राज्य सरकार फटाकों पर लगाए प्रतिबन्ध वापस ले और जनता को “खूनी फैक्ट्रियों” से निजात दिलाये : अमित जोगी   

०० बढ़ते प्रदूषण का मूल कारण प्रदेश भर में सरकारी संरक्षण में चल रहे खूनी उद्योग

००  आम नागरिकों की शादियों में फोड़े जाने वाले फटाके नहीं: अमित जोगी

०० जांजगीर चांपा में संचालित कृष्णा इंडस्ट्रीज में प्रदूषण की वजह से अब तक 3 मजदूरों की मौत 

रायपुर| मरवाही विधायक अमित जोगी ने आज मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह को पत्र लिख कर प्रदूषण पर रोकथाम के नाम पर राज्य सरकार द्वारा फटाकों पर लगाए गए प्रतिबन्ध पर सवाल उठाये हैं साथ ही जनता को प्रदूषण के मूल कारण “खूनी फैक्ट्रियों” से निजात दिलाने की मांग करी है। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में अमित जोगी ने लिखा है कि गत दिनों छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए छत्तीसगढ़ के कुछ शहरों में आगामी 2 महीनों के लिए फटाकों पर प्रतिबन्ध लगाया गया है। राज्यसरकार द्वारा प्रदेश में बढ़ते प्रदूषण पर एकाएक गंभीर दिखना सराहनीय हो सकता है लेकिन केवल फटाकों पर प्रतिबन्ध लगाकर मूल कारणों पर ध्यान नहीं देना कहीं से भीन्यायसंगत नहीं है।

 

विधायक अमित जोगी ने कहा कि प्रदेश में ऐसे बहुत से उद्योग हैं जो भारी मात्रा में प्रदूषण फैला रहे हैं। कोरबा, जांजगीर – चांपा, रायगढ़, बिलासपुर, सिलतरा, उरला (रायपुर) में ऐसे बहुत सी “ख़ूनी फैक्टरियाँ” हैं जो काला धुआं और अन्य दूषित पदार्थ वातावरण में छोड़कर लोगों को जहरीली हवा में सांस लेने और ज़हरीला पानी पीने को मजबूर कर रहे हैं। यही हाल बस्तर का है जहाँप्रदूषित जल की वजह से लोग लाल पानी पीने को विवश हैं। आज भी केंद्रीय जल संसाधन विभाग (NEERI) के अनुसार दक्षिण बस्तर के 73% पेयजल स्रोत अमानक हैं। ऐसेप्रदूषित माहौल की वजह से लोग अनेकों रोगों से ग्रसित हो रहे हैं जिस वजह से उनकी असमय मौत भी हो रही है। पत्र में आगे अमित जोगी ने जांजगीर चांपा के ग्राम बेहराडीह में संचालित कृष्णा इंडस्ट्रीज का जिक्र करते हुए लिखा है कि इस फैक्ट्री में पत्थर पिसाई का काम होता है जिससेअत्यधिक धूल उड़ती है और ऐसे प्रदूषित माहोल में मजदूरों को काम करना पड़ता है। वहां पर काम करने  वाली एक महिला गंगोत्री कँवर (40 वर्ष) को इसी प्रदूषितवातावरण के कारण खांसी और सांस लेने में भयंकर तकलीफ उत्पन्न हो गयी और सिलिकोसिस बीमारी से ग्रसित हो जाने के कारण अभी कुछ ही दिन पहले उनकी मृत्यु होगयी। इसी फैक्ट्री में काम करने वाली श्रीमती गायत्री मन्नेवार की भी 2 वर्ष पहले सिलिकोसिस बीमारी की वजह से मौत हो गयी थी। इसी फैक्ट्री में कार्यरत एक अन्य मजदूररामकुमार यादव को भी सिलिकोसिस हो जाने की वजह से अपने प्राण गँवाने पड़े थे। इन तीन मौतों के अलावा बेहराडीह निवासी रामकृष्ण यादव (43 वर्ष) और बजरंग यादव(29 वर्ष) भी सिलिकोसिस रोग से ग्रसित हो चुके हैं। मतलब साफ़ है – कृष्णा इंडस्ट्रीज अपने द्वारा फैलाये जा रहे प्रदूषण की वजह से अपने यहाँ कार्यरत मजदूरों को असमयकाल का ग्रास बना रहा है। इस खूनी फैक्ट्री के प्रबंधन का एकमात्र उद्देश्य सिर्फ पैसे कमाना है उसकी नज़रों में लोगों की जानों की कोई कीमत ही नहीं है।

 

इतना सब कुछ होने के बाद भी राज्य सरकार मूकदर्शक बन कर बैठी है और कृष्णा इंडस्ट्रीज जैसे प्रदेश के सैकड़ों प्रदूषण फैलाने वाले हत्यारे-उद्योगों पर पूरी उदारता दिखारही है। अमित जोगी ने पत्र में मुख्यमंत्री से यह सवाल किया है कि राज्य सरकार द्वारा इस पूरे विषय में इतना नर्म रूख अख्तियार करने के पीछे आखिर क्या वजह है? छत्तीसगढ़ की जनता आपसे यह जानना चाहती है। फटाकों पर लगाए गए प्रतिबन्ध पर अमित जोगी ने लिखा है कि दिसंबर और जनवरी जिन दो महीनों के लिए कुछ शहरों में फटाके प्रतिबंधित किये हैं, इन्ही दो महीनों में बहुतसे शादी – ब्याह होने हैं। शादी होना वर और वधु दोनों परिवारों के लिए बहुत ही हर्ष का समय रहता है और इनके साथ ही इस ख़ुशी में बहुत से अन्य परिवार भी सम्मलितरहते हैं। जाहिर हैं ऐसे ख़ुशी के मौके पर वे फटाके फोड़ते हैं। सरकार द्वारा ऐसे समय में फटाके प्रतिबंधित करना उनकी भावनाओं पर कुठाराघात है जो सरकार का बेहद हीतानाशाही रवैया दर्शाता है। इस निर्णय से ऐसे बहुत से फुटकर विक्रेता जिनके जीवनयापन का साधन फाटकों की बिक्री ही है उनके घरों में भी रोजी रोटी का संकट पैदा होगया है। अंत में जोगी ने मुख्यमंत्री से निवेदन किया है है कि प्रदेश में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए सभी उद्योगों का निरिक्षण और प्रभावितों की पुनः जन सुनवाई करवाई जाए औरजिन उद्योगों द्वारा प्रदूषण फैलाया जा रहा है उनकी उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए। जब तक इन उद्योगों की जांच पूरी नहीं होती तब तक ऐसे उद्योगों विशेषकर कृष्णाइंडस्ट्रीज में उत्पादन बंद रखा जाए। साथ ही पूरे मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए फटाकों पर लगाए गए प्रतिबन्ध का निर्णय वापस लिया जाए।

 

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