सहकारिता में प्रदेश की आर्थिक तस्वीर बदलने की ताकत: डॉ. रमन सिंह​

00 मुख्यमंत्री ने किया राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सह सम्मेलन का शुभारंभ

00 प्रदेश की सभी 1333 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों में होगी माइक्रो एटीएम की सुविधा

रायपुर| मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि सहकारिता क्षेत्र में प्रदेश की आर्थिक तस्वीर बदलने की ताकत है। सहकारिता के माध्यम से कुटीर और छोटे-छोटे व्यवसाय प्रारंभ करके लाखों लोगों को रोजगार प्रदान किया जा सकता है। मुख्यमंत्री आज यहां इंडोर स्टेडियम में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के नव-निर्वाचित सहकारी पदाधिकारियों के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सह सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने सहकारिता ध्वज फहराकर सम्मेलन का शुभारंभ किया।

डॉ. सिंह ने मुख्य अतिथि की आसंदी से सम्मेलन में सहकारिता क्षेत्र के प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए कहा – प्रदेश में नवनिर्वाचित सहकारी पदाधिकारियों के लिए संभागीय मुख्यालयों के स्तर पर दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इन शिविरों के माध्यम से सहकारी प्रतिनिधियों को धान खरीदी, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, खाद, बीज वितरण के अलावा अन्य छोटे-छोटे व्यवसायों के क्षेत्र में काम करने के लिए तैयार किया जाएगा। सहकारी प्रतिनिधियों को स्थानीय स्तर पर संभावना वाले व्यवसायांे के लिए छोटे-छोटे समूहों के गठन, व्यवसाय के लिए उन्हें आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराने, व्यवसायों के सुचारू संचालन और समूहों के उत्पादों के विपणन में सहयोग के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के स्कूलों में अध्ययनरत लगभग 52 लाख बच्चों को गणवेश वितरित किए जाते हैं। यदि सहकारिता के माध्यम से गणवेशों के लिए कपड़े की बुनाई, सिलाई और वितरण का संगठित और सुव्यवस्थित तरीके से किया जाए तो इसके माध्यम से हजारों बुनकरों और महिला समूहों को रोजगार मिल सकता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर में 15-16 समितियां काजू प्रसंस्करण के क्षेत्र में आगे आयी हैं। इसी तरह 50 समूह कड़कनाथ मुर्गे पोल्ट्री में तैयार कर उनका विपणन करते हैं। ऐसे समूहों को सहकारिता के माध्यम से प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मत्स्य उत्पादन में छत्तीसगढ़ आज देश में पांचवे स्थान पर है। मत्स्य पालन, लघु वनोपज के व्यवसाय सहित दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में भी सहकारिता के माध्यम से काफी काम किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत प्रदेश में दो चरणों में 95 प्राथमिक सहकारी समितियों को रसोई गैस वितरण की जिम्मेदारी दी जा रही है। इसके लिए समितियों को बैंकों से कर्ज, गोदाम बनाने के लिए 15 लाख रूपए की सहायता भी दी जा रही है। सहकारिता मंत्री श्री दयालदास बघेल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। गृहमंत्री श्री रामसेवक पैकरा, खाद्य मंत्री श्री पुन्नूलाल मोहले, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती रमशीला साहू, संसदीय सचिव श्रीमती चंपादेवी पावले, लोकसभा सांसद श्री कमलभान सिंह, राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष श्री अशोक बजाज, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ के अध्यक्ष श्री राधाकृष्ण गुप्ता, दुग्ध संघ के अध्यक्ष श्री रसिक परमार और राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष श्री भरत साय विशेष अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रदेश की सभी एक हजार 333 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों में दो अक्टूबर से माइक्रो एटीएम लगाने का काम शुरू किया जाएगा। इससे किसानों को पैसे निकालने और जमा करने के सुविधा निकट भविष्य में मिलेगी। यह किसानों के लिए भी काफी सुरक्षित होगा। उन्होंने बताया कि लगभग दस लाख किसानों को किसान रूपे कार्ड अब तक वितरित किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मिलजुलकर काम करना ही सहकारिता की पहचान है। किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की व्यवस्था का संचालन सफलतापूर्वक प्राथमिक सहकारी समितियों के माध्यम से किया जा रहा है। किसानों से लगभग 70 लाख मीटरिक टन धान की खरीदी की जाती है और उन्हें लगभग 10 हजार 800 करोड़ रूपए का भुगतान किया जाता है। हिन्दुस्तान में किसी भी राज्य में ऐसी व्यवस्था नही है। सहकारिता प्रतिनिधि यह ध्यान रखें कि किसानों को धान बेचने और उसका भुगतान प्राप्त करने में कोई परेशानी न हो।

