वन-विभाग की नियुक्तियों में है झोलझाल, नाते-रिश्तेदारो से भरा विभाग

०० ज्योमैट्रिक सेंटर तथा जिला वनोपज संघ की एक-एक नियुक्ती संदेह के घेरे में

०० असिस्टेंट प्रोग्रामर की नियुक्ति में है गंभीर पेंच, आवेदकों के दस्तावेज कार्यालय में उपलब्ध नहीं 

बिलासपुर। वन मंडल बिलासपुर में दैनिक वेतन भोगी और संविदा नियुक्ति से नियमितीकरण का खेल लंबे अरसे से चल रहा है। ज्योमैट्रिक सेंटर तथा जिला वनोपज संघ की एक-एक नियुक्ती संदेह के घेरे में है। दीप प्रकाश साहू जो वर्तमान में सेंटर के प्रभारी है, वर्ष 2013 में असिस्टेंट प्रोग्रामर की हैसियत से भर्ती हुए, भर्ती के पहले किसी विभाग में दैनिक वेतन भोगी के रूप में कार्यरत थे वर्ष 2013 में असिस्टेंट प्रोग्रामर के पद पर भर्ती के लिए सूचना निकाली थी, भर्ती के वक्त जिन भी अन्य आवेदकों ने आवेदन पत्र जमा किया था उनके दस्तावेज वनमंडल कार्यालय में उपलब्ध नहीं है।

असिस्टेंट प्रोग्रामर के पद पर चयनित दीप साहू की योग्यता के समकक्ष योग्यता रखने वाले आवेदकों के रिकार्ड विशेष तरह से गायब किये गये है, इस संबंध में डीएफओ बिलासपुर को शिकायत हुई थी चूंकि सारा मामला डीएफओ और एक अन्य अधिकारी के संदर्भ में है अतः असिस्टेंट प्रोग्रामर पद पर भर्ती को क्लीन चीट दे दी मामला एक बार फिर सीसीएफ बिलासपुर के पास लंबित है, इसी तरह जिला वनोपज संघ में संदेश वाहक रविकांत कौशिक पिता जवाहर कौशिक 2008-2009 में दैवेभो के रूप में कार्यरत था जिसे एक कोर्ट आर्डर के आधार पर नियमित कर दिया गया जबकि संदेश वाहक ने न्यायालय में कभी कोई प्रकरण लगाया ही नहीं था दैनिक वेतन भोगी के पिता डीएफओ कार्यालय में डीएफओ के वाहन चालक है बहन रेंज में ही दैनिक वेतन भोगी के रूप में कार्यरत है वन विभाग में नातेदारी रिश्तेदारी पर यदि शोध हो जाए तो पता चलेगा कि बिना प्रतियोगी परीक्षा के जितने भी पदों पर नियुक्तियां होगी उनमें आवेदक की एक ही योग्यता पर्याप्त है वह है रिश्तेदारी।

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