बच्चों के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए कार्य करें- रमशीला साहू

०० महिला एवं बाल विकास मंत्री ने बाल कल्याण समितियों और किशोर न्याय बोर्ड के तीन दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण में नवनियुक्त पदाधिकारियों का किया उत्साहवर्धन
रायपुर| महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती रमशीला साहू आज यहाँ कृषि महाविद्यालय में 27 जिलों में गठित बाल कल्याण समितियों और किशोर न्याय बोर्ड के नवनियुक्त पदाधिकारियों का उत्साहवर्धन करने पहुंची। इस तीन दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण का आयोजन राज्य बाल संरक्षण समिति, संचालनालय महिला एवं बाल विकास द्वारा किया गया है। श्रीमती रमशीला साहू ने नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि बाल कल्याण समिति और किशोर न्याय बोर्ड जैसी वैधानिक इकाई का हिस्सा बनना गर्व की बात है और मेरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं। मुझे विश्वास है कि आप सभी इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को पूरी तत्परता से निभाएंगे। उन्होंने कहा बाल अधिकारों का संरक्षण हम सभी का उत्तरदायित्व है और सबको मिलकर बच्चों के सर्वोत्तम हित को ध्यान रखते हुए कार्य करना है इसके लिए राज्य सरकार हर संभव सहायता के लिए तत्पर है। उन्होंने कहा राज्य में अनाथ, परित्यक्त, अभ्यर्पित, यौन शोषित, नशापीडि़त, गुमशुदा, बाल विवाह और बाल तस्करी से पीडि़त, विधि विवादित बच्चों के संरक्षण और देखरेख के लिए एकीकृत बाल संरक्षण योजना का संचालन किया जा रहा है। इस योजना के बेहतर संचालन में आप सभी पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव श्रीमती एम.गीता ने पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आप सभी बच्चों की मनःस्थिति, परिवेश को ध्यान में रखते हुए सहानुभूति और संवेदनशीलता के साथ काम करें ताकि कोई भी बच्चा न्याय से वंचित न रहे और सभी बच्चों के हितों की रक्षा हो सके। उन्होंने कहा कि आप सभी बालकों की देखरेख और संरक्षण अधिनियम 2015 का भलीभांति अध्ययन करें ताकि आपको अपने दायित्वों का निर्वहन करने में आसानी हो। तीन दिनों तक चलने वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश भर की बाल कल्याण समितियों के 46 नव नियुक्त अध्यक्ष एवं सदस्य और किशोर न्याय बोर्ड के नव नियुक्त 18 सदस्य शामिल हैं जिन्हें देश के ख्यातिनाम विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षित किया जा रहा है।उल्लेखनीय है कि बाल कल्याण समिति द्वारा किशोर न्याय अधिनियम के तहत संरक्षण और देखरेख की आवश्यकता वाले बच्चों के हितों की रक्षा की दिशा में कार्य किया जाता है.बाल कल्याण समिति में एक अध्यक्ष और 04 सदस्य सहित 05 पदाधिकारी होते हैं। वर्तमान में प्रदेश के 27 जिलों में अब तक 106 पदाधिकारी नियुक्त किये जा चुके हैं, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोविज्ञान, विधि और समाजशास्त्र आदि के विषयों के विशेषज्ञ होते हैं और जिन्हें बच्चों से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में 07 वर्षों का कार्यानुभव हो। इसी प्रकार किशोर न्याय बोर्ड द्वारा विधि विवादित बच्चों की सहायता की जाती है। बोर्ड  में एक अध्यक्ष का पद होता है, जिस पर 03 वर्ष का अनुभव प्राप्त न्यायिक मजिस्ट्रेट की नियुक्ति की जाती है। बोर्ड में दो सदस्य होते हैं जिन पर ऐसे सामाजिक कार्यकर्ता की नियुक्ति की जाती हैं, जिन्हें कम से कम 07 वर्ष का अनुभव हो। इस बोर्ड में अनिवार्य रूप से एक महिला सदस्य की नियुक्ति की जाती है।

 

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