डॉ. सिंह ने कहा कि जिला सहकारी बैंकों के विलय के बाद अब प्राथमिक सहकारी समिति और अपेक्स बैंक की द्वि-स्तरीय व्यवस्था होगी इससे किसानों को ब्याज में ढाई प्रतिशत की बचत होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को समर्थन मूल्य पर वर्ष 2016 में खरीदे गये धान के लिए 2100 करोड़ रूपए के बोनस भुगतान के लिए सभी 27 जिलों में बोनस तिहार मनाया जाएगा। दीपावली के पहले किसानों के खातों में बोनस की राशि ऑन लाइन जमा हो जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्प वर्षा से निर्मित सूखे की स्थिति में किसानों को राजस्व पुस्तक परिपत्र के प्रावधानों के तहत सूखा राहत की राशि और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की राशि भी मिलेगी। मनरेगा में कार्य दिवसों की संख्या  एक सौ से बढ़ाकर दो सौ कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की कृषि उपज का लागत मूल्य कम करने के लिए राज्य सरकार द्वारा अनेक उपाए किए गए हैं। उन्हें शून्य प्रतिशत पर ब्याज दिया जा रहा है। किसानों को ब्याज के लगभग 160 करोड़ रूपए की बचत हो रही है। इसी तरह किसानों को 7500 यूनिट निःशुल्क बिजली देने, सिंचाई पम्प अनुदान और बिजली कनेक्शन के लिए कुल मिलाकर लगभग 1670 करोड़ रूपए का अनुदान दिया जाता है। सहकारिता मंत्री श्री दयालदास बघेल ने अध्यक्षीय आसंदी से सम्बोधित करते हुए कहा – सहकारी पदाधिकारी यह प्रयास करें कि समितियों में धान बेचने के लिए आने वाले किसानों को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं मिल सकें। उनकी धान का सही तौल हो, सही भुगतान मिले, उन्हें ज्यादा इंतजार न करना पड़े। उन्होंने कहा कि जिला सहकारी बैंकों के विलय का मुख्यमंत्री डॉ. सिंह द्वारा ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। इससे किसानों को फायदा होगा। उन्होंने सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएं दी। राज्य सरकार का निर्णय ऐतिहासिक कदम है। अच्छा काम करने से प्राथमिक सहकारी समितियों को फायदा होगा। गृह मंत्री श्री रामसेवक पैकरा और राज्य सहकारी विपणन संघ के अध्यक्ष श्री राधाकृष्ण गुप्ता ने भी अपने विचार प्रकट किए। राज्य सहकारी संघ के प्राधिकारी श्री लखनलाल साहू ने स्वागत भाषण दिया। मार्कफेड के उपाध्यक्ष श्री शशिकांत द्विवेदी ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस अवसर पर सहकारिता सचिव श्री डी.डी. सिंह, मार्कफेड के प्रबंध संचालक श्री पी. अंबलगन, पंजीयक सहकारी समितियां श्री जे.पी. पाठक, राज्य के सभी जिलों की सहकारिता से जुड़ी संस्थाएं, लघु वनोपज सहकारी समितियां, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियां, मत्स्य सहकारी समितियां, बुनकर सहकारी समितियां सहित अन्य सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारी और प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे। राज्य स्तरीय सहकारी प्रशिक्षण सह सम्मेलन में प्रशिक्षकों द्वारा समितियों के कार्य संचालन और विविध प्रावधानों की जानकारी प्रतिनिधियों को दी गई।

 

 

 

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