कंपनी के भ्रष्ट अधिकारी ने कमीशन की लालच में भू-माफिया से मिलाया हाथ

०० पंप आपरेटर ने लीज होल्डर कस्तूरी राव व भूमाफिया से मिलाकर किया जमीन का सौदा

०० पेट्रोल पंप की जमीन का हुआ करोडो में सौदा, पंप आपरेटर को कमीशन के रूप में मिला मोटी रकम 

बिलासपुर| शहर में केंद्र सरकार की सार्वजनिक क्षेत्र की जिस कंपनी को नागरिकों के हितों की रक्षा करनी थी, उसी कंपनी के एक अधिकारी ने भू-माफिया के साथ मिलकर पेट्रोल पंप की जमीन बेच दी, लिंक रोड का पेट्रोल पंप एचपी कंपनी का है यहां पंप आपरेटर मोहम्मद तारीक अफाक केवल आपरेटर ही है वास्तविक हक कंपनी का है। कंपनी के एक अधिकारी ने आपरेटर को साथ मिलाकर लीज होल्डर कस्तूरी राव का सौदा भू-माफिया से करा दिया और एक मोटी रकम कमीशन के रूप में खा लिया चलता हुआ पंप 6 टुकडो में बिक गया और कंपनी को हवा भी नहीं लगी हद तो तब हुई जब सभी पक्षों ने दिखावे के लिए कोर्ट में वाद प्रस्तुत किया वहां भी सभी पक्षों ने आपसी लेन-देन कर समझौता पत्र पेश कर दिया सूत्र बताते है की आपरेटर और कंपनी के भ्रष्ट अधिकारी को इस समझौते के एवज में करोडों की रकम प्राप्त हुई अब पंप का बंद होना कुछ ही दिन का खेल है।

नगर के रेलवे स्टेशन से शिव टाकिज चौक, पुराना बस स्टैंड चौक, अग्रसेन चौक से नेहरु चौक जाने वाले मार्ग पर स्थित एक मात्र पेट्रोल पंप है जो 1965 से संचालित है जिसकी चौहदी को षड्यंत्र कर छ: टुकडो में बेच दिया गया है| बिग बाजार के बाजू में स्थित एचपी का यह पेट्रोंल पंप बंद होने वाला है, वर्ष 2015 में लीज़ पर दी हुई इस संपत्ती को लीज़ होल्डर ने एचपी को ना बेच कर 6 अन्य लोगों को टुकड़ों में बेच दिया। जिससे नामांतरण हो जाने के बाद अब यह पंप हमेशा के लिए बंद हो सकता है। नेहरू चौक पर स्थित पेट्रोल पंप के बाद मंत्री महोदय के घर वाले मार्ग पर अग्रसेन चौक तक दाएं ओर यही एक पंप है पूर्व में सीएमडी चौक के बाद तारबहार थाने के पास एक पंप हुआ करता था। वह भी संपत्ती विवाद के फर्जी दस्तावेज बनवाने पर हुई शिकायत के कारण बंद हो गई। अब स्थिति यह है कि यदि कोई आम नागरिक रेल्वे स्टेशन से पेट्रोल के लिए तलाश शुरू करेगा तो उसे लिंक रोड ही आना पड़ेगा। 52 वर्ष पुराने इस पेट्रोल पंप पर भू-माफिया ने फन फैला दिया है।नजूल सीट नंबर 24 प्लाट नं. 8 के बटांकन में इस पेट्रोल पंप की जमीन पूर्व मंत्री अशोक राव के नाम दर्ज थी। 22 हजार 205 वर्ग फिट का यह भू-खंड सरकारी तौर पर 15 करोड़ 54 लाख कीमत का है। एचपी कंपनी का यह स्वयं का रिटेल आउटलेट है। जिसे कंपनी ने मोहम्मद तारिक नाम के व्यक्ति को संचालित करने के लिए दिया। अशोक राव की पत्नी कस्तुरी राव ने कंपनी के साथ हुए अनुबंध को एक तरफ रखते हुए इसे वर्ष 2016 में कपट पूर्ण तरिके से शहर के 6 लोगो को टुकड़ों में बेच दिया। पेट्रोल पंप की बिक्री की खबर न तो आपरेटर को लगी न ही कंपनी के उच्च अधिकारियों को, बिना लेआउट चलते हुए पेट्रोल पंप को कई टुकड़ों में बेचना कालोनाईजिंग एक्ट के खिलाफ है। रजिस्ट्री में मौके से विपरीत चौहद्दी बनाना आपराधिक कृत्य है। विक्रेता-क्रेता, दस्तावेज लेखक, नजूल, पटवारी एवं जिला पंजीयक के संरक्षण में यह सब काम बड़े आसानी से हो गया। छोटे-छोटे मकानों की रजिस्ट्री के बाद जिला पंजीयक उसे देखने जाता है किन्तु बीच शहर में 22,205 वर्ग फिट भूमि 6 टुकड़ों में बिकी जिसका पंजीयन जिला पंजीयक के यहां नही भारतीय जनता पार्टी से जुड़े एक नेता के घर पर हुआ और पंजीयक इसे देखने नही गया। पंजीयन उपरान्त भूमि के सभी टुकड़े नजूल अधिकारी के कोर्ट में नए क्रेताओं के नाम चढ़ गए, तब भी आरआई ने स्थल पर पेट्रोल पंप संचालित है कि रिपोर्ट नही दी, और लंबी धन राशि खा कर नामांतरण किया। वर्ष 2016 से शहर के बीचों बिच एक पेट्रोल पंप चल रहा है जिसे एचपी कंपनी संचालित करती है। भूमि 6 टुकड़ों में अन्य के नाम से इन 6 व्यक्तियों का कंपनी के साथ कोई अनुबंध नही है। सरकारी दस्तावेजों में खाद्य विभाग में यहां पंप संचालित है। किन्तु एक्सप्लोसिव लाईसेंस रद्द हो चुका है। नजूल रिकार्ड में यह भूमि 6 पृथक-पुथक नाम से दर्ज है। 52 वर्षों से नजूल भूमि पर सार्वजनिक उपक्रम का पेट्रोल पंप 6 टुकड़ों में बिक जाए क्रेताओं का नाम चढ़ जाए और पंप भी चलता रहे। यह भ्रष्टाचार सिर्फ बिलासपुर में ही संभव है|

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