आदिवासी अंचलों में एक बड़ी क्रांति की शुरूआत: डॉ. रमन सिंह

०० मुख्यमंत्री ने अपनी रेडियो वार्ता में आदिवासी क्षेत्रों के होनहार बच्चों का दिया उदाहरण

रायपुर| मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने तेन्दूपत्ता मजदूरों के प्रतिभावान बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए उनकी जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा है कि आदिवासी अंचलों में एक बड़ी क्रांति की शुरूआत हो चुकी है, जिसके सूत्रधार ये होनहार बच्चे हैं। मुख्यमंत्री ने आकाशवाणी के रायपुर केन्द्र से आज सवेरे प्रसारित अपनी मासिक वार्ता ‘रमन के गोठ’ में कहा – डॉक्टरी और इंजीनियरिंग सहित कृषि और नर्सिंग की उच्च शिक्षा के लिए चयनित ये बच्चे आगे चलकर अपने परिवार, समाज और गांव का जीवन बदल देंगे। सरकार के कदमों से आज तेन्दूपत्ता मजदूरों के परिवारों में शिक्षा, सेहत और विकास के प्रति चेतना जागी है। प्रयास आवासीय विद्यालयों में तेन्दूपत्ता मजदूरों के बच्चे भी रहते हैं, पढ़ते हैं, कोचिंग पाते हैं और कई बच्चे मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में भी पहुंच रहे हैं।

अपनी मासिक रेडियो वार्ता में मुख्यमंत्री ने इनमें से कई बच्चों का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा – नारायणपुर जिले के ग्राम गढ़बेंगाल निवासी श्री लखेश्वर प्रधान का बेटा विमल कुमार अब सरकारी मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहा है।  इसी जिले के श्री केसरू उसेंडी की बेटी लक्ष्मी सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज से बी.ई. कर रही है। मुख्यमंत्री ने नारायणपुर जिले के ही ग्राम धौड़ाई निवासी श्रीमती छम्मा बाई का बेटा वेदप्रकाश बेलसरिया, ग्राम एड़का के श्री जग्गूराम दुग्गा की बिटिया कुमारी रनाय दुग्गा का भी उल्लेख किया और कहा कि ये बच्चे भी इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं।डॉ. सिंह ने बालोद जिले के ग्राम बड़भूम निवासी श्री रामूलाल के बेटे इंद्रजीत, रायगढ़ जिले के ग्राम झगरपुर निवासी श्री बाल मुकुंद का बेटा राधेश्याम, बिलासपुर जिले के जगमोहन सिंह का बेटा आंदोलन सिंह, ग्राम चोटिया निवासी विरेन्द्र कुमार के बेटे गणेश कुमार और बलौदाबाजार जिले के ग्राम बल्दा कछार निवासी श्री परमानंद के बेटे लक्ष्मीनारायण सहित कई जिलों के होनहार बच्चों का भी उल्लेख किया। डॉ. सिंह ने कहा – बहुत से बच्चे बी.एस-सी. (एग्रीकल्चर), बी.एस-सी. (नर्सिंग) और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए चुने गए हैं। उन्होंने रेडियो प्रसारण में कहा – एक छोटे गांव या कस्बे के किसी परिवार का बच्चा डॉक्टरी, इंजीनियरिंग या अन्य कॉलेजों में पढ़ने जाता है, तो वहां त्यौहार का वातावरण बनता है, जिसका असर आस-पास के कई गांवों में होता है। उन्होंने कहा – आगे चलकर तेन्दूपत्ता संग्राहकों के बच्चे भी बड़े-बड़े अधिकारी बनकर आएंगे। इन उपलब्धियों से हमारा भी उत्साह बढ़ता है।

 

 

error: Content is protected !!