बच्चों को अपराधी के रूप में न देखें: एडीजीपी विज

०० बाल अपराधों की रोकथाम के लिए चयनित प्रशिक्षकों का दो दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न

रायपुर| पुलिस मुख्यालय (अपराध अनुसंधान विभाग) रायपुर द्वारा आज यहां पुलिस ट्रांजिट हॉल में राज्य में बाल अपराधों की रोकथाम के लिए प्रशिक्षक के रूप में चयनित 80 पुलिस अधिकारियों का दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ।प्रशिक्षण कार्यक्रम में आर.के. विज, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (अपराध अनुसंधान विभाग) ने प्रशिक्षणार्थी पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस अधिकारी अपराध में लिप्त बच्चों को अपराधी के रूप में न देखें। उन्होंने सभी पुलिस अधिकारियों को बच्चों पर होने वाले अपराध या बच्चों द्वारा किए जाने वाले अपराधों की विवेचना बहुत गंभीरता और संवेदनशीलता से करें, क्योंकि पुलिस द्वारा की जाने वाली कार्यवाही पर आम जनता की सीधी निगाह रहती है।
यूनिसेफ रायपुर के सहयोग से इस प्रकार का प्रशिक्षण आयोजित करने का उददेश्य बताते हुए श्री विज ने कहा कि बाल अपराधों की रोकथाम के लिए केन्द्र शासन और राज्य शासन द्वारा बनाए गए कानूनों का अधिक से अधिक जानकारी पुलिस अधिकारियों को होना चाहिए, विशेषकर ‘‘पॉस्को एक्ट’’ और ‘‘जुवेनाइल जस्टिस एक्ट’’ के प्रावधानों में बाल अपराध के हर पहलू को ध्यान में रखकर नियम बनाए गए हैं। इसकी जानकारी प्रत्येक पुलिस अधिकारी को होनी चाहिए। पुलिस मुख्यालय द्वारा राज्य के सभी पुलिस अधीक्षकों को उनके जिलों में स्थित बाल सुरक्षा गृह (आब्जर्वेशन होम) का समय-समय पर निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।विज ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि पुलिस अधिकारियों के लिए आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बाल अपराध को रोकने में काफी कारगर होगा। यहां से प्रशिक्षित होकर जाने वाले पुलिस अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में बच्चों के पालकों और स्कूलों के अध्यापकों को जागरूक कर सकेंगे, जिससे घर और स्कूल का वातावरण अच्छा होगा और बच्चों में आदर्श चरित्र का निर्माण होगा। उन्होंने याद दिलाया कि बच्चे राष्ट्र की संपत्ति हैं, ये सुसंस्कृत होंगे तो अच्छे समाज और अच्छे राष्ट्र का निर्माण होगा। श्री विज ने पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया कि बच्चों की गुमशुदगी, अपहरण या ट्रैफिकिंग पर पुलिस अधिकारियों को तत्काल कार्यवाही करनी चाहिए और बाल कल्याण समितियों के साथ समन्वय बनाए रखते हुए शीघ्र रेस्क्यू की कार्यवाही करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने पुलिस अधिकारियों को हिदायत देते हुए कहा कि पुलिस की कार्यवाही में विशेष सतर्कता बरती जाए ताकि बच्चों के मन में पुलिस के प्रति भय का वातावरण न निर्मित हो। पुलिस अधिकारी बच्चों से मित्रवत व्यवहार करें।प्रशिक्षण कार्यक्रम में बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री राजेन्द्र निराला और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री उमेश उपाध्याय ने पीड़ित बच्चों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने और पीड़ित क्षतिपूर्ति प्राप्त करने तथा जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में बच्चों के लिए किए गए प्रावधानों को विस्तार पूर्वक बताया। इस अवसर पर सहायक पुलिस महानिरीक्षक श्रीमती पूजा अग्रवाल सहित सभी जिलों से आए पुलिस अधिकारी तथा पुलिस मुख्यालय के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन श्री उमेश दीक्षित ने किया।

 

 

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