छत्तीसगढ़ के सीताफलों के पल्प से बनेगी आइसक्रीम  होने लगी ऑन लाइन बुकिंग

०० मुख्यमंत्री ने खेती में नये प्रयोगों के लिए किसानों को दी बधाई

०० राज्य सरकार के सहयोग से कांकेर में फ्रेश कस्टर्ड एप्पल परियोजना

०० नक्सल प्रभावित पांच जिले पूर्ण रूप से बनेंगे जैविक खेती के जिले

रायपुर| मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य में खेती-किसानी के क्षेत्र में किसानों द्वारा किये जा रहे नये प्रयोगों की तारीफ करते हुए उनका हौसला बढ़ाया है। उन्होंने आज सवेरे आकाशवाणी के रायपुर केन्द्र से प्रसारित अपनी मासिक रेडियो वार्ता ‘रमन के गोठ’ में राज्य के आदिवासी बहुल बस्तर संभाग के कांकेर जिले में सीताफल की खेती को बढ़ावा देने का विशेष रूप से उल्लेख किया । उन्होंने कहा  – सीताफलों के पल्प से आइस-क्रीम बनाने के लिए ऑन लाइन बुकिंग भी की जा रही है। कांकेर जिले में सीताफल के पेड़ों का सर्वेक्षण करवाया गया है। अब तक सरकारी और निजी जमीन पर सीताफल के तीन लाख 19 हजार से ज्यादा पेड़ों की पहचान की गई है।

डॉ. सिंह ने बस्तर संभाग के ही नक्सल प्रभावित सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर और नारायणपुर जिले में और रायपुर संभाग के गरियाबंद जिले में किसानों द्वारा जैविक खेती के लिए चलाए जा रहे अभियान की भी तारीफ की। कांकेर जिले में सीताफल की खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार के सहयोग से संचालित कांगेरवेली फ्रेश कस्टर्ड एप्पल परियोजना की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे बस्तर अंचल में आ रहे परिवर्तन का एक उदाहरण बताया। उन्होंने कहा सहकारी समिति बनाकर सीताफल उत्पादक किसानों को इस परियोजना से जोड़ा गया है। सीताफल उत्पादक किसानों को जिला प्रशासन द्वारा सीताफल का पल्प निकालने के लिए मशीन और उसे संरक्षित करने के लिए फ्रिजर दिए गए है। अब तो सीताफल के पल्प से आइस-क्रीम बनाने के लिए ऑन लाइन बुकिंग भी होने लगी है।

मुख्यमंत्री ने कहा – राजधानी रायपुर के बाजार में भी अब कांकेर के सीताफलों के पल्पों से आइस-क्रीम के साथ-साथ सीताफलों की बिक्री भी बड़े पैमाने पर होने लगी है। यह उत्पादन राज्य से बाहर भी भेजा जा रहा है। आकर्षक पैकिंग कर बड़े बाजारों में इस उत्पादन को बेचने की व्यवस्था की गई है। डॉ. रमन सिंह ने कहा-राज्य में जैविक खेती का प्रयोग हो रहा है और बस्तर इसका नेतृत्व कर रहा है। आज छत्तीसगढ़ में लगभग 23 हजार हेक्टेयर के रकबे में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने नक्सल प्रभावित पांच जिलों सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर और गरियाबंद जिले के किसानों को जैविक खेती के अभियान के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा – इन पांच जिलों को पूर्ण रूप से जैविक खेती का जिला बनाया जा रहा है, जबकि प्रदेश के अन्य जिलों में एक-एक विकासखंड को भी इसके लिए चुना गया है। डॉ. रमन सिंह ने कोरिया जिले के ग्राम ओमझर में महिलाओं द्वारा सामूहिक खेती का प्रयोग किए जाने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा – इस ग्राम पंचायत क्षेत्र में रशीदा बानो, फूलकुंवर, रखीमुनि आदि महिलाओं ने मिलकर न सिर्फ अपनी बल्कि धरती की किस्मत बदल दी है। जहां पहले मोटा चावल होने से गरीबी पसरी थी, वहां इन महिलाओं ने सब्जियों की खेती करके अपनी आमदनी कई गुना बढ़ा ली है और अंचल में एक मिसाल बन गई है। डॉ. रमन सिंह ने उत्तर बस्तर जिले के ग्राम तारसगांव (विकासखंड चारामा) निवासी श्री अम्मूराम का उल्लेख करते हुए कहा कि वे अब बेरोजगार नहीं, बल्कि एक सफल व्यवसायी कहलाते हैं। श्री अम्मूराम ने मनरेगा और ग्रामीण बैकयार्ड कुक्कुटपालन योजना के समन्वय से कड़कनाथ मुर्गा पालन शुरू किया है। डॉ. रमन सिंह ने कहा – मुझे लगता है छत्तीसगढ़ के किसान अब सिर्फ धान पर निर्भर नहीं रहेंगे। धान के अलावा गेहूं, मक्का, तिलहन और दलहन की खेती और डेयरी तथा खेती से जुड़े दूसरे व्यवसायों की ओर भी छत्तीसगढ़ के किसान बढ़ रहे हैं। अब हमारे किसान अपनी मेहनत से सफलता की नई इबारत लिख रहे हैं।

 

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