छात्रा की मौत के मामले में आश्रम अधीक्षिका गिरफ्तार व रिहा

दंतेवाड़ा। एक माह पहले नाले में नहाने गई छात्रा की डूबने से हुई मौत मामले में कुआकोंडा पुलिस ने आश्रम अधीक्षिका को गिरफ्तार करने के बाद मुचलका पर रिहा कर दिया। अधीक्षिका के खिलाफ पुलिस ने गैर इरादन हत्या का अपराध दर्ज किया था। एसडीएम जांच में अधीक्षिका की लापरवाही सामने आई थी।इसके बाद जिला प्रशासन की ओर से आजाक के मंडल संयोजक ने कुआकोंडा थाने में एफआईआर दर्ज करवाया था।

टीआई कुआकोंडा डीएस बरूआ ने बताया कि अधीक्षिका के खिलाफ भादंवि की धारा 304 (ए) का अपराध दर्ज किया गया था।बुधवार की सुबह अधीक्षिका की गिरफ्तारी के बाद निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया। ज्ञात हो कि माह भर पहले 4 सितंबर को आश्रम की 15 छात्राएं बाहर नाले में नहाने गई थी। जहां एक छात्रा की मौत डूबने से हो गई थी। इसके बाद परिजनों छात्रावास प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते गिरफ्तारी और सजा की मांग की थी।इस बीच प्रशासन ने अधीक्षिका को तत्काल निलंबित करते एसडीएम को जांच की जिम्मेदारी दी थी। बताया गया कि एसडीएम की जांच में अधीक्षिका की लापरवाही उजागर हुई। इसके बाद प्रशासन द्वारा अधीक्षिका के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस को आवेदन दिया था। पुलिस आवेदन और प्रशासनिक जांच के बाद अधीक्षिका की गिरफ्तारी बुधवार की सुबह की गई।

शिक्षक संघ बचाव में तो समाज ने गिरफ्तारी के लिए दिया था आवेदन :- छात्रा की हत्या के बाद अधीक्षिका और छात्रावास के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ परिजनों के साथ धाकड़ क्षत्रिय राजपूत समाज गिरफ्तारी और सजा की मांग कर रहा था। इसके लिए वे कलेक्टर को आवेदन भी सौंपा था। परिजनों का कहना था कि छात्रा तैरना जानती थी, इसलिए उसकी मौत डूबने से नहीं हो सकती।वहीं आश्रम में पानी की सुविधा नहीं मिलने से एक साथ 15 छात्राएं नहाने के लिए नाले पर गई। उन्हें रोकने की कोशिश अधीक्षिका और मौजूद गार्ड ने नहीं किया था। इसके अलावा अन्य शिकायतें भी थी। जबकि अधीक्षिका के पक्ष में शिक्षक संघ खड़ा रहा।कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में संघ पदाधिकारियों ने उसकी गिरफ्तारी नहीं कर विभागीय जांच और दंड की अपील की थी। बावजूद प्रशासन ने मामले की जांच एसडीएम से करवाया और लापरवाह अधीक्षिका के खिलाफ कुआकोंडा थाने में गिरफ्तारी की एफआईआर दर्ज हुई।

 

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