छत्तीसगढ़ में नदियों को जोड़ने की तैयारी हुई प्रारंभ : बृजमोहन अग्रवाल

०० कृषि और जल संसाधन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने दी विभागीय उपलब्धियों की जानकारी

०० खेती-किसानी के लिए 1500 करोड़ रूपए की चिरागपरियोजना का प्रस्ताव

०० राज्य के चार लाख किसान परिवार और 50 हजार युवा जुड़ेंगे चिरागपरियोजना से

०० प्रदेश की सिंचाई क्षमता में सात गुना वृद्धि, नदी-नालों में बनाये गए 651 स्टाप डेम

०० अभियान चलाकर तीन वृहद, छह मध्यम और 440 लघु सिंचाई योजनाओं का निर्माण पूर्ण किया गया

रायपुर| जल संसाधन विभाग ने सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए छत्तीसगढ़ में नदियों को आपस में जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। कृषि और जल संसाधन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने आज यहां बताया कि इसके लिए इंटर लिकिंग परियोजना बनाई गई है और सर्वेक्षण करवाया जा रहा है। इनमें महानदी-तांदुला, पैरी-महानदी, रेहर, अटेम, अहिरन-खारंग और हसदेव-केवई इंटरलिकिंग परियोजना शामिल हैं। श्री अग्रवाल ने बताया कि इन नदियों में निर्मित सिंचाई बांधों में जब शत-प्रतिशत जल भराव हो जाएगा तो उसके बाद वहां के अतिरिक्त पानी का समुचित उपयोग करने के लिए यह परियोजना तैयार की गई है।
अग्रवाल आज यहां अपने विभागों ( जल संसाधन, कृषि, पशुपालन, मछलीपालन और धर्मस्व) की 14 वर्ष की उपलब्धियों की जानकारी दे रहे थे। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश के किसानों की आमदनी वर्ष 2022 तक दोगुनी करने का जो लक्ष्य निर्धारित किया गया है, उसे पूर्ण करने के लिए छत्तीसगढ़ में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करते हुए खेती-किसानी के लिए कई बेहतरीन योजनाएं शुरू की गई हैं। इनमें राज्य शासन द्वारा प्रस्तावित चिराग योजना भी शामिल है। उन्होंने यह भी बताया कि चिराग योजना के लिए 1500 करोड़ रूपए का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके लिए विश्व बैंक से सहायता ली जाएगी। इस योजना में लगभग चार लाख किसान परिवारों को जोड़ा जाएगा। उनके उत्पादन समूह बनाए जाएंगे और लगभग छह हजार कृषि उद्यमों की स्थापना की जाएगी। करीब 50 हजार युवाओं को भी चिराग योजना से जोड़कर उन्हें खेती-किसानी से संबंधित कौशल उन्नयन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह की सरकार इस महीने की सात तारीख को 14 वर्ष पूर्ण कर 15वें वर्ष में और 12 दिसम्बर को तीसरी पारी के चार वर्ष पूर्ण कर पांचवे वर्ष में प्रवेश करने जा रही है। मंत्रिपरिषद में लिए गए निर्णय के अनुसार इस उपलक्ष्य में सभी विभागों के मंत्रिगण पत्रकार वार्ता लेकर मीडिया को अपने-अपने विभागों की 14 साल की उपलब्धियों की जानकारी दे रहे हैं।      इसी कड़ी में श्री बृजमोहन अग्रवाल ने आज पत्रकार वार्ता में मीडिया को इन उपलब्धियों की जानकारी दी। उनके साथ कृषि विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री अजय सिंह , जल संसाधन विभाग के सचिव श्री सोनमणि बोरा,  विभाग के प्रमुख अभियंता श्री एच.आर कुटारे, कृषि विभाग के संचालक श्री एम.एस. केरकेट्टा, मछली पालन विभाग के संचालक श्री व्ही.के. शुक्ला, इंदिरा गांधी कृषि विश्व विद्यालय के कुलपति डाॅ. एस.के. पाटिल और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।