राजधानी में आदिवासी महोत्सव की तैयारी, केदार कश्यप की अध्यक्षता में हुई बैठक

०० वीर नारायण सिंह बलिदान दिवस पर 10 – 11 दिसम्बर को होगा आयोजन

रायपुर| आदिम जाति विकास मंत्री श्री केदार कश्यप ने आज यहां अधिकारियों की बैठक लेकर अमर शहीद वीर नारायण सिंह के शहादत दिवस के आयोजन से संबंधित तैयारियों की समीक्षा की।
शहादत दिवस पर दो दिवसीय आदिवासी महोत्सव 10 और 11 दिसम्बर को राजधानी रायपुर के इंडोर स्टेेडियम में मनाया जाएगा। श्री केदार कश्यप ने इंडोर स्टेडियम (बूढ़ापारा के पास) आयोजित विभागीय आधिकारियों की बैठक में कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के अंतर्गत जो अन्य स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद हुए हैं, उनकी जीवन गाथाओं के संबंध में भी इस अवसर पर चलचित्रों के माध्यम से प्रदर्शन किया जायेगा। राज्य के आदिवासी क्षेत्रों के लोक संस्कृति, लोककला, लोक गायन और लोक साहित्य आदि के संबंध में भी प्रदर्शन होगा।
श्री कश्यप ने बताया कि इस कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु विभागीय अधिकारियों को टैंट, कैटरिंग का टैंडर एवं मंच निर्माण व मंच संचालन, प्रचार प्रसार संबंधी कार्य, फूड फेस्टिवल का आयोजन, ट्रायबल लिटरेचर फेस्टिवल (सांस्कृतिक स्पर्धा, साहित्य, विभिन्न सांस्कृतिक दलों की व्यवस्था), ट्रायबल कार्निवाल थीम, उद्यमियों का सम्मेलन, इंटरनेट एवं सोशल मीडिया के माध्यम से प्रस्तुतीकरण, विभिन्न सांस्कृतिक दलों के ठहरने की व्यवस्था आदि कार्यक्रम से संबंधित सभी आवश्यक जिम्मेदारी विभागीय अधिकारियों को दे दी गई है। श्री कश्यप ने कहा कि इस अवसर पर विभिन्न स्टाल भी लगाये जाएंगे। आदिम जाति विभाग की महत्वपूर्ण योजनाएं को प्रदर्शित किया जायेगा। ट्रायबल ओलम्पियाड का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें प्राचीन खेल एवं साहसिक गतिविधियों का प्रदर्शन होगा। जनजातीय विषयों के विशेषज्ञों एवं राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों के विषय विशेषज्ञ, प्रोफेसर्स, शोध छात्रों को जनजातीय विषयों पर आधारित शोध पत्रों के प्रस्तुतीकरण हेतु आमंत्रित किया जाएगा।कश्यप ने यह भी बताया कि राज्य की 5 विशेष पिछड़ी जनजातीय यथा बैगा, कमार, अबूझमाड़िया, पहाड़ी कोरवा एवं बिरहोर तथा राज्य शासन द्वारा घोषित दो विशेष पिछड़ी जनजाति पंडोे एवं भूजिया के जीवन शैली पर आधारित छायाचित्रों की प्रदर्शनी भी स्टाल में लागई जाएगी। एस.सी.ई.आर.टी., टीआरआई द्वारा प्रकाशित किये गये पुस्ताकों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। श्री कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनजातियों में प्रचलित आभूषण, बेलमेटल कला, काष्ठकला का प्रदर्शन एवं विक्रय संबंधी स्टाल भी लगाये जाएंगे। इस कार्यक्रम को संस्कृति विभाग, वन विभाग एवं अन्य विभागों से सहयोग एवं समन्वय कर सम्पन्न किया जाएगा। इस अवसर पर विभाग की विशेष सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले, डायरेक्टर श्री जी.आर. चुरेन्द्र सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

 

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