गंदगी व अव्यवस्थाओ के साथ होने जा रहा राष्ट्रीय उद्योग-व्यापार मेला का आयोजन

०० आगामी माह 12 जनवरी से 16 जनवरी तक होगा राष्ट्रीय उद्योग एवं व्यापार मेला का आयोजन

०० मेले का आयोजन गंदगी के बीचो-बीच, दर्शको के साथ व्यापारियों के जान से किया जा रहा खिलवाड़

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ लघु एवं सहायक उद्योग संघ द्वारा राष्ट्रीय उद्योग एवं व्यापार मेला के नाम पर लोगों के जान से खिलवाड़ करने की पूरी तैयारी की जा रही है। मेले का आयोजन गंदगी के बीचो-बीच किया जा रहा है,जो मेला देखने आने वाले लोगो के साथ ही साथ व्यापारियों को भी बीमार कर सकता है। गंदगी, बदहाली और अव्यवस्था के बीच मेले के आयोजन से लगता है कि आयोजकों को लोगों की सुविधाओं से कोई सरोकार नहीं है उन्होंने तो बस अपने जेब की चिंता ज्यादा है।

छत्तीसगढ़ लघु एवं सहायक उद्योग संघ बिलासपुर द्वारा हर साल की तरह इस बार भी राष्ट्रीय उद्योग एवं व्यापार मेला का आयोजन किया गया है। त्रिवेणी परिसर व्यापार विहार परिक्षेत्र में आयोजित इस मेला में अव्यवस्था कोई नई बात नहीं है, बीते वर्ष भी मेले के आयोजन से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। मेले में गंदगी, बदहाली, शौचालय की उचित व्यवस्था नहीं होने से आमजनों को भारी परेशानियो का सामना करना पड़ा था| ऐसा नहीं कि सिर्फ मेला घूमने आने वाले लोगों को ही दिक्कते होती है, बल्कि मेले में स्टॉल लगाने वाले व्यापारी व उद्योगपति भी हलाकान रहते है। इनके लिए भोजन, पेयजल, शौचालय की व्यवस्था के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति किया जाता है। स्टॉल लगाने वाले व्यापारियों की माने तो मेला में अव्यवस्था को लेकर कई बार शिकायत कर चुके है, लेकिन आयोजकों के कान में जूं तक नहीं रेंगता है। पांच दिवसीय मेला आगामी माह 12 जनवरी से शुरू होने जा रहा है और यहां की तैयारी को देखकर लगता है कि इस बार भी व्यापार मेला में हर कुप्रबंधन और बदहाली हावी रहेगा। बिजली और शौचालयों की व्यवस्था में कोई सुधार नहीं दिखाई पड़ रहा है तमाम सडक़ों का हाल भी बुरा है। आयोजन समिति द्वारा मेला क्षेत्र में जल निकासी के लिए आवश्यक प्रबंध भी नहीं किया गया है। सडक़ और खुले स्थान पर जगह-जगह गढ्ढे है, जो लोगो के लिए मुसीबत बनेगे। यहां की सबसे बड़ी समस्या मेला पण्डाल के ठीक पीछे पसरा शहरभर की गंदगी है। जो मेला आने वाले लोगों के लिए मुसीबत का सबब रहेगा। कचरे को हटवाने के लिए पहल करने के बजाए आयोजन समिति टेंट से कचरे को ढककर गंदगी को छिपाने के प्रयास में लगी है, लेकिन बदबू को कैसे रोका जा सकता है। इस दिशा में उचित व ठोस कदम उठाने की जरूरत थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। आयोजन समिति की इस खामियाजा को मेला आने वाले लोगों को भुगतना पड़ेगा। माना कि यह मेला बड़ा होता है और इतने बड़े स्तर पर प्रबंध करने में कठिनाइयां भी होती होंगी, लेकिन यह कोई पहला आयोजन तो नहीं है। मेला तो हर साल होता है। होना तो यह चाहिए कि इन आयोजनों में सुधार हो और जन सुविधाओं में इजाफा हो। लोग व व्यापारी सुविधाओं के मोहताज न होने पाएं। इस तरह के आयोजनों से पूर्व सहयोग और उनके सुझाव भी लिए जाने चाहिए। यह आयोजन समिति के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते थे। मेला स्थाल की साफ.सफाई और सुरक्षा प्रबंधों पर भी खास ध्यान देने की जरूरत है।

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