कई गुटों में बटी शहर भाजपा, आगामी विधानसभा चुनाव में उठाना पड़ सकता है भारी नुकसान

०० गुटबाजी के चलते टूटी कद्दावर मंत्री अमर अग्रवाल की टीम, बहुत अधिक समर्थकों ने छोड़ा साथ

०० नगर में विकास न होने के कारण भाजपा को झेलनी पड़ सकती है नागरिकों की आलोचना

०० रामाराव रखते है निगम कि राजनीति में खासा प्रभाव

बिलासपुर। बाहर से भले ही भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में सब कुछ अनुशासित लगे पर इसमें कई गुट है और गुंटों में आपसी मनमुटाव इतना अधिक बढ़ गया है कि इसे बैनर पोस्टर से लेकर नगर निगम की सामान्य सभा, एमआईसी में भी देखा जा सकता है। गुटबाजी का यह खामियाजा पार्टी को इस चुनाव में उठाना पड़ सकता है। पिछले चुनाव में भी बिल्हा, मस्तुरी, कोटा में पार्टी की हार के पिछे गुटबाजी ही बड़ा कारण था, छत्तीसगढ़ बनने के बाद जिले में भारतीय जनता पार्टी का एक ही ग्रुप था जिसे उस वक्त के बिलासपुर विधायक लीड करते थे जिसके कारण स्थानीय चुनाव से लेकर विधानसभा यहां तक की लोकसभा में भी भाजपा को लाभ प्राप्त होता था, बाद में बिल्हा विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता धरम लाल कौशिक चुनाव जीते। प्रशासनिक एवं विधाई अनुभव कम होने पर भी मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष जैसा संवैधानिक पद दिया। इसी का परिणाम था कि शहर के कद्दावर मंत्री अमर अग्रवाल की टीम में टुट हुई और उनके बहुत सारे समर्थकों ने बिल्हा की राह पकड़ ली जिसमें मुंगेली के एक विधायक भी शामिल थे। राजनीति कब किसे पटखनी देदे कोई नही जानता, धरम लाल कौशिक विधानसभा अध्यक्ष चुनाव हार गए। गुटीय संतुलन के हिसाब से समर्थकों में निराशा छा गई किन्तु कौशिक के ऊपर मुख्यमंत्री का विश्वास बना रहा जिसका परिणाम यह हुआ कि एक विधानसभा चुनाव हारे हुए व्यक्ति को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया। जिले में पार्टी के एक नए गुट को फिर से ताकत मिल गई। इसी ताकत के दम पर बिलासपुर विधानसभा के क्षेत्र में रेल्वे क्षेत्र के वरिष्ठ पार्षद रामा राव ने मंत्री गुट छोड़ कर अलग राजनीति शुरू कर दी। इस ग्रुप को गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष सहित तखतपुर क्षेत्र से भी ताकत मिलती है। रामाराव निगम कि राजनीति में खासा प्रभाव रखती है। एक समय यह माना जाता था कि रेल्वे क्षेत्र में माननीय मंत्री की लगातार जीत के पिछे व्ही रामाराव की खास भुमिका है। निगम में माननीय मंत्री ने महापौर से ज्यादा सभापति को तब्बजों दे रखी है। परिणाम यह है कि 34 हजार वोंटों से जीते महापौर एक पार्षद से कई मौके पर शिकस्त खा चुके है। भारतीय जनता पार्टी के पार्षदों में भी एक से ज्यादा गुट है। महापौर का अपना गुट है, सभापति का दुसरा गुट है, पार्षद चुनाव हार कर एल्डर मैन बने पार्षदों का अपना गुट है एवं भारतीय जनता पार्टी की भक्ती से मंत्री की भक्ती ज्यादा करने वाले पार्षदों का अलग गुट है। इतने सब खंड-खंड में बटी जिला भारतीय जनता पार्टी जो शहर में विकास न होने के कारण नित नागरिकों की आलोचना झेल रही है। इस बार चुनाव में कैसे उतरेगी यह देखने लायक होगी।

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