राज्योत्सव प्रदर्शनी: छत पर होगी खेती और अलसी के डंठल से बनेंगे कपड़े

०० लोगों को लुभा रहे खेती के नये तौर-तरीके

रायपुर| छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2017 में आयोजित विकास प्रदर्शनी में कृषि विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों तथा संस्थानों द्वारा लगाई गई विशाल कृषि प्रदर्शनी किसानों की आय दोगुनी करने की किसान हितैषी उद्देश्य पर केन्द्रित है। कृषि प्रदर्शनी में अगले पांच वर्षाें में किसानों की आय कैसे दोगुनी हो इसकी कार्ययोजना और संभावित उपलब्धियों को जीवंत प्रदर्शनों, प्रादर्शाें, आकर्षक पोस्टर और चार्टस् के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। कृषि प्रदर्शनी के मंडप में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा अलसी के पौधे से लिनेन के कपडे के निर्माण की तकनीक किसानों तथा आम जनता के आकर्षण की मुख्य केन्द्र बनी हुई है।
राज्योत्सव मेले में आयोजित विकास प्रदर्शनी में कृषि विभाग द्वारा दो डोम को आपस में जोड़कर 12 विभागों के माध्यम से कृषि की प्रगति को कृषकों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। प्रारंभ में ही उद्यानिकी के क्षेत्र विकास एवं संभावनाओं को दृष्टिगत रखते हुये उद्यानिकी की आधुनिक प्रणाली जैसे संरक्षित खेती द्वारा उद्यानिकी फसलों की उन्नत खेती को दर्शाया गया है। रासायनिक उर्वरकों तथा कीटनाशकों के उपयोग को रोकने के लिये उद्यानिकी फसलों की जैविक व टिकाऊ खेती के मॉडल को प्रदर्शित किया गया है। छत्तीसगढ़ में विभिन्न फूलों की अपार संभावनाओं को देखते हुये इन फूलों की खेती की आधुनिक तकनीक का जीवन्त प्रदर्शन किया गया है, ताकि फूलों का दूसरे राज्यों से आयात कम हो सके। उद्यानिकी फसलों की खेती के पश्चात समुचित प्रसंस्करण के आभाव में कृषकों को उनके उपज की वास्तविक कीमत को दिलवाने के लिये विभिन्न प्रसंस्कृत तथा मूल्य सवंर्धित उत्पादों की तकनीक को दर्शाया गया है। शहरी क्षेत्रों में उद्यानिकी विकास को बढ़ावा देने के लिये उद्यानिकी विभाग द्वारा किये जा रहे कार्याें का विशेष रूप से ‘‘छत पर खेती’’ को प्रचारित प्रसारित किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य में विभिन्न फलों, सब्जियों व फूलों के उपयुक्त क्षेत्रों को देखते हुये प्रत्येक जिले में उत्पन्न होने वाले फल/फूल/सब्जियों को छत्तीसगढ़ के मानचित्र में दर्शाया गया है।
कृषि विभाग द्वारा राज्य सरकार की उपलब्धियों तथा भारत सरकार/राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजनायें जैसे – मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, टिकाऊ खेती (परम्परागत कृषि विकास योजना), प्रधानमंत्री सूक्ष्म सिंचाई योजना, सौर सुजला योजनाओं के माध्यम से कृषकों को हो रहे लाभ को प्रदर्शित किया गया है। इन योजनाओं को अपनाकर कृषकों की दोगुनी आय प्राप्ति का मूल यंत्र प्रदाय किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिये उपयुक्त तकनीकी जानकारी जैविक दवाइयों, जैविक उर्वरकों, जैविक कीटनाशकों, जैविक खादों के प्रयोग को दर्शाया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य के 40 प्रतिशत क्षेत्र में उच्चहन भूमि में जलग्रहण, प्रबंधन एवं सूक्ष्म सिंचाई द्वारा प्रति बूंद अधिक उत्पादन को जीवन्त मॉडल के माध्यम से प्रदर्शित किया गया हैं ताकि अन्य क्षेत्रों मे इन मॉडल को अपनाकर सिंचित क्षेत्र को बढ़ाया जा सकता है।