वन विभाग को जलवायु परिवर्तन हेतु मुख्य किरदार निभाने की जरुरत : महेश गागडा

०० जलवायु परिवर्तन व्याख्यान माला पर किया गया व्याख्यान का आयोजन

०० वन मंत्री महेश गागड़ा द्वारा की गयी कार्यक्रम की अध्यक्षता

 रायपुर| छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन, रायपुर द्वारा आज जलवायु परिवर्तन व्याख्यान माला के अंतर्गत व्याख्यान का आयोजन किया गया। आयोजन में मुख्य वक्ता के रुप में यूनेस्को, नई दिल्ली से आए डाॅ. राम बूझ, प्रोग्राम चीफ, पारिस्थितिकीय विज्ञान द्वारा ‘‘जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता तथा सतत् विकास’’ विषय पर व्याख्यान दिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महेश गागड़ा, मंत्री, वन, विधि एवं विधायी कार्य, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा की गई। कार्यशाला में वन विभाग एवं राज्य जलवायु परिवर्तन कार्य योजना में दर्शित प्रमुख विभागों के प्रतिनिधि, वैज्ञानिक गण, शैक्षणिक एवं शोध संस्थाओं के प्रतिनिधि, राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए विद्यार्थी एवं गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत डा. ए.ए. बोआज, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख तथा नोडल अधिकारी, राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र, रायपुर द्वारा स्वागत भाषण एवं मुख्य अतिथियों का संक्षिप्त परिचय के साथ की गई। अपने उद्बोधन में डाॅ. बोआज द्वारा राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र द्वारा संचालित गतिविधियों की संक्षिप्त जानकारी दी गई एवं बताया गया कि संस्थान द्वारा भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के सहयोग से राज्य के वन्य जीव अभ्यारण्य, टाइगर रिजर्व एवं जैव विविधता जैसे विषयों पर 13 पुस्तकों का प्रकाशन किया जा रहा हैै एवं जैव संग्रहालय की स्थापना की जा रही है। साथ ही बताया गया कि देश में इस प्रकार का कार्य करने वाला छत्तीसगढ़ प्रथम राज्य है। डाॅ. बोआज द्वारा केंद्र में तैयार की जा रहे पुस्तकालय एवं डिजिटल लाइब्रेरी की जानकारी दी गई एवं उपस्थित सभी प्रतिभागियों से विषय संबंधी पुस्तकों एवं आंकड़ों को प्रदान करने का आह्वान किया गया। साथ ही केंद्र द्वारा प्रकाशित न्यूज लैटर एवं वेब साइट के बारे में जानकारी दी गई।  कार्यक्रम के अवसर पर माननीय वन मंत्री जी द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र द्वारा प्रकाशित त्रैमासिक न्यूज लैटर के प्रथम अंक का विमोचन एवं केंद्र की वेब साइट का शुभारंभ किया गया। अपने अध्यक्षीय भाषण में माननीय वन मंत्री महोदय द्वारा छत्तीसगढ़ वन विभाग को जलवायु परिवर्तन हेतु मुख्य किरदार निभाने के लिए कहा गया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से किसानो को हो रही समस्याओं के बारे में चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि जलवायु परिवर्तन के परिणाम से अगर किसान एवं कृषि प्रभावित होती है, तब न केवल उनकी आजीविका के लिए समस्या है, बल्कि सामान्य जनों को भी इसके परिणाम भुगतने होंगे। अतः आज और अभी से हमें इस विषय में मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने अपने उद्बोधन में विभिन्न विश्वविद्यालयों में जाकर जलवायु परिवर्तन के विषय में विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाने पर जोर दिया, ताकि आने वाली पीढ़ी जलवायु परिवर्तन को समझ सकें और उसके लिए कार्य कर सकें।

अपने व्याख्यान में डाॅ. राम बूझ द्वारा जलवायु परिवर्तन पर विषय पर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किए गए प्रयासों एवं कार्यक्रमों की विभिन्न जानकारियां प्रदान की गई। उनके द्वारा जलवायु परिवर्तन पर ऐतिहासिक भूमिका का विश्लेषण किया गया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन का वैश्विक स्तर पर विश्लेषण किया एवं भारत देश पर जलवायु परिवर्तन का क्या प्रतिकूल प्रभाव के बारे में भी संक्षिप्त विवरण दिया गया। डाॅ. बूझ द्वारा राज्य एवं स्थानीय स्तर पर विभिन्न विपदाओं एवं जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से निपटने हेतु विभिन्न प्रकार के उपायों का उल्लेख करते हुए स्थानीय जनता की भागीदारी से क्या योगदान किया जा सकता है, के बारे में विस्तृत रुप से बताया गया। डाॅ. बूझ द्वारा जलवायु परिवर्तन का जैव विविधता पर हो रहे प्रभाव की विस्तृत जानकारी दी गई एवं राष्ट्रीय स्तर पर भारत द्वारा किए गए पैरिस समझौते में INDC (राष्ट्रीय निर्धारित योगदान) को राज्य स्तर पर किस प्रकार से योगदान दिया जा सकता है, के बारे में विस्तृत रुप से बताया गया। साथ ही कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों के प्रश्नों का उत्तर डाॅ. राम बूझ द्वारा दिया गया।

 

error: Content is protected !!