भू-जल स्तर का मापन और रासायनिक विश्लेषण का कार्य गुणवत्ता के साथ किया जाए : बोरा

०० भू-जल स्तर और सिंचाई क्षमता बढ़ाने विशेष कार्य योजना पर जोर

०० रियल टाईम टेलीमेट्री भू-जल मापन के संबंध में सचिव जल संसाधन श्री बोरा ने ली बैठक

रायपुर| जल संसाधन विभाग के सचिव श्री सोनमणि बोरा ने आज यहां मंत्रालय (महानदी भवन) में केन्द्रीय भू-जल बोर्ड क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर के अधिकारियों और राज्य जल ग्रहण क्षेत्र ऐजेंसी के अधिकारियों की बैठक ली। श्री बोरा ने विभाग द्वारा प्रदेश के 12 विकासखण्डों में भू-जल स्तर मापन और भू-जल स्तर के व्यवहार अध्ययन की समीक्षा की। उन्होंने बैठक में उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दिए कि भू-जल स्तर का मापन और रासायनिक विश्लेषण का कार्य गुणवत्ता के साथ किया जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भू-जल स्तर के अध्ययन एवं सर्वेक्षण में अधिक समय लगने के कारण त्वरित निर्णय लेने में कठिनाई होती है। इसलिए भू-जल मापन के लिए रियल टाईम मॉनिटरिंग टेलीमेट्री लगायी जाए। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2020-21 तक प्रदेश के लगभग 97 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का भू-जल अध्ययन एवं सर्वेक्षण का लक्ष्य केन्द्रीय भू-जल बोर्ड को दिया गया है। श्री बोरा ने वर्ष 2018 तक 45 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का भू-जल अध्ययन एवं सर्वेक्षण का कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।

बैठक में श्री बोरा ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत प्रदेश में हर खेत को पानी उपलब्ध कराने के लिए भू-जल स्तर और सिंचाई क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। इसके लिए केन्द्रीय भू-जल बोर्ड की सर्वे प्रतिवेदन के आधार पर कार्य योजना तैयार करने के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए। श्री बोरा ने कृषि फसलों की सिंचाई के लिए सिंचाई जलाशयों के अलावा ट्यूबवेल, कुंओं आदि के उपयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सिंचाई के साथ-साथ पेयजल भी जरूरी है, इसलिए सतही जल और भू-जल का सही अनुपात में उपयोग होना चाहिए। बैठक में श्री बोरा ने केन्द्रीय भू-जल के अधिकारियों को सर्वे प्रतिवेदन की जानकारी तत्काल उपलब्ध कराने के लिए ऑनलाईन डाटा प्रणाली अपनाने, सर्वे के लिए उपयोग में लायी जा रही मशीनों की नियमित रूप से परीक्षण करने, भू-जल सर्वे में आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने और राज्य सरकार के जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का सहयोग लेने के भी निर्देश दिए।बैठक में केन्द्रीय भू-जल बोर्ड के प्रभारी निदेशक श्री ओ.एन. तिवारी ने प्रस्तुतिकरण के जरिये राज्य के 18 विकासखण्डों में 9297 हेक्टेयर क्षेत्र में किये गए भू-जल सर्वे की जानकारी दी। इन विकासखण्डों में गुरूर, धमतरी, कुरूद, धमधा, पाटन, दुर्ग, लैलूंगा, रायगढ़, बरमकेला, सारंगढ़, महासमुंद और बागबाहरा शामिल है। उन्होंने बताया कि गुरूर, धमतरी और बरमकेला में जल स्तर की स्थिति काफी गंभीर है, यहां भू-जल संवर्धन के तहत वाटर हार्वेस्टिंग, वाटर रिचार्ज के जरिये भू-जल स्तर बढ़ाने की जरूरत है। बैठक में प्रमुख अभियंता जल संसाधन श्री एच.आर. कुटारे सहित जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 

 

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