बृजमोहन अग्रवाल ने बताया – मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह ने प्रदेश के किसानों के व्यापक हित में सिंचाई सुविधाओं के विकास और विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उनके नेतृत्व में राज्य सरकार ने 14 साल में जल संसाधन विभाग का बजट 493 करोड़ 90 लाख रूपए से बढ़ाकर 3155 करोड़ रूपए कर दिया है। इस प्रकार विभाग के बजट में सात गुना वृद्धि हुई है। प्रदेश में अनेक स्वीकृत और निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं को अभियान चलाकर पूर्ण किया गया है। इसके फलस्वरूप राज्य की सिंचाई क्षमता 23 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत हो गई है। अब तक 20 लाख 59 हजार हेक्टेयर में सिंचाई क्षमता निर्मित की जा चुकी है। श्री अग्रवाल ने बताया कि 14 वर्ष की इस विकास यात्रा में तीन वृहद सिंचाई योजनाओं को पूर्ण किया गया है, जिनमें महानदी परियोजना समूह, मिनीमाता (हसदेव) बांगो परियोजना और जांेक व्यपवर्तन परियोजना शामिल हैं। इसी तरह छह मध्यम सिंचाई योजनाओं – कोसारटेडा, खरखरा मोहदीपाट, सुतियापाट जलाशय परियोजना, कर्रानाला बैराज, अपर जोंक परियोजना और मांड व्यपवर्तन परियोजना का भी निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि – नदी-नालों में 440 लघु सिंचाई योजनाओं और 651 एनीकटों तथा स्टाप डेमों का भी निर्माण किया गया है। उन्होंने बताया कि इन सिंचाई योजनाओं के जरिये किसानों को खेती के लिए पानी उपलब्ध कराने के साथ-साथ भू-जल स्तर बढ़ाने और निस्तारी सुविधा में भी मदद मिल रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में चार वृहद सिंचाई परियोजनाएं निर्माणाधीन है, जिनमें सोंढूर, अरपा-भैंसाछार, केलो और राजीव समोदा-निसदा व्यपवर्तन योजना शामिल हैं। मध्यम सिंचाई योजनाओं के तहत मोंगरा बैराज, सूखा नाला बैराज और घुमरिया बैराज सहित लघु सिंचाई योजनाओं के तहत 418 प्रोजेक्ट और 157 एनीकट तथा स्टापडेम निर्माणाधीन है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में राज्य की तीन योजनाएं शामिल :- अग्रवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत केन्द्र सरकार ने पूरे देश में जिन 99 योजनाआंे को चिन्हांकित किया है, उनमें छत्तीसगढ़ की तीन सिंचाई परियोजनाएं – केलो, खारंग और मनियारी भी शामिल हैं। इन तीनों योजनाओं का निर्माण पूर्ण होने पर 42 हजार 625 हेक्टेयर के अतिरिक्त रकबे में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा। राज्य सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष 2017-18 के नवीन बजट में इन योजनाओं को फास्टट्रेक में शामिल कर दो करोड़ रूपए का प्रावधान किया है।
कृषि विभाग के बजट में 926 प्रतिशत की वृद्धि :- कृषि विभाग की उपलब्धियों का ब्यौरा देते हुए श्री बृजमोहन अग्रवाल ने बताया कि विगत 14 वर्ष में केन्द्र सरकार से राज्य को चार कृषिकर्मण पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। इनमें से तीन पुरस्कार चावल उत्पादन पर और एक पुरस्कार दलहन उत्पादन पर मिला है। श्री अग्रवाल ने बताया कि विगत 14 वर्ष में कृषि विभाग का बजट लगभग 184 करोड़ रूपए से बढ़कर वर्तमान में 1887 करोड़ 64 लाख रूपए हो गया है, जो वर्ष 2003-04 की तुलना में 926 प्रतिशत ज्यादा है। विगत 14 वर्ष में राज्य में धान के उत्पादन में 47 प्रतिशत, तिलहन के उत्पादन में 158 प्रतिशत और दलहन के उत्पादन में 43 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
