राज्य में चौदह वर्षों में नगरीय निकायों की माली हालत हुई काफी मजबूत : अमर अग्रवाल

०० उद्योग स्थापना और निवेश के लिए छत्तीसगढ़ में अनुकूल वातावरण

रायपुर| वाणिज्य एवं उद्योग तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने आज यहां आयोजित प्रेसवार्ता में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में राज्य सरकार के चौदह साल पूर्ण होने पर विभागीय उपलब्धियों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि इस दौरान नगरीय निकायों की माली हालात काफी मजबूत हुई है। वर्ष 2003-2004 में जहां नगरीय निकायों में कर्मचारियों को नियमित रूप से वेतन देने में दिक्कत हो रही थी। यह स्थिति आज समाप्त हो गई है। श्री अग्रवाल ने बताया कि एक हजार करोड़ रूपए से ज्यादा राशि आज विकास कार्यों के लिए निकायों में जमा है। उद्योग स्थापना और निवेश के लिए भी राज्य में उत्साहजनक वातावरण का निर्माण हुआ है। छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक-निजी सहभागिता से रेल सुविधाओं के विकास की नई पहल की गई है। आजादी के बाद अब तक राज्य में केवल 1196 किलोमीटर रेल लाईन का विस्तार हुआ है जबकि डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में नई पहल करते हुए सार्वजनिक-निजी सहभागिता (पीपीपी) के आधार पर अगले पांच साल में 1310 किलोमीटर नई रेल लाईन बिछाई जाएगी।
श्री अमर अग्रवाल ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2003-042004 में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग का बजट केवल 331 करोड़ था जो वर्ष 2017-18 में बढ़कर 2 हजार 975 करोड़ रूपए का हो गया है। उन्होंनें कहा कि राज्य के समस्त 168 नगरीय निकाय भारत सरकार द्वारा खुले में शौचमुक्त (व्क्थ्) घोषित किए जा चुके हैं। भारत सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य से दो वर्ष पहले  मुख्यमंत्री जी द्वारा दिये गए लक्ष्य 02 अक्टूबर 2017 के अंतर्गत सभी निकाय खुले में शौचमुक्त घोषित किए जा चुके हैं।। भारत सरकार द्वारा नियुक्त स्वतंत्र एजेंसी द्वारा निरीक्षण उपरान्त निकायों को ओडीएफ घोषित करने की अनुशंसा की गई है। योजना के अंतर्गत कुल 540 करोड़ की लागत से 3 लाख 51 निजी शौचालयों का निर्माण किया गया है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में लोगों को सुविधाजनक तरीके से आने-जाने की व्यवस्था के लिए सिटी बस परियोजना का संचालन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसके प्रथम चरण में वर्ष 2012 में नगर निगम रायपुर द्वारा 14 करोड़ 85 लाख की लागत से 100 सिटी बसों का संचालन शुरू किया गया। द्वितीय चरण में राज्य शासन द्वारा प्रदेशवासियों को अत्याधुनिक, आरामदेह एवं किफायती सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रदान करने हेतु 148 करोड़ 42 लाख की लागत से 75 शहरों को 22 कलस्टरों में विभाजित कर 378 सिटी बसों का संचालन 140 रूटों पर किया जा रहा है। प्रतिवर्ष औसतन ढाई करोड़ करोड़ यात्रियों द्वारा सिटी बस से यात्रा की जा रही है। दीनदयाल अंत्योदय योजना के अंतर्गत 19 हजार 144 महिला स्वसहायता समूहों तथा 116 क्षेत्र स्तरीय समूहों का गठन किया गया है।
नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अग्रवाल ने बताया कि नागरिकों को पारदर्शिता सेे निर्धारित समय-सीमा में भवन अनुज्ञा प्रदान करने के लिए विभाग द्वारा ’’ऑनलाईन भवन अनुज्ञा परियोजना’’ प्रारंभ की गई है। जिसमें प्रदेश के 10 बड़े शहर यथा रायपुर, बिलासपुर, भिलाई, कोरबा, राजनांदगांव, दुर्ग, रायगढ़, जगदलपुर, अंबिकापुर एवं चिरमिरी सम्मिलित है। पूर्व में प्रकरण स्वीकृति में औसतन 70 से 100 दिनों का समय लगता था, जो अब परियोजना क्रियान्वयन उपरान्त 20 से 40 दिवस के मध्य सीमित हो गया है। अब तक 15 हजार 848 प्रकरण ऑनलाईन स्वीकृत किये गए है एवं पेमेन्ट गेटवे के माध्यम से लगभग राशि रू. 11करोड़ भवन अनुज्ञा शुल्क जमा कराया गया है। इस रिफार्म को वर्ल्ड बैंक द्वारा बेस्ट प्रेक्टिस का दर्जा प्रदान किया गया है, जिसके फलस्वरूप ईज ऑफ र्डूइंग बिजनेस  में प्रदेश को देश में चौथा स्थान प्राप्त हुआ है।  
स्मार्ट सिटी परियोजना में तीन शहरों का चयन -श्री अमर अग्रवाल ने कहा कि  कहा कि भारत सरकार द्वारा रायपुर, बिलासपुर एवं नया रायपुर स्मार्ट सिटी हेतु चयनित किए गए हैं। रायपुर हेतु 3939 करोड़ एवं बिलासपुर हेतु 3960 करोड़ की योजना स्वीकृत भी हो चुकी है। राज्य सरकार द्वारा स्थानीय संसाधनों का समुचित उपयोग कर नगर निगम भिलाई को सुपर स्मार्ट सिटी, कोरबा को सुप्रीम स्मार्ट सिटी तथा राजनांदगांव को प्रीमियम स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की अभिनव पहल की गई है। प्रदेश के नगरीय निकायों में मिशन अन्तर्गत वर्ष 2022 तक अनुमानित 4 लाख पक्के आवासगृहों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 226 परियोजनाओं में 59 हजार 286 आवास हेतु कुल राशि रू. 2538 करोड़  की स्वीकृति भी दी जा चुकी है।
मिशन क्लीन सिटी – सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के क्षेत्र में अंबिकापुर द्वारा रिसाईकिल किये जाने योग्य पृथकीकरण आधारित योजना स्वसहायता समूहों के माध्यम से प्रारंभ की गई, जो कि देश में एक इनोवेटिव्ह प्रेक्टिस के रूप में प्रख्यात हुई। प्रदेश के 165 नगरीय निकायों में इसी आधार पर मिशन क्लीन सिटी योजना प्रारंभ की गई। स्वसहायता समूहों की 8154 महिलाओं को उनके शहर में ही रोजगार के नवीन अवसर प्राप्त हों रहे है। प्रदेश के नगरीय निकायों में उर्जा की बचत के दृष्टिकोण से मार्ग प्रकाश व्यवस्था हेतु लगायी गई 3 लाख 19 हजार 48 परंपरागत लाईटों को एलईडी लाईटों में परिवर्तन किया जाना है। अब तक  1 लाख 12 हजार 832 एल.ई.डी. लाईटे लगायी जा चुकी है। प्रदेश के नगरीय निकायों में नागरिकों को कम दर पर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 290 वॉटर ए.टी.एम. स्थापित किये जाने का कार्य प्रगतिरत है, जिसमें 11 स्थानों पर वॉटर ए.टी.एम. स्थापित किया जाकर जल प्रदाय प्रारंभ हो चुका है।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग की स्थापना
श्री अमर अग्रवाल ने राज्य में पिछले 14 वर्षों में औद्योगिक विकास की जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में 14 हजार 976 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों की स्थापना की गई। इसमें 3771 करोड रुपए का पंूजी निवेश हुआ। एमएसएमई सेक्टर में लगभग डेढ़ लाख लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत 19 लाख 85 हजार खातों में 7 हजार 179 करोड़ रुपए का ऋण वितरण किया गया। स्टैण्ड अप योजना के तहत अनूसूचित जाति, जनजाति एवं महिलाओं के 848 प्रकरणों में 111 करोड़ 41 लाख रुपए का ऋण वितरित किया गया।
रेल अधोसंरचनाओं का विकास – मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि रेल परियोजनाओं के विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा अभिनव पहल की गई। रेल बजट के स्थान पर पीपीपी मॉडल से रेल लाईन विकास की शुरूआत हुई। राज्य मंे वर्तमान में रेल लाईन की कुल लम्बाई 1196 किलोमीटर है। मुख्यमंत्री जी की नई सोच से आने वाले पांच साल में राज्य मंे 1310 किलोमीटर नई रेल लाईन बिछाई जाएगी। यात्री गाड़ियों के संचालन के साथ ही कोयला और लौह अयस्क परिवहन में सुविधा होगी।

