैसे नाम भी है।

यदि नामों का वजन देखा जाए तो राजेश पांडे, विजय पांडे नगरीय निकाय में जनता का प्रतिनिधित्व कर चुके है। राजेश पांडे शहर के महापौर रहे वहीं विजय पांडे को विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष होने का मौका मिला। वे दो बार अलग-अलग कालेजों से छात्र संघ अध्यक्ष भी रह चुके है। आज नगर निगम के जिस टीम को कचरा कहा जाता है। उसी टीम से बीडीए में श्री पांडे सफलतम परियोजनाओं को लागू कराते थे। इसे उनके नेतृत्व क्षमता का गुण माना जा सकता है। बिलासपुर शहर में जब कांग्रेस लगातार हार रही थी, तब उन्ही की शहर अध्यक्षता में कांग्रेस ने महापौर चुनाव जीता था। यह बात अलग की आज वही श्रीमती राव अन्य राजनैतिक दल में है। शहर कांग्रेस की गतिविधियों को लगातार जिस तरह धारदार तरीके से नरेन्द्र बोलर ने बढ़ाया है वें विधायक टिकट के स्वाभाविक दावेदार है। उन्हें एक निगम चुनाव का अनुभव भी है और विपरित परिस्थितियों में भी उन्होने शहर से 24 पार्षदों को निगम में जीता कर भेजा है। शिवा मिश्रा एवं तरू तिवारी कांग्रेस पार्टी में उन परिवारों से आते है जिनके रग-रग में राजनीति और समाज सेवा बहती है। शिवा मिश्रा का पारिवारिक इतिहास कांग्रेस की राजनीति और समाज सेवा का उदाहरण है। शहर के पुराने जानकार बताते है कि जब उनके दादा नगर पालिक निगम के चेयरमेन थे तब एक सरकस आयोजक ने शहर में सरकस के लिए मैदान मांगा। उस समय मैदान का किराया कुछ रुपये मात्र था। किन्तु अध्यक्ष होने के नाते उन्होंने आयोजक से शुल्क के अतिरिक्त गोल बाजार क्षेत्र में चार लेंप पोस्ट लगाने कहा और वहीं से शहर में बाजार क्षेत्र में विद्युति करण शुरू हुआ। शिवा मिश्रा प्रदेश कांग्रेस कमेटी में संगठनात्मक पदों पर कार्य कर चुके है और शांत किन्तु धीर गंभीर स्वभाव के माने जाते है। तरू तिवारी उच्च शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हुए है। शहर में शैक्षणिक, साहित्य के प्रति गतिविधियों का संचालन उनकी विशेषता है। मध्यम वर्गीय परिवारों के साथ कृषि तथा व्यपारिक क्षेत्र में भी अच्छी पकड़ रखते है। शहर ही नही प्रदेश की शैक्षणिक संस्थाओं में उनका सकारात्मक सहयोग रहता है। इस बार कांग्रेस की टिकट मांगने वाले नामों में शैक्षणिक क्षेत्र के लोंगों का बोल बाला है। शैलेष पांडे भले ही पार्टी में हालहीं में शामिल हुए हैं, पर थोड़े ही दिनों में उन्होंने अपनी सक्रियता से पार्टी कार्यकर्ता एवं जनता के बीच खासी पकड़ बना ली है। बिलासपुर, कोटा, बेलतरा क्षेत्र में उनकी सक्रियता लगातार बनी हुई है। बिलासपुर जिले में पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी ने दो महिला प्रत्याशियों को टिकट दी थी। पहला नाम कोटा से श्रीमति जोगी का था और दुसरा बिलासपुर से वाणी राव का था। इस बार इन दोनो के नाम पर कांग्रेस से विचार नही हो सकता। तो क्या पार्टी महिला प्रत्याशियों के नाम पर विचार ही नही करेगी ?? जिले की राजनीति में तीन महिलाओं के नाम तेजी से उभरते है। पहला नाम करूणा शुक्ला का है जो प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की कर्मठ कार्यकर्ता बन कर स्थापित हो गई है। दूसरा नाम पूर्व सांसद मैक्लाउड का है और तिसरे स्थान पर आशीष सिंह की पत्नी रश्मि सिंह जो क्षत्री एवं ब्राम्हण दोनो वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है। चुनाव में भले ही दस माह शेष हों पर टिकट के दावेंदारों ने अपनी सक्रियता जनता के साथ-साथ दिल्ली तक बढ़ा दी है। ऐसे में पुराने दावेदार शेख गफ्फार, अशोक अग्रवाल, रामशरण यादव अपनी ओर से अंतिम समय में जोर लगांएगें।

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