बुराइयों की पाठशाला है रावण-पंडित विजय शंकर मेहता

रायपुर| सप्रे शाळा मैदान में आयोजित दशहरा पर्व आयोजन में रावण दहन के पूर्व प्रख्यात कथाकार पंडित विजय शंकर मेहता का “एक शाम रावण के नाम” पर व्याख्यान का आयोजन किया। इस आयोजन में प्रदेश के धर्मस्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल भी उपस्थित थे।पंडित मेहता ने शास्त्रों के अनुसार अपनी बात रखते हुए  रावण के चरित्र और कृतित्व को बुराइयों की पाठशाला बताया। उन्होंने कहा कि योग्यता जब भोग विलास में डूब जाती है तब रावण का जन्म होता है। मनुष्य के शरीर का सदुपयोग करो तो वह राम बनता है और अगर दुरुपयोग किया रावण बन जाता है।श्री मेहता ने कहा कि रावण सर्वशक्तिमान था। अपने दम पर उसने यम,वरुण,कुबेर, इंद्र सबको पराजित किया और विश्व विजेता बन गया।परंतु वह अपने भीतर के अहंकार को पराजित नहीं कर सका ।उन्होंने रावण के जीवन पर आधारित तीन सूत्र बताते हुए कहा कि दिमाग में कोई शुभ कार्य आते ही उसे कभी टाले नही, रावण की तरह प्रतिद्वंदी को कभी कमजोर न समझें और अपने जीवन के कुछ महत्वपूर्ण रहस्य किसी से न कहे।

आज भी कुछ लोग पूछते हैं रावण का क्या अपराध था :- पंडित मेहता ने कहा कि आज भी कुछ लोग रावण के पक्षधर हैं । वह कहते हैं रावण ने सीता मैया को अपने पास रखा पर छुआ तक नहीं। ऐसे लोगों पर आधा अधूरा ज्ञान बाटकर समाज को दूषित करने वाला बताया। उन्होंने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए बताया कि स्त्रियां रावण की कमजोरी थी। वह परिवारिक मर्यादाओं का भी पालन नहीं करता था।अपनी साली माया को भी बुरी नीयत डाली थी। जिस पर उसके साडू ने उसकी नियत को भापकर उसे बंदी बना लिया था। इतना ही नही अपने बड़े भाई कुबेर की बहु रंभा के साथ बलात्कार जैसा अपराध रावण ने किया था । फल स्वरुप उसे श्राप मिला था कि पर नारी से जबर्दस्ती करने पर उसके सिर के टुकड़े हो जाएंगे। बलात्कार,अपहरण उर हत्या जैसे अपराध का प्रारंभ रावण ने ही किया।

भगवा वस्त्र धारियों पर बावले हो जाते हैं भारतवासी :- पंडित मेहता ने कहा कि भगवा वस्त्र धारियों के प्रति हमारी धर्म संस्कृति का पालन करने वाले लोगों की आस्था प्रबल होती है। सीता मैया का अपहरण भी रावण ने साधु वेश में किया था। आज भी हमारे सामने ऐसे कई उदाहरण मिल जाते हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि साधुओं के वेश में कुछ रावण आज भी है जो धर्म संस्कृति को बदनाम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नीयत साफ़ रहती है तो नियति भी साथ देती है। वरना रावण की तरह सारी परिस्थितियां विपरीत होती चली जाती है।

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