स्वच्छता पर सुस्त नगर पंचायत कोटा अधिकारी व जनप्रतिनिधि

संजय बंजारे

कोटा| स्वच्छ भारत अभियान के तहत पूरे देश में स्वच्छता अभियान जारी है देश के प्रधानमंत्री द्वारा देशवासी को इस अभियान में जुड़ने के लिए आव्हान किया जा रहा है करोड़ो रूपये विज्ञापनों में खर्च किये जा रहे हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग जागरूक हो सके,,पर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले का कोटा नगर पंचायत व नगर पंचायत अधिकारी तक शायद यह संदेश अब तक नही पहुंच पाया हो,एक ओर जहां छत्तीसगढ़ शासन स्वच्छ भारत अभियान के तहत शहर से लेकर गांव तक किसी न किसी माध्यम से अभियान चला रही है, पर कोटा नगर पंचायत के पूर्व व वर्तमान नगर पंचायत अधिकारी द्वारा इस पर कोई खास रुचि नहीं दिखाई जा रही है।

वार्ड नं 06 जय स्तंभ चौक मेन रोड के बीचो-बीच एक पुल हैं जिसके अगल बगल में जल संसाधन विभाग का नहर हैं जिसमें की किसानों के खेतों तक पानी जाता है पर कुछ सालो से उस नहर में जल संसाधन विभाग के घोंगा बांध के पानी की जगह नगर पंचायत के नाली का गंदा पानी बह रहा है साथ मे गंदे पानी के साथ पालीथिन व अन्य तरह के कचरे व मलबों से भरा पड़ा हुआ है नहर के अगल बगल में रहने वाले रहवासी और ब्यापारी हलाकान परेशान हैं शाम होते ही तमाम तरह के बीमारी फैलाने वाले मलेरिया डेंगू के मच्छरों का आतंक शुरू हो जाता है पहले से ही ब्लड प्रेशर,शुगर से पीड़ित लोगों को इनका भी सामना करना पड़ता है।वो तो शुक्र है कि नहर का पानी नहर के उस पार नही जा रहा था वरना किसानों के जमीन के साथ फसलो को भी नुकसान पहुँचता इनके लापरवाही के कारण शासन को सूखा राहत के साथ जमीन का भी मुआवजा देना पड़ता अभी वर्तमान में नगर पंचायत कोटा को स्वच्छता के लिये लाखो रुपए शासन द्वारा प्रदान किये गए थे, सूखा कचरा गीला कचरा अलग-अलग करने उसे कंपोज करने उपाय का बड़ा सा बोर्ड नगर पंचायत के गेट के सामने ही लगा हुआ है पर नगर पंचायत अधिकारी की शायद इस पर नजर नही पड़ी होगी।नगर पंचायत अधिकारी का नहर में नाली का गंदा पानी कचरा का मलबा जमा होने के बारे में संज्ञान दिलाने पर अधिकारी श्रीमती सागर राज कहना था कि इस बारे मे मुझे जानकारी नही थी आपके द्वारा पता चला, संज्ञान दीपावली के समय दिलाया गया था पर उस पर अब तक कोई पहल नही किया गया अपनी सुस्त रवैये का भार अपनी नाकामी छुपाने के लिये जल संसाधन विभाग पर डाल देना की उनके द्वारा साफ सफाई की जाएगी,,शायद इन्हें पता है की नही वार्ड वासी नगर पंचायत को टैक्स देते हैं नाकि जल संसाधन विभाग को।
जल संसाधन विभाग के एस.डी.ओ.का कहना था कि हमने नहर किसानों के खेतों तक सिंचाई के लिए पानी पहुँचे उसके लिये नहर निर्माण किया है नहर में आने वाले गंदे पानी व कचरा मलबा की साफ़ सफाई की जवाबदारी नगर पंचायत कोटा के अधीनस्थ अधिकारी कर्मचारियों की बनती है कि वो गंदे पानी व कचरा को नहर में जाने से रोके।वही पर नहर के पास ब्यापार करने वाले ब्यापारियों का कहना था कि नगर पंचायत कार्यालय जाकर अधिकारीयो कर्मचारियों जनप्रतिनिधियों को भी इस बारे में संज्ञान दिलाया जा चुका है सालो हो गए इसकी सफाई हुए नहर का गंदा पानी सडको में बहने लगता है जिससे ग्राहकों को आने जाने में परेशानी होती हैं।नहर वाली लाईन में ही कोटा नगर पंचायत अध्यक्ष मुरारी गुप्ता की भी शॉप है नगर पंचायत अध्यक्ष के प्रतिनिधि के रूप में राकेश गुप्ता का कहना था कि नगर पंचायत द्वारा बीच मे सफाई करवाई गई थी व साथ मे जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को भी इस बारे में अवगत कराया गया था पर जल संसाधन विभाग द्वारा कोई सहयोग नही किया गया।कुल मिलाकर नूरा कुश्ती चल रही हैं, जल संसाधन और नगर पंचायत के बीच दोनों विभागों के पाटो के बीच पीस रही है वार्ड नं 06 की आम नागरिक जोकि ईमानदारी से अपना टैक्स पटाती है ये सोचकर कि उसके द्वारा दिये हुये टैक्स से उन्हें कम से कम बुनियादी सुविधा तो मिलेगी ही इसी लिए हर चुनाव में वो जनप्रतिनिधि बदलते रहता है चाहे वो किसी भी पार्टी का हो बस यही सोचकर कि अब हमारा काम होगा पर उनका इंतजार अभी भी खत्म नही हुआ है विकास की राह संजोय हुवा आम आदमी विकास नाम से अभी भी कोसो दूर है।

 

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