1965 से संचालित पेट्रोल पंप को षडयंत्र कर बेचा 6 टुकड़ों में

०० खाद्य विभाग के सरकारी दस्तावेजों में यहां है पंप संचालित मगर एक्सप्लोसिव लाईसेंस हो चुका है रद्द

०० कस्तुरी राव ने कंपनी के साथ हुए अनुबंध को दरकिनार कर बेचा भूखंड

 ०० दस्तावेज लेखक, नजूल, पटवारी एवं जिला पंजीयक के संरक्षण में हुआ खरीदी-बिक्री का खेल

डीपी गोस्वामी

बिलासपुर। नगर के रेलवे स्टेशन से शिव टाकिज चौक, पुराना बस स्टैंड चौक, अग्रसेन चौक से नेहरु चौक जाने वाले मार्ग पर स्थित एक मात्र पेट्रोल पंप है जो 1965 से संचालित है जिसकी चौहदी को षड्यंत्र कर छ: टुकडो में बेच दिया गया है| बिग बाजार के बाजू में स्थित एचपी का यह पेट्रोंल पंप बंद होने वाला है, वर्ष 2015 में लीज़ पर दी हुई इस संपत्ती को लीज़ होल्डर ने एचपी को ना बेच कर 6 अन्य लोगों को टुकड़ों में बेच दिया। जिससे नामांतरण हो जाने के बाद अब यह पंप हमेशा के लिए बंद हो सकता है। नेहरू चौक पर स्थित पेट्रोल पंप के बाद मंत्री महोदय के घर वाले मार्ग पर अग्रसेन चौक तक दाएं ओर यही एक पंप है पूर्व में सीएमडी चौक के बाद तारबहार थाने के पास एक पंप हुआ करता था। वह भी संपत्ती विवाद के फर्जी दस्तावेज बनवाने पर हुई शिकायत के कारण बंद हो गई। अब स्थिति यह है कि यदि कोई आम नागरिक रेल्वे स्टेशन से पेट्रोल के लिए तलाश शुरू करेगा तो उसे लिंक रोड ही आना पड़ेगा। स्टेशन से आते समय लिंक रोड पर सिर्फ एक यही पंप है। इसी तरह स्टेडियम की ओर से आने वालों के लिए अग्रसेन चौक के बाद एक पंप है। यदि बिग बाजार रोड पर स्थित एचपी का पंप बंद होगा तो आम नागरिकों को अपने वाहनों एक लंबा चक्कर देकर दूसरी ओर आना पड़ेगा। जिससे एक तरफ यातायात पर आनावश्यक दबाव पड़ेगा वहीं नागरिकों का समय एवं जेब दोनो ही कटेगा।

सन् 1965 जब शहर की जनसंख्या एक लाख से कम थी तब एसओ स्टैंडर्ड वेक्यूम आइल कंपनी ने सत्यम चौक से अग्रसेन चौक के मध्य एक पेट्रोल पंप खुला था। राष्ट्रीयकरण की दौर में यह कंपनी एचपी के नाम से परिवर्तित हो गई। 52 वर्ष पुराने इस पेट्रोल पंप पर भू-माफिया ने फन फैला दिया है। यदि न्यायालय ने इस पर शीघ्र ही जनहित में कोई निर्देश नही दिया तो शहर के नागरिको से एक और सुविधा छीन जाएगी। नजूल सीट नंबर 24 प्लाट नं. 8 के बटांकन में इस पेट्रोल पंप की जमीन पूर्व मंत्री अशोक राव के नाम दर्ज थी। 22हजार 205 वर्ग फिट का यह भू-खंड सरकारी तौर पर 15 करोड़ 54लाख कीमत का है। एचपी कंपनी का यह स्वयं का रिटेल आउटलेट है। जिसे कंपनी ने मोहम्मद तारिक नाम के व्यक्ति को संचालित करने के लिए दिया। अशोक राव की पत्नी कस्तुरी राव ने कंपनी के साथ हुए अनुबंध को एक तरफ रखते हुए इसे वर्ष 2016 में कपट पूर्ण तरिके से शहर के 6 लोगो को टुकड़ों में बेच दिया। पेट्रोल पंप की बिक्री की खबर न तो आपरेटर को लगी न ही कंपनी के उच्च अधिकारियों को, बिना लेआउट चलते हुए पेट्रोल पंप को कई टुकड़ों में बेचना कालोनाईजिंग एक्ट के खिलाफ है। रजिस्ट्री में मौके से विपरीत चौहद्दी बनाना आपराधिक कृत्य है। विक्रेता-क्रेता, दस्तावेज लेखक, नजूल, पटवारी एवं जिला पंजीयक के संरक्षण में यह सब काम बड़े आसानी से हो गया। छोटे-छोटे मकानों की रजिस्ट्री के बाद जिला पंजीयक उसे देखने जाता है किन्तु बीच शहर में 22,205 वर्ग फिट भूमि 6 टुकड़ों में बिकी जिसका पंजीयन जिला पंजीयक के यहां नही भारतीय जनता पार्टी से जुड़े एक नेता के घर पर हुआ और पंजीयक इसे देखने नही गया। पंजीयन उपरान्त भूमि के सभी टुकड़े नजूल अधिकारी के कोर्ट में नए क्रेताओं के नाम चढ़ गए, तब भी आरआई ने स्थल पर पेट्रोल पंप संचालित है कि रिपोर्ट नही दी, और लंबी धन राशि खा कर नामांतरण किया। वर्ष 2016 से शहर के बीचों बिच एक पेट्रोल पंप चल रहा है जिसे एचपी कंपनी संचालित करती है। भूमि 6 टुकड़ों में अन्य के नाम से इन 6व्यक्तियों का कंपनी के साथ कोई अनुबंध नही है। सरकारी दस्तावेजों में खाद्य विभाग में यहां पंप संचालित है। किन्तु एक्सप्लोसिव लाईसेंस रद्द हो चुका है। नजूल रिकार्ड में यह भूमि 6 पृथक-पुथक नाम से दर्ज है। 52 वर्षों से नजूल भूमि पर सार्वजनिक उपक्रम का पेट्रोल पंप 6 टुकड़ों में बिक जाए क्रेताओं का नाम चढ़ जाए और पंप भी चलता रहे। यह भ्रष्टाचार सिर्फ बिलासपुर में ही संभव है|

 

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