आखिर जिला कांग्रेस को क्यों नहीं मिलता व्यापारिक संगठनों का समर्थन

०० कहीं वर्तमान पदाधिकारियों का व्यवहार ही कारण तो नहीं

बिलासपुर| शिक्षाकर्मी आंदोलन में आंदोलनरत शिक्षा कर्मियों को धरना स्थल पर जाकर समर्थन देने वाले कांग्रेस ने जब 5 दिसंबर को प्रदेश बंद का एलान किया और 4/5 की दरमियानी रात्री को ही हड़ताल समाप्त हो गई, इस स्थिति से बिलासपुर जिला कांग्रेस कमेटी अभी तक नहीं उबर पाई कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व ने एक बिल्डर को शायद यह सोचकर महामंत्री बनाया है कि उनका व्यापारिक संगठनों से बेहतर तालमेल होगा ? पर हो उससे विपरीत हो रहा है, इसी वर्ष कांग्रेस ने दो बार बंद का एलान किया एक बंद स्थानीय था दूसरा प्रदेश व्यापी था किंतु दोनों ही बंद को व्यापारिक संगठनों का समर्थन प्राप्त नहीं हुआ। पार्टी को आगामी 2018 के  विधानसभा चुनाव के पूर्व अपनी रीति नीति को एक बार पुननिर्रीक्षण करना होगा  क्योंकी बिना सामाजिक संगठनों की सहायता से किसी भी राजनीतिक पार्टी के लिए राजनीति करना कठिन हो जाता है, कांग्रेस की राजनीति के जानकार बताते है की जिला स्तर पर कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी सदा सभी व्यापारिक संगठनों को साथ लेकर चलते थे, फिर चाहे प्रदेश में पार्टी सत्ता में रहे या विपक्ष में छ.ग. बनने के बाद भी यह परंपरा जारी रही और जिला स्तर पर कांग्रेस को व्यापारिक संगठनों का समर्थन हासिल होता रहा, किंतु पिछले दो वर्षों से यह स्थिति बदली हुई हैं।वर्तमान में प्रदेश स्तर एवं जिला स्तर पर कांग्रेस पार्टी विभिन्न मामलों को लेकर लगातार आंदोलनरत है, जिला प्रशासन तथा नगर निगम की नीतियों के कारण व्यापारी वैसे भी व्यापार नहीं कर पा रहें है शहर में अधोसंरचना की स्थिति वैसे भी इतनी दयनीय है की मेन रोड के व्यापारी व्यापार नही कर पाते अभी तक विभिन्न मार्गों के फुटकर व्यापारियों को तीन से ज्यादा बार हटाया जा चुका है  जिला कांग्रेस को उन कारणों को समझना ही होगा जिनके चलते व्यापारी पार्टी को समर्थन नहीं देते कुछ व्यापारियों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि पार्टी के एक पदाधिकारी और उसके समर्थक आए दिन सड़क छाप गुंडागर्दी में शामिल होते हैं व्यापारियों से तीज त्यौहार के नाम पर पैसे का दबाव बनाया जाता है अधिकतर कार्यक्रम वैसे होते है जिनका सामाजिक रीतिरिवाज से कोई संबंध नहीं  होता एैसे में कम से कम जब तक इन नेताओं के पास पार्टी की कमान है हम समर्थन न करना बेहतर मानते हैं।

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