फसलों के उन्नत बीज उत्पादन में छत्तीसगढ़ अब आत्मनिर्भर :- कृषि मंत्री ने बताया कि विभिन्न फसलों के उन्नत बीज उत्पादन में भी छत्तीसगढ़ 14 साल में आत्मनिर्भर हो गया है। इस अवधि में राज्य में उन्नत बीजों का उत्पादन 44 हजार 400 क्विंटल से बढ़कर वर्ष 2016-17 तक दस लाख 50 हजार क्विंटल अर्थात् 23 गुना हो गया है। बीजों के भंडारण की क्षमता बढ़ाने के लिए भी कृषि विभाग ने शानदार काम किया है। उन्होंने बताया कि 14 साल पहले राज्य में केवल 12 गोदम थे, जिनकी भंडारण क्षमता सिर्फ सात हजार 500 मीटरिक टन थी। विभाग ने अभियान चलाकर 103 गोदामों का निर्माण किया, जिन्हें मिलाकर भंडारण क्षमता 81 हजार 650 मीटरिक टन हो गई है।
मिट्टी परीक्षण और स्वायल हेल्थ कार्ड वितरण में छत्तीसगढ़ पहले नम्बर पर :- कृषि मंत्री ने बताया कि खेतों की मिट्टी की सेहत की जांच के लिए चल रही स्वायल हेल्थ कार्ड योजना में छत्तीसगढ़ पूरे देश में पहले नम्बर पर है। राज्य में इस योजना के प्रथम चरण में विगत दो वर्ष में 46 लाख स्वायल हेल्थ कार्ड किसानों को दिए जा चुके हैं। राज्य में वर्ष 2015-16 में अल्प वर्षा के दौरान किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत लगभग 700 करोड़ रूपए के बीमा राशि का भुगतान किया गया है। श्री अग्रवाल ने यह भी बताया कि कृषि विभाग ने जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य के पांच जिलों को शत-प्रतिशत जैविक कृषि जिला और 22 विकासखंडों को जैविक कृषि विकासखंड बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि उद्यानिकी फसलों के रकबे में 404 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और उत्पादन 14 लाख 16 हजार मीटरिक टन से बढ़कर 98 लाख 34 हजार मीटरिक टन तक पहुंच गया है।
फलों की खेती का भी हुआ विस्तार :- अग्रवाल ने बताया – प्रदेश में फलों की खेती का रकबा भी इस दौरान 580 प्रतिशत बढ़ा है। वर्ष 2003-04 में यह रकबा लगभग 37 हजार हेक्टेयर था, जो आज की स्थिति में बढ़कर दो लाख 50 हजार हेक्टेयर से ज्यादा हो गया है और फलों के उत्पादन में 875 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। राज्य में फल उत्पादन दो लाख 54 हजार मीटरिक टन से बढ़कर 24 लाख 77 हजार मीटरिक टन तक पहुंच गया है। सब्जियों की खेती के रकबे में 359 प्रतिशत, फूलों की खेती के रकबे में 914 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।कृषि मंत्री ने बताया कि मछली बीजों के उत्पादन में छत्तीसगढ़ देश में छठवें स्थान पर है। वर्ष 2003-04 में राज्य में 33 हैचरी और 27 मत्स्यप्रक्षेत्र थे, जिनमें 36 करोड़ 78 लाख फ्राई मत्स्य बीजों का उत्पादन होता था। अभियान चलाकर इसे बढ़ाया गया। इसके फलस्वरूप राज्य में मत्स्य बीज उत्पादन 197 करोड़ स्टैंडर्ड फ्राई तक पहुंच गया। इस अवधि में हैचरियों की संख्या 33 से बढ़कर 69 और मत्स्य प्रक्षेत्रों की संख्या 27 से बढ़कर 60 हो गई।
खेती-किसानी की शिक्षा को भरपूर प्रोत्साहन :- अग्रवाल ने बताया कि राज्य में खेती-किसानी की शिक्षा को भरपूर प्रोत्साहन मिल रहा है। वर्ष 2003-04 में सिर्फ चार कृषि महाविद्यालय थे, जिनकी संख्या आज बढ़कर 32 हो गई है। कृषि से संबंधित विषयों में प्रवेश के लिए विद्यार्थियों में काफी रूझान देखा जा रहा है। प्रवेश क्षमता 1015 से बढ़कर 2800 हो गई है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में 35 अनुसंधान परियोजनाएं चल रही हैं। कृषि विज्ञान केन्द्रों की संख्या चार से बढ़कर 23 तक पहुंच गई है।

 

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