बासमती धान की खेती पर छत्तीसगढ़ में लगी रोक, किसानों पर कोई खास असर नहीं

रायपुर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने (आईसीएआर) छत्तीसगढ़ में खुशबूदार धान बासमती की खेती पर रोक लगा दी है। हालांकि इस रोक का राज्य के किसानों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि यहां बासमती की खेती बहुत कम होती है।कृषि विशेषज्ञों के अनुसार वैसे भी छत्तीसगढ़ में बासमती को खुशबू में टक्कर देने वाली धान की कई किस्मों की पैदावार होती है। इनमें जवाफूल, विष्णुभोग के साथ ही मलाई केसर जैसी धान है, जिनकी देश ही नहीं विदेशों में भी भारी डिमांड हैं।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक के अनुसार छत्तीसगढ़ में बासमती का व्यवसायिक उत्पादन नहीं होता है। कहीं- कहीं, आधा- एक एकड़ में कोई किसान बासमती बोता था। वैज्ञानिक ने बताया कि छत्तीसगढ़ में धान की कई ऐसी किस्म है, जिनकी विदेशों में काफी डिमांड है और बड़े स्तर पर सप्लाई भी किया जाता है।इन चावलों का आकार 7.5 एमएम से छोटा होता है। कृषि विशेषज्ञ डॉ. संकेत ठाकुर कहते हैं कि इस रोक का राज्य के किसानों या उनकी आर्थिक स्थिति पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। वैसे उत्पादन पर रोक नहीं लगाई जा सकती।बासमती चावल में सात राज्यों का दबदबा है। इसमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, जम्मू- कश्मीर और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं। इन्हीं राज्यों ने दूसरे राज्यों में बासमती की खेती पर रोक लगाने की आईसीएआर में अपील की थी। जानकारों के अनुसार इन राज्यों ने जीआई एक्ट के तहत बासमती चावल का पंजीयन कराया है।जानकारों के अनुसार दूसरे राज्यों में बासमती की खेती में रासयनों के प्रयोग से उसकी क्वालिटी खराब हो रही थी। बड़े पैमाने पर रसायनों के प्रयोग से कई देशों ने खरीदा हुआ बासमती चावल लौटा दिया।

 

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