शांति और कानून व्यवस्था के लिए कलेक्टर व पुलिस अधीक्षकों में परस्पर समन्वय जरूरी: डॉ. रमन सिंह

०० कलेक्टर-पुलिस अधीक्षक एक और एक मिलकर बन सकते हैं ग्यारह
०० सामुदायिक पुलिसिंग की सराहना: कोचियाबंदी के लिए जिले में हुए कार्यों की तारीफ
०० सरहदी इलाकों में नजर रखने और होटलों-लॉजों की नियमित जांच के निर्देश

रायपुर| मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय (महानदी भवन) में जिला दण्डाधिकारियों (कलेक्टरों) और पुलिस अधीक्षकों की राज्य स्तरीय संयुक्त बैठक आयोजित की गई। मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक हर जिले में प्रशासन के दो महत्वपूर्ण व्यक्ति होते हैं  और प्रशासन को बेहतर ढंग से संचालित करने के लिए दोनों मिलकर एक और एक दो नहीं बल्कि एक और एक ग्यारह बनकर काम कर सकते हैं।

उन्होंने अगले दस महीने के समय को काफी चुनौती पूर्ण बताया और कहा कि इसलिए कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक दोनों काफी सतर्क रहें, और अपने मैदानी अमले को भी सतर्क रखें, ताकि छोटे-छोटे मुद्दों पर स्वार्थी किस्म के लोग कानून व्यवस्था की स्थिति ना बिगाड़ सकें। डॉ. सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन और पुलिस के बीच अगर तहसील और थाना स्तर पर भी हमेशा तालमेल कायम रहे तो कई घटनाओं को समय से पहले ही रोका जा सकता है। उन्होंने किसी भी गंभीर घटना के दौरान पुलिस के रिस्पांस टाइम को बहुत महत्वपूर्ण बताया। मुख्यमंत्री ने अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए राज्य शासन द्वारा लागू की गई कोचियाबंदी की नीति का भी उल्लेख किया और कहा कि हर जिले में इस नीति पर प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों ने काफी सजगता और सक्रियता से काम किया है, जिसके अच्छे और सकारात्मक नतीजे आए हैं। डॉ. रमन सिंह ने कहा – प्रदेश के विकास और आम जनता की भलाई के लिए शासन द्वारा अनेक योजनाएं संचालित की जा रही है। इनके बेहतर परिणाम भी मिल रहे हैं। सामुदायिक पुलिसिंग का काम भी अच्छे ढंग से हो रहा है। सरगुजा परिक्षेत्र और कुछ अन्य जिलों में सामुदायिक पुलिसिंग के तहत महिला कमांडों का गठन किया गया है। अवैध शराब की रोकथाम और नशे के खिलाफ जनजागरण जैसे कार्यों में महिला कमांडो की भूमिका सराहनीय है। डॉ. सिंह ने विकास योजनाओं में महिला कमांडो के सहयोग की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि सामुदायिक पुलिसिंग के तहत आम जनता को पुलिस के साथ जोड़ने के लिए गांवों में खेल प्रतियोगिताओं का भी आयोजन करना चाहिए।मुख्यमंत्री ने पुलिस अधीक्षकों से कहा कि सामुदायिक पुलिसिंग के साथ-साथ पुलिस अपना मूल कार्य भी संजीदगी से करें, यह देखना उनकी जिम्मेदारी है। शहरों और कस्बों में पुलिस की गश्त नियमित होनी चाहिए। अधिकांश वारदात बाहर से आए हुए अपराधी किस्म के लोग करते हैं, इसलिए बाहरी व्यक्तियों पर निगाह रखनी चाहिए, होटलों,लॉजों, शराब दुकानों, बीयर बारों, आदि की नियमित जांच होनी चाहिए। उन्होंने सभी जिलों के सीमावर्ती इलाकों और विशेष रूप से छत्तीसगढ़ से लगे हुए पड़ोसी राज्यों की सरहदों पर निगरानी और सूचना तंत्र को और भी ज्यादा बेहतर बनाने की आवश्यकता बतायी। उन्होंने कहा – सरकारी योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए जिलों में शांतिपूर्ण वातावरण का होना भी बहुत जरूरी है। शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने में जिला दण्डाधिकारियों के साथ पुलिस अधीक्षकों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। अपराध नियंत्रण में पुलिस की भूमिका का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस की कार्य शैली ऐसी होनी चाहिए कि अपराधियों उसकी वर्दी का  खौफ नजर आए और आम जनता पुलिस को अपना मित्र समझे। पुलिस को देखकर जनता में सुरक्षा का एहसास हो। डॉ. सिंह ने इस बात को संतोषप्रद बताया कि आम तौर पर सभी जिलों में इस दिशा में जिला दण्डाधिकारी और पुलिस अधीक्षक परस्पर समन्वय के साथ अच्छा काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तालमेल के अभाव में जिलों में शून्यता की स्थिति निर्मित हो सकती है, इसलिए यह समन्वय जारी रहना चाहिए और जिला स्तर से लेकर तहसील, विकासखंड और थाना स्तर तक मैदानी अधिकारियों में भी इस प्रकार का तालमेल कायम रहना चाहिए। सूचना तंत्र को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम स्तर पर कोटवारों के अलावा शिक्षकों और पटवारियों के पास भी कई महत्वपूर्ण सूचनाएं होती हैं। उनकी भी मदद ली जा सकती है।
डॉ. सिंह ने बैठक में प्रदेश की कानून व्यवस्था की समीक्षा की और अधिकारियों को अपराध नियंत्रण, यातायात व्यवस्था, सामुदायिक पुलिसिंग, अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर जरूरी दिशा-निर्देश दिए। संबंधित पुलिस परिक्षेत्रों के महानिरीक्षकों ने अपने-अपने रेंज की कानून व्यवस्था के बारे में बैठक में प्रस्तुतिकरण दिया।  मुख्यमंत्री ने कहा – जिलों में कानून व्यवस्था बनाए रखने की दृष्टि से जिला दण्डाधिकारी के रूप में कलेक्टरों के साथ पुलिस अधीक्षकों का हर दिन बेहतर से बेहतर समन्वय बहुत जरूरी है।    डॉ. सिंह ने प्रदेश की नक्सल समस्या के संदर्भ में कहा कि प्रभावित इलाकों में सरकार की विभिन्न योजनाओं के जरिये किसानों, ग्रामीणों और युवाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास हो रहा है। इन इलाकों में जनता को विश्वास में लेकर नक्सल चुनौती से निपटने में पुलिस को अच्छी सफलता भी मिल रही है। मुख्यमंत्री ने नक्सल समस्याग्रस्त जिलों में जिला दण्डाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को और भी ज्यादा सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा – कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक दोनों को जिलों में होने वाले बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान साथ-साथ यात्रा करनी चाहिए, ताकि ऐसे आयोजनों में कानून व्यवस्था की दृष्टि से निचले स्तर के अधिकारी भी सतर्क रहें।बैठक में मुख्य सचिव श्री विवेक ढांड, गृह विभाग के प्रमुख सचिव श्री बी.व्ही.आर. सुब्रमण्यम, पुलिस महानिदेशक श्री ए.एन. उपाध्याय, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री अमन कुमार सिंह और अन्य संबंधित वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

 

 

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