सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को बांटे जाएंगे दलहनी-तिलहनी फसलों के बीजों के निःशुल्क मिनीकिट

०० कृषि मंत्री अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद की समीक्षा बैठक में दिए निर्देश

रायपुर| कृषि मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने अल्पवर्षा से बहुत ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को दलहनी-तिलहनी फसलों के बीजों के मिनीकिट प्राथमिकता के आधार पर तत्काल निःशुल्क उपलब्ध कराने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए है। श्री अग्रवाल कल देर शाम यहां मंत्रालय में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद की समीक्षा बैठक में अधिकारियों से कहा कि मैदानी अधिकारियों से जल्द से जल्द रिपोर्ट प्राप्त कर मिनीकिट वितरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में बीज मिनीकिट की कमी होने या वितरण नहीं होने की शिकायत नहीं आनी चाहिए। इस संबंध में किसी भी प्रकार की शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के उत्तरी क्षेत्र के जिलों मेें उद्यानिकी फसल ज्यादा ली जाती है। इन क्षेत्रों के किसानों को केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं के तहत उद्यानिकी फसलों के बीजों के मिनीकिट वितरण की व्यवस्था की जाए। उन्होंने इसके साथ ही मिनीकिट वितरण की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। श्री अग्रवाल ने कहा कि अल्प वर्षा प्रभावित क्षेत्रों की जमीनों में उपलब्ध नमी को देखते हुए रबी मौसम की उक्त फसल बोने किसानों को प्रेरित किया जाए। उद्यानिकी संचालनालय के अंतर्गत संचालित प्लग टाइप सीडलिंग प्लांट से सब्जियों के पौधे अधिक से अधिक किसानों को उपलब्ध कराया जाए। सब्जियों के पौधे तैयार करने बीजों की व्यवस्था विभाग की ओर से होनी चाहिए।
श्री अग्रवाल ने मछली पालन विभाग के अधिकारियों को हर विकासखंड में सौ-सौ किसानों को मछली पालन के लिए बीज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने पशुपालन विभाग के अधिकारियों से कहा कि अल्प वर्षा प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करने अभी से कार्रवाई की जाए। उद्यमिता विकास योजना के तहत पांच जैविक जिलों में 250 डेयरी तथा 22 जैविक विकासखंड में 220 डेयरी शुरू करने के लिए पशुपालन किसानों को प्रोत्साहित किया जाए। श्री अग्रवाल ने कहा कि सूखे की इस हालत में कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से किसानों को रबी मौसम के लिए उपयुक्त फसल बोने सुझाव दिया जाना चाहिए। श्री अग्रवाल ने प्रदेश के सौ प्रगतिशील किसानों का चयन कर एकीकृत कृषि करने के लिए प्रोत्साहन देने की जरूरत है। इसके अंतर्गत अनाज, दलहन-तिलहन के साथ-साथ उद्यानिकी, पशुपालन और मछली पालन एक साथ की जाती है। श्री अग्रवाल ने कृषि उपकरणों और मशीनों की खरीदी के लिए एक अप्रैल 2017 से शुरू हुई नई व्यवस्था में प्रगति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सूखे के कारण वर्तमान में सिंचाई पम्पों, स्प्रिंकलर, ड्रिप सिस्टम उपकरण की मांग बढ़ेगी। कृषि उपकरण और मशीन खरीदने ऑनलाईन व्यवस्था की गई है। इस व्यवस्था को सुचारू ढंग से संचालित करने के लिए नियमित मॉनिटरिंग की जरूरत है। कृषि मंत्री ने अधिकारियों को रबी मौसम के लिए उर्वरकों की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए। बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. विशाल चन्द्राकर, सदस्य सर्वश्री अजीत चंद्रवंशी, विशेषर साहू, मितुल कोठारी, कमल किशोर कश्यप, विपुल शर्मा, भीमसेन दुबे, अपर मुख्य सचिव एवं कृषि उत्पादन आयुक्त श्री अजय सिंह, सचिव कृषि श्री अनूप श्रीवास्तव, छत्तीसगढ़ बीज एवं कृषि विकास निगम के प्रबंध संचालक श्री आलोक अवस्थी, मार्कफेड के प्रबंधक संचालक श्री पी. अंबलगन, संचालक कृषि श्री एम.एस. केरकेट्टा, संचालक पशु चिकित्सा डॉ. एस.के. पाण्डेय, संचालक मछली पालन श्री व्ही.के. शुक्ला सहित कृषि विभाग, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, मंडी बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 

 

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