औद्योगिक पार्क की स्थापना – राज्य में 2004 से लेकर अब तक 20 नए औद्योगिक क्षेत्र स्थापित किए गए हैं।। इनमें विशिष्ट औद्योगिक पार्क जैसे इंजीनियरिंग पार्क हथखोज (दुर्ग) और मेटल पार्क रावांभाठा शामिल हैं। ग्राम बगौद (जिला धमतरी) में 45 करोड़ रुपए की लागत से लगभग 69 हेक्टेयर भूमि पर फूड पार्क स्थापित। नया रायपुर में  100 एकड़ भूमि पर 135 करोड़ रुपए की लागत से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी उद्योग एवं व्यापार परिसर और 28 हेक्टेयर भूमि पर 90 करोड़ रुपए की लागत से इलेक्ट्रानिक मेन्यूफेक्चरिंग क्लस्टर की स्थापना का कार्य प्रगति पर है। राजधानी रायपुर, भिलाई और राजनांदगांव में एपेरल ट्रेनिंग एण्ड डिजाईन सेन्टर स्थापित की गई है। प्लास्टिक उद्योग में युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिए रायपुर में सीपेट (सेन्ट्रल इन्स्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नालॉजी) की स्थापना की गई है।

बस्तर और सरगुजा का औद्योगिक विकास – बस्तर और सरगुजा के औद्योगिक विकास के लिए राज्य सरकार का विशेष प्रयास किए गए हैं। बस्तर में फिलहाल 24 हजार 826 करोड़ की परियोजनाओं पर कार्य प्रारंभ हो चुका है। नगरनार में एनएमडीसी के 2 मिलीयन टन पेलेट प्लाण्ट के लिए 4000 करोड़ की परियोजना निर्माणाधीन है। वर्ष 2018 में इसके उत्पादन शुरू होने की संभावना है। रावघाट-जगदलपुर रेलवे परियोजना भी निर्माणाधीन है। बस्तर में 18 हजार करोड़ के पंूजी निवेश से स्लरी पाईप लाईन परियोजना निर्माणाधीन। बीएमएस स्टार्च प्राईवेट लिमिटेड द्वारा 105 करोड़ के पंूजी निवेश से मक्का प्रसंस्करण उद्योग की स्थापना पूर्णता की ओर है। दंतेवाड़ा के टेकनार सहित सरगुजा में चार औद्योगिक क्षेत्र स्थापित किए गए हैं। सरगुजा के सभी विकासखण्डों को औद्योगिक स्थापना की दृष्टि से पिछड़ा क्षेत्र घोषित किया गया है।
निर्यात में भारी वृद्धि – श्री अग्रवाल ने प्रेसवार्ता में बताया कि राज्य से वर्ष 2003-04 में लगभग एक हजार 60 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ था। जो कि बढ़कर अब 2014-15 में 7 हजार 230 करोड़ रुपए का हो गया है। निर्यात मुख्य रूप से चावल,एल्यूमिनियम, आयरन एवं स्टील एवं इससे बने उत्पाद का होता है। राज्य सरकार के उद्योग विभाग का बजट वर्ष 2003-04 मंे मात्र 19 करोड़ 14 लाख रुपए का था जो कि वर्ष 2017-18 में बढ़कर 295 करोड़ रुपए का हो गया है। इस अवधि में 714 करोड़ रुपए का अनुदान विभिन्न उद्योगों को वितरित किया गया है। ईज ऑफ डूईंग बिजनेस – ईज ऑफ डूईंग बिजनेस के अंतर्गत वर्ष 2015 और 2016 में लगातार पूरे देश में चतुर्थ स्थान पर आया है। वर्ष 2017 में 21 विभागों एवं संस्थाओं से संबंधित 372 बिन्दुओं पर सुधार कार्य प्रारंभ।
स्टार्ट अप छत्तीसगढ़ – स्टार्ट अप इण्डिया की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए स्टार्ट अप छत्तीसगढ़ प्रारंभ। युवाओं को नवाचार के लिए प्रेरित करने के लिए सभी जिलों मंे कार्यशाला आयोजित। लगभग 3000 नवाचार के प्रस्ताव मिले। इनमें से 36 नवाचार को भारत सरकार की मदद से आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है। फर्म एवं संस्थाओं का पंजीयन पिछले 14 साल में 13 हजार 889 फर्म एवं 70 हजार 56 समितियों का पंजीयन किया गया। राज्य शासन को इससे 107 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है।

 

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