किसानों को कंगाल, जवानों को मजदूर बनाने में लगी है छत्तीसगढ़ सरकार: कांग्रेस

रायपुर| छत्तीसगढ़ किसानों का प्रदेश है जब छत्तीसगढ़ बना तो उम्मीद जगी कि अब किसान और किसानी फलेंगे-फूलेंगे मगर जैसे-जैसे समय बीतता गया किसानों को सिर्फ हताशा के सिवा कुछ नही मिला। कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र शर्मा ने एक विज्ञप्ति में कहा कि दुर्भाग्य से 2003 से किसान विरोधी सरकार सत्तारूढ़ है जो छत्तीसगढ़ के किसानों को खाना तो दे सकती है किंतु खाना पैदा करने के हुनर से वंचित रखना चाहती है।
2003 में गरीबी रेखा के नीचे 18 लाख परिवार थे जो अब 59 लाख से अधिक है,एक लाख हेक्टेयर खेती का रकबा घट गया, किसानों की संख्या 42 लाख से घटकर 37 लाख हो गया जबकि भूमिहीन मजदूर 31 लाख से बढ़कर 42 लाख हो गए जब कुल बजट 4000 करोड़ था तब इंदिरा खेत गंगा, खेतो में डबरी जैसी योजना से किसानों को पानी देने का प्रयास हुआ, सोनिया जी ने अपने दौरे में अकाल ग्रस्त लवन अंचल को राजीव गांधी ब्यपवर्तन योजना की स्वीकृति दी जिसका बजट 156 करोड़ था जो कि अभी भी अधूरा है और बजट 500 करोड़ से ऊपर जा चुका है। भाजपा सरकार ने बिना सोचे समझे तमाम नदियों में एनीकट बनाये जो किसानों के बजाय उद्योग पतियों की क्षुधा पूर्ति कर रहा है।सुरेंद्र शर्मा ने आगे कहा कि तत्कालीन यूपीए सरकार ने जल, जंगल की जमीन और संसाधन पर वनवासियों को हक दिया जिसमें उनके कब्जे की भूमि का पट्टा वितरण, वनोपज पर उनका अधिकार के साथी वन के सभी संसाधनों पर उन्हें अधिकार देने का कानून बनाया और क्रियान्वयन के लिए 2013 तक का समय दिया। छत्तीसगढ़ सरकार ने वनवासियों को उनके नैसर्गिक एवम कानूनी अधिकार से वंचित रखा वे आज भी पट्टे के लिए भटक रहे है बलौदाबाजार जिले में तो अभी पट्टा वितरण आरम्भ भी नही हुआ है। इसके लिए आंदोलन करने वालो का दमन किया जा रहा है ,घर जलाने की धमकी दी जा रही है।सुरेंद्र शर्मा ने कहा सरकार ने अनुबंध कर तमाम कृषि भूमि उद्योगों को सौंप दिए करार के अनुसार उन्हें 75 प्रतिशत अकुशल 50 प्रतिशत कुशल और 33 प्रतिशत प्रशासनिक पदों पर स्थानीय लोगो को नियुक्त करना अनिवार्य है किंतु शासन ने इसके पालन को सुनिश्चित नही किया जिसके कारण उद्योगों में माली ड्राइवर वेटर जैसे पदों पर भी पर अन्य प्रदेश के लोग कार्यरत है ,शिकायत करने पर कोई कार्यवाही नही होती क्योंकि भाजपा के चहेते वहां ठेकेदारी कर मोटी कमाई कर रहे है।उद्योग समूह पर्यावरण की न सिर्फ अनदेखी कर रहे है बल्कि पयार्वरण के लिए आवश्यक उपकरणों को मिली भगत से बंद रख जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। किसी भी राज्य की पूंजी उसके बच्चे हैं क्योंकि वही भविष्य है, बच्चो का भविष्य गढ़ने की जिम्मेदारी शिक्षा पर निर्भर है। सरकार के मुख्य सचिव स्वयं स्वीकार कर चुके है कि छत्तीसगढ़ की शिक्षा बर्बाद हो चुकी है शासकीय विद्यालय मध्यान्ह भोजन केंद्र बन कर रह गए है। सड़को को निर्माण तेजी से हो रहा है कि कोई भी सड़क पांच साल भी नही चलता क्यो कि सड़क बनाने में सरकार के ठेकेदार गिट्टी, रेत मुरुम, मिट्टी तक खा रहे है।छत्तीसगढ़ का भोलापन ओर सहकारिता तार-तार हो गया अब गांव अपने नही लगते, रामायण, दुर्गोत्सव या कोई भी उत्सव हो शराबखोरी ने सत्यानाश कर दिया है और सरकार की बेशर्मी देखिये शराब बंदी करने के बजाय खुद शराब बेचने लगी, जिन पुलिस वालों को कोचियों को गिरफ्तार करने की जिम्मेदारी मिलनी चाहिए उन्हें भठ्ठी की रखवाली में लगा दिया, जिस कलेक्टर के कहने से भठ्ठी बन्द होती है उसे ही शराब दुकान खोजने ओर खोलने की जिम्मेदारी सौंप दी गई ।सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ का सपना देखने वालों ने कभी कल्पना भी नही की होगी कि कभी छत्तीसगढ़ ऐसा भी होगा जिसमें तीजन बाई को तीस हजार तो करीना कपूर को एक करोड़ रुपये भुगतान किया जएगा, किसान आत्म हत्या के लिए मजबूर होंगे, नौजवान गांव छोड़ शहर की ओर भागेंगे, परंपराएँ दम तोड़ देंगी ओर छत्तीसगढ़िहा न आधुनिक बन पाएगा न परंपराओं का पालन कर पायेगा ओर त्रिशंकु की तरह बीच में लटक जाएगा ।

 

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