मुख्यमंत्री बताए किस लैब से कराई सेक्स सीडी की जांच और मंत्री को दी क्लीनचिट: पीएल पुनिया

०० नोटबंदी के विरोध में कांग्रेस 8 नवंबर को मनाएगी काला दिवस

रायपुर|कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया ने छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री के कथित सेक्स सीडी को लेकर राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा। पुनिया ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कि मंत्री की सीडी की जो घटना सामने आई है,वो बेहद ही शर्मनाक है। सीडी कांड को लेकर मंत्री के पद पर बने रहने पर पुनिया ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक सीडी गलत साबित नहीं होती तब तक मंत्री अपने पद पर कैसे रह सकता है।

पुनिया ने मुख्यमंत्री रमन सिंह पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने कौन-सी लैब से जांच करवाकर सीडी के नकली होने का प्रमाण पत्र दे दिया गया। पुनिया ने कहा कि चाहे जितना दवाब बना लें,लेकिन कांग्रेस पत्रकार विनोद वर्मा के साथ खड़ी रहेगी। पुनिया ने सीडी मामले में प्रदेश सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार कितनी भी तानाशाही रवैया अपनाए,सत्ता का दुरुपयोग करें,लेकिन कांग्रेस इसका विरोध करती रहेगी। उन्होंने ने सीबीआई पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि केन्द्रीय जांच एजेंसी तोते की तरह काम करता है,इसलिए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की देखरेख में पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। पुनिया ने सीडी मामले में प्रदेश अध्यक्ष पुनिया ने सीडी मामले में प्रदेश अध्यक्ष पर लग रहे आरोपों को दरकिनार करते हुए कहा कि इस मामले में पार्टी भूपेश बघेल के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कभी भी इस तरह की घटना में शामिल नहीं होती लेकिन यदि सीडी सार्वजनिक होती है तो जिम्मेदार प्रतिपक्ष के नाते हमारा दायित्व है कि हम मुद्दे को उठाएं। इससे पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया बुधवार शाम रायपुर पहुंचे। वे यहां चार दिन के प्रवास पर आए हैं। मंत्री की कथित सेक्स सीडी मामले में मचे कानूनी-सियासी घमासान के बीच पुनिया के आगमन पर प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल सहित सभी वरिष्ठ नेता हवाई अड्डे पर उनके स्वागत के लिए पहुंचे। पुनिया ने वीआईपी लाउंज में नेताओं से थोड़ी देर बात किया। उसके बाद सभी लोग सर्किट हाउस आ गए। यहां देर रात तक वरिष्ठ नेताओं के साथ बंद कमरे में पुनिया की गोपनीय बैठक चली। बताया जा रहा है कि इस बैठक में सीडी कांड और प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल पर दर्ज एफआईआर मामले में नेताओं की राय पूछी गई है। इस दौरान लंबी बहस हुई। नेताओं ने लड़ाई को खींचने की आखिरी सीमा का अंदाजा लगाने की कोशिश की। इसके अलावा मामले की कानूनी पेचिदगियों और राजनीतिक नफा-नुकसान पर भी बात हुई।

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