धारा 151 को जेल, गैर जमानती 307 को अभयदान यही है बिलासपुर की पुलिस

शशांक दुबे

बिलासपुर। प्रदेश के मुखिया द्वारा कलेक्टर, एसपी कान्फ्रेंस के बाद बिलासपुर जिले में परिस्थितियां कुछ इस तरह बनी है कि कलेक्टर तो इतने सख्त हुए कि शिकायतकर्ता को 151 में जेल भेज देते है। वहीं पुलिस कप्तान शहर में दफा 307,376 के आरोपियों को गिरफ्तार नही करवा पाते। ऐसा लगता है कि हल्की-फुल्की धारा के आरोपी का तत्काल जेल जाना तय है, वहीं गंभीर धाराएं यहां तक हत्या का प्रयास और बलात्कार के आरोपी निचिंत होकर घूम सकते है। तथ्यात्मक तरीके से पिछले दो माह की विभिन्न थाना क्षेत्रों की एफआईआर यही बयां करती है। दशहरा के बाद सरकंडा थाने में गैंगवार भी जिसमें एक दो नही दर्जन भर दोपहियां जला दिए गए। दो पक्षों के बीच घातक हथियार चले और घायल लोग अस्पताल पहुंचे। पुलिस ने एक दो नही दर्जन भर आरोपियों के विरूद्ध आगजनी मारपीट के साथ 307 हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया। प्राथमिकी दर्ज कराने वाले का बयान भी हो गया। प्रकरण में मात्र एक नाबालिक को हिरासत में लिया गया शेष 7 आरोपी पर्यटन पर चले गए। इसी तरह 4-5 नवंबर के दरमियान कोतवाली थाना क्षेत्र में दयालबंद के दो गुटों के बीच जमकर मारपीट हुई दोनो पक्षों को देर तक थाने में रोका गया बाद में 307 हत्या का प्रयास दर्ज कर उन्हें विदाई दी गई।

तोरवा थाना क्षेत्र में आरोपियों ने थाने में घुसकर एक मुंशी की पिटाई कर दी और पुलिस नगर निगम सभापति की उपस्थिति में आरोपी तथा मुंशी के मध्य समझौता कराते रहे। यहां तक की आरोपी को पकड़ने गई टीम की एक महिला सिपाही का हाथ भी आरोपी ने पकड़ कर मोड़ दिया।  को जब अपने ही थाने में न्याय नही मिला तो वह अजजा थाने में फरियाद लेकर पहुंचा, जहां मामला दर्ज है। फरार आरोपियों में गुंडा मवाली से लेकर जनप्रतिनिधि तक शामिल है। इसी तरह तारबहार थाना क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी के पूर्व ब्लाक अध्यक्ष ने छ.ग. जनता कांग्रेस के प्रवक्ता को सैकड़ों लोगो की उपस्थिति में पीटा मामलें में शिकायतकर्ता ने ब्लाक अध्यक्ष नामज़द आरोपी बनाया है। किन्तु आज तारीख तक कोई गिरफ्तारी नही हुई। उनके ऊपर इसके पूर्व भी जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में मारपीट के कई मामले दर्ज है। यहां तक कि कोटा थाना क्षेत्र में उनके विरूद्ध एक जज के साथ मारपीट का मामला दर्ज है। तारबहार थाना क्षेत्र में 376 जैसी धारा  में भी गिरफ्तारी नही होती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण सीएमडी कालेज के पूर्व प्राचार्य जिसके विरूद्ध दैहिक शोषण क मामला दर्ज है को पुलिस गिरफतार करने का प्रयास नही करती। हास्यस्पद स्थिति तब बनती है जब दर्जनों मामलों में आरोपी नेता को बेदाग, निर्दोष, षड़यंत्र का शिकार, जनता का सेवक बताते हुए वरिष्ट जनप्रतिनिधि पुलिस के आला अधिकारियों के पास ज्ञापन देने जाते है।

error: Content is protected !!