बीज प्रमाणीकरण संस्था द्वारा प्रमाणित बीज कैसे लें तथा उद्यानिकी फसलों जैसे- अदरक, हल्दी के प्रमाणीत बीज कैसे तैयार कर अच्छी फसलें लें, इसे सचित्र वर्णित किया गया है। बीज निगम द्वारा अच्छे बीज की प्रसंस्करण तकनीक जैसे – ग्रेडिंग मशीन, पैकेजिंग मशीन, टेगिंग द्वारा उच्च गुणवत्ता के बीज को तैयार करने की प्रक्रिया को प्रदर्शित किया गया है तथा छत्तीसगढ़ राज्य में उत्पादित बीज, कुल बीज की मांग तथा उपयोग को प्रदर्शित किया गया है। उच्च गुणवत्ता के बीज से उत्पन्न फसलों को जीवन्त दर्शाया गया है। छत्तीसगढ़ कामधेनु विश्वविद्यालय द्वारा पंचगव्य उत्पादन एवं प्रबंधन, गाय पालन स्कीम, समन्वित मछली पालन, गौमूत्र, गोबर खाद के उपयोग को प्रदर्शित किया गया है।इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के स्टाल को 3 थीमों में विभाजित किया गया है। प्रथम थीम के तहत कृषि विज्ञान केन्द्र, कोरिया द्वारा तैयार कोरिया एग्रो प्रोड्यूसर कम्पनी, बैकुंठपुर के पंजीकृत किसानों द्वारा सामूहिक उन्नत गौ पालन, दूध प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन, बकरी पालन, मातृ वाटिका स्थापना, उच्च गुणवत्ता का पौध उत्पादन, सामूदायिक केंचुआ पालन की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया है। दूसरी थीम जैविक खेती के तहत बलरामपुर/सरगुजा/दन्तेवाड़ा के कृषकों द्वारा कोदो धान की सुगंधित किस्मों की आधुनिक खेती तथा उन्हीं के द्वारा प्रसंस्कृत चावल तैयार कर उसको विक्रय की समुचित व्यवस्था को दर्शाया गया है। जैविक खेती के सभी अवयवों का उत्पादन, धान की पैदावार को सड़ाकर पोषक तत्वों में तब्दील करने की तकनीक को प्रदर्शित किया गया है। कृषि में नवाचार के तहत सुरगी ग्राम में 70 एकड़ में 50 कृषकों को संगठित कर नाले से तालाब में जल एकत्रीकरण तथा तालाब के जल को ड्रिप के माध्यम से 70 एकड़ क्षेत्र को 3-4 फसल में परिवर्तित करने के मॉडल को प्रदर्शित किया गया है।
आधुनिक मशीनों से खेती की भी प्रदर्शनी :- कृषि अभियांत्रिकी विभाग द्वारा विभिन्न कृषि उपकरणों के माध्यम से कम समय में बुवाई, खेत की तैयारी, असिंचित क्षेत्र में संचयित नमी द्वारा मशीन का उपयोग कर बुवाई, प्रसंस्करण यंत्रों का उपयोग कर लागत में कमी को दर्शाया गया है। मछली विभाग द्वारा विभिन्न किस्मों की मछलियों का उत्पादन, उनका बीज उत्पादन तथा दूसरों शब्दों में विक्रय, रंगीन मछलियों की किस्मों का प्रदर्शन, केज कल्चर द्वारा कम क्षेत्र में अधिक उत्पादन को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया है। गौ सेवा आयोग द्वारा आदर्श गौशाला निर्माण एवं प्रबंधन, गौ मूत्र, गोबर, वर्मी कम्पोस्ट, बायो गैस द्वारा जैविक खेती को प्रोत्साहित करने की तकनीक को प्रदर्शित किया गया है। पशुपालन विभाग द्वारा उन्नत देशी नस्लों जैसे – साहीवाल, गिर, शारपारकर, कांकरेज, जर्सी आदि को प्रदर्शित किया गया है। उन्नत बकरी पालन, बतख पालन, मुर्गी पालन, टर्की पालन, बटेर पालन तथा उन्नत नस्लों की खेती को प्रदर्शित किया गया है। विभाग द्वारा वर्ष 2000, 2010, 2017 तथा 2022 में होने वाले दुग्ध उत्पादन को मॉडल के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। राज्य शासन की योजनाओं के माध्यम से उद्यमियों को दी जा रही उन्नत गौपालन इकाईयों द्वारा किये जा रहे दुग्ध उत्पादन को भी रेखांकित किया गया है। छत्तीसगढ़ दुग्ध महासंघ द्वारा विभिन्न दुग्ध उत्पादों की प्रसंस्करण तकनीक का प्रदर्शन करते हुए दुग्ध उत्पादों का विक्रय किया जा रहा है।
 

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